Make in India: मेक इन इंडिया के जरिए चीन को चुनौती

प्रधानमंत्री मोदी की मेक इन इंडिया नीति से भारत के निर्माण क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव आ रहा है। इस नीति से भारत निर्माण क्षेत्र में चीन को चुनौती देता नजर आने लगा है।

pm narendra modi challenge to China through Make in India

Make in India: आज से कुछ साल पहले हम अक्सर मेड इन इंडिया शब्द सुनते थे लेकिन सन 2014 के बाद से हमें मेड इन इंडिया की बनिस्बत मेक इन इंडिया के शब्द ज्यादा सुनाई देते हैं। मेड से मेक में हुए इस बदलाव के बीच भारत में क्या कुछ बदला है?

मेड इन इंडिया के तहत यह अन्तर्निहित शर्त नहीं थी कि भारत में बेचना है तो भारत में बनाओ, जबकि वास्तविकता यह थी कि हम खुद ही अपने आप में एक बड़ा बाजार थे और हैं। अगर यह अन्तर्निहित शर्त पहले लगा देते तो भारत के पास क्रय शक्ति युक्त दुनिया का बड़ा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के कारण जिसको भारत में सामान बेचना है वह यहां कारखाना लगाने को बाध्य होता।

लेकिन 2014 से पहले मेक इन इंडिया की अन्तर्निहित शर्त नहीं होने के कारण कंपनियां विदेशों में माल बनाकर भारत में बेचा करती थीं। अब मेक इन इंडिया पालिसी और इसके तहत जो तमाम सुविधाएं और इंसेंटिव दिए गये तो कंपनियों ने भारत में बेचने के लिये भारत में ही अपना सामान बनाने लगीं।

इससे केवल उन्हें भारत का ही बाजार नहीं मिला बल्कि यहां का बना माल विदेशों में भी वे बेचने लगीं। भारत का जो आयात था वह कम होने लगा और उसी विदेशी तकनीकी से अब भारत में निर्मित होने लगा। धीरे धीरे भारत वैश्विक निवेश का केंद्र बनना शुरू हुआ। सस्ता कच्चा माल, सस्ता श्रम, एक जीएसटी, कम दर वाला आयकर, डिजिटल और भौतिक इंफ़्रा इन सब ने मिलकर मेक इन इंडिया को सुगम बनाया। अब विदेशी कंपनियों के लिए भारत में माल बनाना सस्ता होने लगा।

भारत सरकार को यह लगने लगा था कि भारत अगर बाहर से माल खरीदता रहेगा तो न भारत को प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल होगी और न भारत आत्मनिर्भर बन पायेगा। इसीलिए भारत सरकार ने मेक इन इंडिया के साथ साथ आत्मनिर्भर भारत का अभियान भी शुरू किया। सबसे पहले टारगेट किया डिफेंस को। भारत सरकार ने यह भी सोचा कि जब उनके सामान की बिक्री कन्फर्म है तो क्यों ना उन्हें बोलें कि भारत को बेचने वाला साजो सामान भारत में ही बनाओ। डिफेंस से हुई शुरुआत धीरे धीरे कई क्षेत्रों तक जाने लगी, जिसमें मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक का बढ़ता हुआ बाजार प्रमुख है। इससे भारत में उत्पादन भी बढ़ा, रोजगार भी बढ़ा, और टैक्स के रूप में कमाई भी भारत सरकार को मिली। यह सब फीचर मेड इन इंडिया में सीमित रूप में थी। इसमें कोई अन्तर्निहित शर्त नहीं थी कि भारत में बेचना है तो भारत में बनाओ।

मेक इन इंडिया ने विदेशी मुद्रा भण्डार को बढ़ाने और चालू खाते का घाटा कम करने में भी मदद की, क्योंकि इस नीति से आयात की मात्रा कम हो गई। सरकार ने इसमें सहूलियत देने के लिए कुछ टैक्स और क़ानूनी सुधार भी किये ताकि मेक इन इंडिया सफल हो। जैसे सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स रेट घटाकर देश ही नहीं पूरी दुनिया को चौंका दिया। कुछ चुनिन्दा टैक्स को लेकर जो भारत की छवि दुनिया में बनी हुई थी वो अब बीते कुछ समय से खत्म हो रही है। कॉरपोरेट घरानों के लिए अब भारत टैक्स टेररिज्म वाला देश नहीं रहा। निवेशकों को भी लगने लगा है कि अब वह दौर गया जब पिछली तारीख से टैक्स के कानून बदल जाया करते थे या गैर जरुरी टैक्स लाद दिए जाते थे। अब सब डिजिटल हो गया है। पूरे देश में एक GST लगाने से भी टैक्स की परिभाषाओं को समझने की जो सहूलियतें मिली उसका सबने स्वागत किया।

भारत में घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की प्रभावी दर भी काफी कम हो गई। यदि कोई घरेलू कंपनी किसी प्रकार का प्रोत्साहन या छूट नहीं ले रही है, तो उनके लिए कॉरपोरेट टैक्स दर 22 फीसदी और यदि ले रही है तो लगभग 25 फीसदी के आसपास होगा। 22 फीसदी टैक्स का विकल्प चुनने वाली कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) नहीं देना होगा। नई घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी यदि कोई प्रोत्साहन या छूट नहीं ले रही है तो वह 15 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स रेट के हिसाब से टैक्स दे सकती है। ऐसी नई कम्पनियों के लिए सभी सरचार्ज और सेस लगाने के बाद नई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी के लिए टैक्स की प्रभावी दर 17.01 फीसदी ही होगा।

भारत के इस कदम से विश्व में भारत की टैक्स साख खूब बढ़ी है और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग ट्रेंड भारत की तरफ मुड़ने की सम्भावना है जो मेक इन इंडिया के लिए अच्छा होगा। अभी चीन में कॉरपोरेट टैक्स की मानक दर 25 फीसदी है। यदि कोई कॉरपोरेट कंपनी चीन की सरकार द्वारा प्रोत्साहन के लिए चिन्हित क्षेत्रों में कारोबार करता है तो उसके लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर 15 फीसदी की जा सकती है। हालांकि भारत में सभी नई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट को 15 फीसदी की दर दी गई है। चाइना की 15 फीसदी की दर काफी प्रतिबंधित है और वह चुनिंदा कंपनियों के लिए ही उपलब्ध होता है। चीन में इस प्रोत्साहन वाले क्षेत्रों में नई व अत्याधुनिक तकनीकी और कुछ खास एकीकृत सर्किट का उत्पादन ही शामिल है।

कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाने का अमेरीकी कारोबारियों ने भी स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे देश की और विश्व की भी आर्थिक सुस्ती दूर होगी और अमेरिकी कंपनियों को भारत में मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधि बढ़ाने का एक नया अवसर मिलेगा। ज्ञातव्य हो कि अमेरिका भारत के सबसे बड़े एफडीआई निवेशकों में शामिल है।

जहाँ तक वित्तीय घाटा का प्रश्न है इस टैक्स कटौती से राजस्व को होने वाले नुकसान से वित्तीय घाटा अधिक नहीं बढ़ेगा, क्योंकि एक तरफ तो यह कटौती होगी दूसरी तरफ GST एवं आयकर दोनों कर चुकाने वालों का आधार बढ़ जाएगा। इससे राजस्व की वसूली बढ़ेगी। इस कदम से जो सबसे पहला फायदा है वह यह है कि इससे भारतीय कंपनियों में कैश फ्लो बढेगा, जिसका इस्तेमाल कंपनियां अपने कर्ज को समायोजित करने और नौकरियां बढ़ाने या उसे स्थिर रखने में कर सकती हैं।

Recommended Video

      PM Modi की मां Heeraben की जिंदगी के 10 यादगार किस्से | वनइंडिया हिंदी *News

      वैश्विक स्तर पर अगर देखेंगे तो जो शीर्ष के 10 मैन्युफैक्चरिंग देश हैं उनके यहां भी जो कर की प्रभावी दर है निर्माण कारखानों पर, वह अब हमसे ज्यादा हो गई है। मतलब चीन, यूनाइटेड किंगडम, कोरिया, इटली, जापान, फ्रांस आदि देशों के कॉर्पोरेट इन्कम टैक्स अब भारत के नए प्रभावी कॉर्पोरेट इन्कम टैक्स 17 फीसदी से ज्यादा हो गए हैं। ऐसी दशा में जो वैश्विक निवेशक हैं उनके लिए भारत निवेश के लिए अब नए विकल्प के रूप में सामने आया है। इसलिए मेड इन इंडिया से मेक इन इंडिया के नीतिगत बदलाव से भारत को दीर्घकालिक लाभ होगा।

      यह भी पढ़ें: 2023 तक 75 Vande Bharat Express का लक्ष्य, पीएम मोदी ने 7वीं को दिखाई हरी झंडी, देखें ट्रेनों की पूरी लिस्ट

      (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

      Notifications
      Settings
      Clear Notifications
      Notifications
      Use the toggle to switch on notifications
      • Block for 8 hours
      • Block for 12 hours
      • Block for 24 hours
      • Don't block
      Gender
      Select your Gender
      • Male
      • Female
      • Others
      Age
      Select your Age Range
      • Under 18
      • 18 to 25
      • 26 to 35
      • 36 to 45
      • 45 to 55
      • 55+