मोदी ने पहले राहुल गांधी को प्रोजेक्ट किया, अब उन्हीं पर हमलावर
Modi ka Bhashan: इंडी एलायंस में किसी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर सहमति नहीं हुई थी। स्टालिन के जन्मदिन पर चैन्नई में हुई पार्टी में फारूख अब्दुल्ला ने प्रस्ताव जरुर रखा था, लेकिन वह तो एक तरह से यूपीए के घटक दलों का अनौपचारिक मिलन था।
इंडी एलायंस की मीटिंग में यह मुद्दा उठा जरूर था, लेकिन जब मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम रखा गया, तब वह खुद ही पीछे हट गए थे। राहुल गांधी का नाम किसी ने नहीं लिया था, बल्कि मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम का प्रस्ताव रखने वाली ममता बनर्जी ने ही बाद में कांग्रेस और वामपंथी दलों से सीट शेयरिंग से इंकार कर दिया।

कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को इंडी एलायंस का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया है। मोदी का कोई भाषण राहुल गांधी का जिक्र किए बिना खत्म नहीं होता। वह उतनी बार कांग्रेस का नाम भी नहीं लेते, जितनी बार राहुल गांधी का जिक्र करते हैं।
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से पूछो तो वे कहते हैं कि राहुल गांधी को कोई गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि उनमें कोई गंभीरता नहीं है। तो फिर नरेंद्र मोदी उन्हें क्यों गंभीरता से लेते हैं। इसका कारण यह है कि मोदी पर जितने जोरदार ढंग से राहुल गांधी हमला करते हैं, उतने जोरदार ढंग से और कोई नहीं करता।

मोदी को अंदाजा नहीं था कि राहुल गांधी का जाति आधारित जनगणना का एजेंडा चुनावों में आरक्षण पर सवाल का मुद्दा बन जाएगा। राहुल गांधी और इंडी एलायंस के सभी नेताओं ने मोदी पर संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने के ऐसे आरोप लगाए कि उस का असर वोटिंग पर दिखाई देने लगा।
भारतीय जनता पार्टी ने दशकों की कड़ी मेहनत के बाद दलितों, आदिवासियों और ओबीसी को अपने साथ जोड़ा है। हिन्दू एकजुट होकर भाजपा के पीछे खड़ा हुआ, तब जा कर भाजपा को 2014 में स्पष्ट बहुमत मिला। जब तक हिन्दुओं के ये तीनों वर्ग भाजपा के साथ हैं, उसे कोई नहीं हरा सकता।
जब तमिलनाडु के नेताओं ने सनातन धर्म के खिलाफ मोर्चा खोला था, तब द्रमुक के एक नेता ने कहा था कि सनातन धर्म की मुखालफत इंडी एलायंस का एजेंडा है। एक उद्धव ठाकरे के अलावा इंडी एलायंस के किसी नेता ने इसका खंडन नहीं किया था। कांग्रेस ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया था कि सबकी अपनी अपनी राय हो सकती है, कांग्रेस का उनसे सहमत होना जरूरी नहीं। जबकि इंडी एलायंस की तीसरी मुम्बई में हुई बैठक में बाकायदा यह चर्चा हुई थी कि अगर भाजपा के हिन्दू वोट बैंक को तोड़ना है, तो सनातन समर्थकों में विभाजन डालना होगा। दलितों, आदिवासियों और ओबीसी को सनातन धर्म से तोड़ना होगा, तभी वे भाजपा से टूटेंगे।
इसी मुम्बई अधिवेशन में राहुल गांधी, लालू यादव और नीतीश कुमार ने इसीलिए जाति आधारित जनगणना को इंडी एलायंस का एजेंडा बनाने का प्रस्ताव रखा था। ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और अरविन्द केजरीवाल के विरोध के कारण प्रस्ताव पास नहीं हुआ था। ये तीनों ही अपर कास्ट से आते हैं। लेकिन कुछ दिनों बाद दिल्ली में शरद पवार के घर पर हुई बैठक में जाति आधारित जनगणना इंडी एलायंस का मुख्य एजेंडा बन गया था।
राहुल गांधी तब से इसी दिशा में काम कर रहे थे। उनके भाषणों का बारीकी से अध्ययन करने पर पता चलता है कि वह लगातार दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के आरक्षण और संविधान और लोकतंत्र के खतरे में होने का जिक्र कर रहे थे। इसका असर वोटिंग पर होगा, ऐसा अनुमान मोदी या भाजपा के किसी नेता को नहीं था, इसलिए कोई उनकी बातों का जवाब भी नहीं दे रहा था। लेकिन जब अमित शाह का फेक वीडियो सामने आया है, तब मोदी को समझ में आया कि अब खुल कर खेलना होगा।
इससे पहले मोदी ने कभी हिन्दू मुस्लिम नहीं किया था, हिन्दू मुसलमान की शुरुआत उन्होंने 21 अप्रेल को अपने भाषण से की। और अब जब पाकिस्तान के नेताओं के भी राहुल के पक्ष के पक्ष में बयान आने शुरू हो गए, तो मोदी संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर डिफेंसिव की बजाए ओफेंसिव हो गए हैं।
पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाज चौधरी का एक बयान सामने आया है, जिसमें वह राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की वकालत करते दिखाई देते हैं। फवाज चौधरी ने राहुल गांधी का वीडियो अपने एक्स हेंडिल से शेयर किया है। यह मणि शंकर अय्यर की कोशिशों का नतीजा लगता है, जिन्होंने पाकिस्तान में जाकर मोदी को हटाने के लिए पाकिस्तान से मदद माँगी थी।
भारतीय जनता पार्टी के नेता और संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस की आतंकवाद के प्रति सॉफ्ट नीति के कारण पाकिस्तान कांग्रेस का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों ही राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। पाकिस्तान मोदी से इसलिए डरता है, क्योंकि मनमोहन सरकार तो मुम्बई पर हुए हमले के बाद सिर्फ डोजियर भेजती थी, जबकि मोदी ने घर में घुसकर मारने की पॉलिसी अपना ली है।
भारत के किसी नेता ने पाकिस्तान के चुनाव में कभी दखल नहीं दिया। भारत के चुनाव में पाकिस्तान का दखल कितना खतरनाक है, इसे समझने की जरूरत है। इसलिए नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के पूर्व मंत्री के राहुल गांधी के पक्ष में आने का अपने भाषणों में जिक्र करना शुरू कर दिया है।
जिन नरेंद्र मोदी ने खुद ही राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया था, उनको अब जाकर समझ आने लगा है कि राहुल एक बड़ी चुनौती बन कर खड़े हो गए हैं। इसलिए नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोल दिया है। राहुल गांधी के संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने के जवाब में मोदी ने उन पर पलट वार कर के उन्हीं को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मोदी ने राहुल गांधी से ऐसे तीन सवाल कर के उन्हें दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के कटघरे में खड़ा कर दिया है।
मोदी को पहले दो चरण की वोटिंग में नुकसान होने की बात समझ आ गई, और वह डेमेज कंट्रोल में लग गए हैं। दो मई को मोदी ने गुजरात में राहुल गांधी पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि वह संविधान को सिर पर रख कर नाच रहे हैं। जबकि मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए कांग्रेस खुद संविधान बदलना चाहती है, क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावाधान नहीं है।
राहुल गांधी पिछले कई दिनों से कह रहे थे कि मोदी दलितों, आदिवासियों और ओबीसी का आरक्षण खत्म करना चाहते हैं। मोदी ने राहुल पर पलटवार करते हुए कहा कि असल में वह दलितों, आदिवासियों और ओबीसी का कोटा घटा कर मुसलमानों को आरक्षण देना चाहते हैं, कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस ने यह कर भी दिया है।
मोदी ने राहुल गांधी से कहा है कि वह देश को गारंटी दें कि वह दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के आरक्षण का कोटा नहीं घटाएंगे । वह गारंटी दें कि मुसलमानों को ओबीसी के आरक्षण कोटे से आरक्षण नहीं देंगे। वह देश को लिखित में गारंटी दें कि वह मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन नहीं करेंगे।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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