National Parties: राष्ट्रीय दलों की मान्यता और जमीन अलॉटमेंट के नियम बदलने चाहिए
National Parties: चुनाव आयोग को किसी भी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा देने के नियमों में फिर से बदलाव करने की जरूरत है| मौजूदा नियमों के मुताबिक़ किसी भी राजनीतिक दल का लोकसभा में एक भी सदस्य नहीं होने के बावजूद उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सकता है|
मौजूदा नियम यह है अगर किसी भी पार्टी को चार राज्यों में राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा मिल गया है, तो उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाएगा| आम आदमी पार्टी का लोकसभा में एक भी सदस्य नहीं होने के बावजूद उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया, क्योंकि उसे दिल्ली के बाद, पंजाब, गोवा और गुजरात में राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा मिल गया था|

राज्य स्तर का दर्जा देने के नियम भी बहुत शिथिल हैं, उन्हें भी बदले जाने की जरूरत है| चुनाव आयोग वक्त वक्त पर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा देने के नियमों को कड़े करने के बजाय शिथिल करता रहा है| इसके पीछे राजनीतिक दबावों ने भी काम किया| हालांकि सन 2000 में उस समय नियमों में भारी कमी सामने आई जब लोकसभा में 32 सीटें होने के बावजूद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता खत्म हो गई थी, क्योंकि उसे चार राज्यों में वांछित वोट प्रतिशत नहीं मिला था|
चुनाव आयोग ने नियमों को बदल कर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा देने का रास्ता खोला| उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने चुनाव आयोग से माकपा की राष्ट्रीय दल की मान्यता बरकरार रखने के लिए नियमों को शिथिल करने को कहा था, और चुनाव आयोग ने नियम शिथिल कर दिए|

भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य श्रीधरन पिल्लई ने हाल ही में माकपा पर तंज कसते हुए इस घटना की याद भी दिलाई है| उन्होंने कहा कि वाजपेयी की लोकतांत्रिक मानसिकता और व्यापक सोच के कारण सीपीएम आज एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मौजूद है| यह सच है कि राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा समाप्त होने के बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने वाजपेई से मदद की गुहार की थी| इसके बाद 2016 में बहुजन समाज पार्टी के लिए भी नियम शिथिल किए गए, हालांकि जनता का विशवास खोती हुई पार्टियों को कोई कब तक बचाएगा|
राष्ट्रीय दर्जे और राज्य स्तरीय दर्जे को पूरी तरह अलग अलग किए जाने की जरूरत है। अभी के नियमों के अनुसार किसी भी पार्टी को चार राज्यों में छह प्रतिशत वोट और लोकसभा की चार सीटें होने पर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलता है| हालांकि यह तार्किक नहीं है, लोकसभा की सीटों (543) का कम से कम दो प्रतिशत यानि 11 सीटों का प्रावधान होना चाहिए| अभी भी दूसरा विकल्प यह है कि किन्ही तीन राज्यों में पार्टी ने लोकसभा की कुल सीटों का दो प्रतिशत यानि 11 सीटें जीती हों|
राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे के लिए तीसरा विकल्प तो लोकतंत्र के लिए और भी खतरनाक है| तीसरा विकल्प यह है कि किन्हीं चार राज्यों में राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा होने पर भी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाता है| ऐसी सूरत में लोकसभा में सीटें होने की शर्त ही खत्म हो जाती है| अगर राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे के लिए मूल प्रावधान चार राज्यों में छह प्रतिशत सीटें और चार लोकसभा सीटें हैं (जिसे दो प्रतिशत किया जाना चाहिए), तो विकल्प में कम से कम छह राज्यों में राज्य स्तरीय पार्टी के दर्जे के साथ लोकसभा की एक प्रतिशत यानी छह सीटों की शर्त होनी चाहिए| अब एक उदाहरण से समझिए कि पूर्वोतर की एनपीपी को राष्ट्रीय दल का दर्जा है, जिसे देश के अन्य हिस्सों में कोई जानता तक नहीं|
राज्य स्तरीय पार्टी के दर्जे के लिए छह प्रतिशत वोटों के साथ विधानसभा की दो सीटों का प्रावधान है| इसे भी बदले जाने की जरूरत है, क्योंकि आज़ादी के बाद से मतदान प्रतिशत में कई गुना ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, इसलिए किसी पार्टी को राज्य स्तरीय दर्जे के लिए कम से कम दस प्रतिशत वोटों के साथ विधानसभा की (न्यूनतम दो सीटें) कुल सीटों का कम से कम दो प्रतिशत सीटें होना लाजिमी किया जाना चाहिए| मान लो किसी विधान सभा की दो सौ सीटें है, तो उस राज्य में राज्य स्तरीय दर्जे के लिए दस प्रतिशत वोटों के साथ चार विधानसभा सीटें होनी चाहिए|
जिस तरह 2006 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय दलों को देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यालय के लिए जमीन देने के नियम बनाए हैं, उसके लिए किसी भी राजनीतिक दल के लिए लोकसभा में प्रतिनिधित्व होने की शर्त जोड़ा जाना जरूरी है, नहीं तो रेवड़ियां बांटने वाली बात होगी| आम आदमी पार्टी ने 2015 का दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर एक प्लॉट पर अपना दफ्तर बना लिया था। बाद में पता चला कि वह प्लॉट तो हाई कोर्ट ने जिला न्यायालय के विस्तार हेतु रखा था।
अपने कार्यालय को जायज बताने के लिए आप ने हाईकोर्ट के बाद सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़ी| पार्टी का कोर्ट में तर्क था कि जिस जमीन पर उनका कब्जा था, केंद्र सरकार ने उसे दिल्ली हाईकोर्ट को अलॉट ही कैसे कर दिया| पार्टी के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्योंकि उस प्लॉट पर अब पार्टी का कार्यालय है, इसलिए हाईकोर्ट को केंद्र से कहीं और जमीन अलॉट करवा लेनी चाहिए|
राष्ट्रीय पार्टियों के लिए दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यालय के लिए 2006 में बनाई केंद्र सरकार की नीति भी खोटपूर्ण है| क्योंकि इस में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खत्म होने के बाद जमीन का अलाटमेंट रद्द करने का कोई प्रावाधान ही नहीं है| अभी हाल ही में जब आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय दल की मान्यता दी गई, तब एक साथ तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एनसीपी का राष्ट्रीय दल का दर्जा समाप्त कर दिया गया था|
इसलिए जरूरी है कि किसी भी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिलने पर राष्ट्रीय कार्यालय खोलने के लिए पन्द्रह साल तक उसे लुटियन जोन में कोई कोठी अलॉट की जानी चाहिए| अगर पन्द्रह साल तक वह राष्ट्रीय दर्जे को बरकरार रखता है, तो उसे इस शर्त पर जमीन अलॉट की जानी चाहिए कि जब वह राष्ट्रीय दल का दर्जा खो देगा, तो जमीन केंद्र सरकार को लौटा देगा|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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