यौन अपराधों के बाद भी बेशर्म क्यों रहते हैं राजनेता?
Revanna Case: चुनावों का मौसम न होता तो राजनेताओं के बहुत सारे सेक्स स्कैंडलों की तरह, शायद रेवन्ना एंड सन वाला मामला भी लीपापोती और आरोप-प्रत्यारोप में फँसकर चर्चा से गायब हो गया होता। लेकिन, चुनावी दबाव के चलते पिता हिरासत में हैं और बेटे के लिए ब्लू कॉर्नर नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है।
प्रभावशाली राजनेताओं और उनके सगे-संबंधियों की इस तरह के मामलों में लिप्तता का सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। कोई राजनीतिक दल इसका अपवाद नहीं है। लेकिन, जो दल सत्ता में हो, उसके नेताओं के कारनामे अपेक्षाकृत अधिक चर्चित होते हैं। यह एक अलग बात है कि सत्तारुढ़ दलों से उनकी संबंध अधिकतर मामलों में उनके लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं और यौन शोषण के संगीन से संगीन आरोप भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाते।

अक्सर ऐसे आरोपों को विरोधियों की साजिश करार देकर खारिज कर दिया जाता है। यहॉं तक कि कई बार तो इस तरह के मामलों को उजागर करने वाले लोगों और मीडिया संस्थानों को ही निशाने पर लेने की कोशिश की जाती है। जैसा कि रेवन्ना मामले में हुआ। प्रज्ज्वल कोर्ट की मदद से इस मामले को उजागर करने वाले 99 मीडिया संस्थानों पर अपने खिलाफ सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगवाने में सफल रहे थे।
पैसे, राजनीति और जाति की ताकत किस तरह शोषण के खिलाफ उठने वाली आवाजों का गला घोंटती है, यह हमने पिछले साल बृजभूषण सिंह बनाम महिला पहलवानों वाले मामले में भी देखा, जब उनके खिलाफ एफआईआर भी तब दर्ज की गई, जब सुप्रीम कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप किया। ऐसे उदाहरण, शोषितों को अपने साथ होने वाले शोषण का विरोध करने या इसके खिलाफ शिकायत करने से हतोत्साहित करते हैं। अगर शोषण करने वाला राजनीतिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता हो तो पीड़ितों के लिए न्याय पाने का रास्ता बहुत संकरा और जोखिम भरा हो जाता है।
इसलिए ऐसे बहुत सारे मामले तो सामने ही नहीं आ पाते और शोषण का सिलसिला गुपचुप जारी रहता है। रेवन्ना प्रकरण में भी शायद यही हो रहा था, अगर प्रज्ज्वल की करतूतों की वीडियो रिकॉर्डिंग सामने न आई होती। रेवन्ना के नाम की घोषणा से पहले ही स्थानीय भाजपा नेता देवराजे गौड़ा ने पार्टी नेताओं को मय सबूत एक चिट्ठी लिखी थी कि प्रज्ज्वल कितने विवादास्पद हैं। लेकिन गौड़ा की बात पर ध्यान देने की बजाए, प्रज्ज्वल को हासन सीट के लिए लोकसभा उम्मीदवार के रूप में समर्थन दे दिया गया। उसके बाद विरोधियों ने प्रज्ज्वल की शिकार महिलाओं के साथ उसके वीडियो हर तरफ फैला दिए।
प्रज्ज्वल से पहले भी सुरेश राम, राघव जी, अभिषेक मनु संघवी, ध्रुव नारायण सिंह, पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी, गायत्री प्रसाद प्रजापति, कुलदीप सिंह सेंगर, गोपाल कांडा, नारायण दत्त तिवारी, बृजभूषण सिंह जैसे नामों की एक लंबी फेहरिश्त है, जो यौन शोषण अथवा अनैतिक यौनाचार के आरोपों में घिरे रहे हैं। यह सूची बताती है कि इस मामले में किसी दल का दामन बेदाग नहीं है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के अनुसार निवर्तमान संसद और विभिन्न मौजूदा विधान सभाओं में कुल मिलाकर 134 जनप्रतिनिधि (21 सांसद और 113 विधायक), ऐसे हैं जिनके खिलाफ महिलाओं के सामूहिक बलात्कार, बलात्कार और हत्या, यौन उत्पीड़न आदि के आरोप लगे हुए हैं। हैरानी और इससे ज्यादा अफसोस की बात यह है कि हमारे सामने ऐसे बहुत कम उदाहरण हैं, जिनमें किसी राजनेता को ऐसे मामले में सजा मिली हो। यहॉं तक कि उसकी पार्टी भी उसका बचाव करती ही ज्यादा नजर आती है। बहुत ज्यादा हुआ तो उसे पद छोड़ने के लिए मना लिया जाता है। लेकिन, बदले में उसकी पत्नी या बेटे को उसकी खड़ाऊ सौंप दी जाती है।
ऐसे प्रकरणों में सजा मिलती है, शोषण के शिकार पीड़ित को। कुछ दिनों लोग चटखारे ले-लेकर नेताजी के किस्से साझा करते हैं और जैसे-जैसे चर्चाएं धुंधलाने लगती हैं, दोषी धीरे-धीरे फिर से अपने पुराने रंग-ढंग में लौटने लगता है। वही लालबत्ती वाली गाड़ी, पुलिस की सुरक्षा, पीछे कार्यकर्ताओं का हुजूम, जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली बेशुमार सुविधाएं। उसके लिए सब कुछ सामान्य हो जाता है और हमारे लिए भी। लेकिन, जो उनकी ज्यादतियों के शिकार होते हैं, उनके लिए आगे फिर कभी कुछ सामान्य नहीं हो पाता।
बलात्कार और यौन शोषण के मामले में पीड़ितों की पहचान की गोपनीयता की रक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट तक चिंता व्यक्त कर चुका है कि हमारे समाज में यौन अपराध पीड़िता के साथ अपराधी से भी बदतर व्यवहार किया जाता है। ताजा मामले को ही लें। अपनी राजनीतिक रोटियॉं सेंकने के लिए कुछ लोगों ने वीडियो वाली पेन ड्राइव और उनके वीडियो को चारों और फैलाया। बस स्टॉप, पार्क, दुकानों आदि जगहों पर पेन ड्राइव फेंके, क्या उन्हें इस बात का ख्याल नहीं आया कि उनके इस कृत्य से पीड़िताओं का जीवन नष्ट भी हो सकता है?
इससे कई महिलाओं का जीवन प्रभावित हो भी रहा है, जिनके परिवारवालों ने या तो उन्हें साथ रखने से इंकार कर दिया है या फिर उन्हें साथ लेकर घर-गांव छोड़कर चले जाने पर मजबूर हुए हैं। इस इलाके में रेवन्ना परिवार का इतना दबदबा है कि कई पीड़िताओं ने डर की वजह से हासन जिले में अपने घर छोड़ दिए हैं। प्रज्ज्वल के पिता एचडी रेवन्ना को जिस मामले में हिरासत में लिया गया है, वह भी एक महिला के अपहरण का केस है, ताकि वह महिला विशेष जॉंच दल (एसआईटी) के पास न जा सके।
प्रज्ज्वल को उसके किए की सजा मिलेगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन, बख्शा उन लोगों को को भी नहीं जाना चाहिए, जिन्होंने ये वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए, या उनकी पेन ड्राइव की प्रतियॉं जगह-जगह बॉंटीं। आखिर, पीड़ितों की पहचान उजागर होने से उनकी प्रतिष्ठा और जीवन, दोनों के लिए जो खतरा उत्पन्न हुआ है, उसके जिम्मेदार यही लोग तो हैं। इस मामले को सिर्फ एक राज्य, एक दल या एक परिवार तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। यह उस सड़ांध का विस्तार है, जो दशकों से कुछ राजनेताओं द्वारा स्वयं को हर कानून से ऊपर और हर सजा से प्रतिरक्षित समझने की प्रवृत्ति से हमारे समाज में फैली हुई है।
यह राजनेताओं की उस सोच की देन है, जिसमें वे सत्ता को कुछ भी हासिल कर लेने के अपने जन्मसिद्ध अधिकार के रूप में देखते हैं। इस बेलगाम व्यवहार पर रोक लगाना बहुत जरूरी है। ऐसे अपराधियों के लिए न समाज में कोई जगह होनी चाहिए, न राजनीति में। अगर राजनीतिक दल इस काम को नहीं कर रहे तो मतदाताओं को करना चाहिए।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
तो इसलिए बदले जा रहे CM, गवर्नर–सीमांचल से नया केंद्रशासित प्रदेश? नया राज्य या UT बनाने के लिए क्या है नियम? -
IPS LOVE STORY: प्यार के आगे टूटी जाति की दीवार! किसान का बेटा बनेगा SP अंशिका वर्मा का दूल्हा -
T20 World Cup फाइनल से पहले न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ने लिया संन्यास, क्रिकेट जगत में मची खलबली, फैंस हैरान -
Balen Shah Rap Song: वो गाना जिसने बालेन शाह को पहुंचा दिया PM की कुर्सी तक! आखिर क्या था उस संगीत में? -
PM Kisan Yojana: मार्च की इस तारीख को आएगी पीएम किसान की 22वीं किस्त! क्या है लेटेस्ट अपडेट? -
क्या कंगना रनौत ने चुपचाप कर ली सगाई? कौन है BJP सांसद का मंगेतर? इंटरनेट पर क्यों मचा हंगामा? जानें सच -
IND vs NZ Final: फाइनल से पहले सन्नाटे में क्रिकेट फैंस! आज अपना आखिरी मैच खेलेंगे कप्तान सूर्यकुमार यादव? -
UPSC में 301 रैंक पर 2 आकांक्षा सिंह! ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती या वाराणसी की डॉक्टर-कौन हुआ पास, क्या है सच? -
पिता की चिता को मुखाग्नि देने के बाद दिया इंटरव्यू, रूला देगी UPSC क्रैक करने वाली जूही दास की कहानी -
IAS IPS Love Story: 'ट्रेनिंग के दौरान कर बैठे इश्क',कौन हैं ये IAS जिसने देश सेवा के लिए छोड़ी 30 लाख की Job? -
IND vs NZ: 'झूठ बोल रहा है!' सेंटनर के बयान पर सूर्यकुमार यादव का पलटवार, फाइनल से पहले गरम हुआ माहौल -
Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 8 March: आज के मैच का टॉस कौन जीता- भारत vs न्यूजीलैंड












Click it and Unblock the Notifications