सादगी, समसति और सद्भाव का संदेश देती मोहन के आंगन की शादी
Mohan Yadav son wedding: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के छोटे पुत्र डॉ अभिमन्यु यादव का डॉक्टर इशिता के साथ हाल ही में उज्जैन में संपन्न हुआ विवाह इस प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में सामाजिक समरसता ,सादगी और सद्भाव की वह मिसाल बना है जिसने सारे देश का ध्यान बरबस ही इस विवाह की ओर न केवल खींचा है बल्कि विवाह में सादगी का दौरा पुनः आए इस विचार को सींचा भी है।
किसी भी प्रदेश का मुख्यमंत्री इस प्रजातंत्र में एक तरह से प्रदेश का शासक या यू कहें कि प्रजातंत्र का राजा होता है तो शायद गलत नहीं होगा। मगर वही मुख्यमंत्री अपने बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन से करता है तो आम जनता के मुंह से बरबस ही वह निकलती है। यह इस कारण भी स्वाभाविक है कि एक और जहां और राजनेताओं, प्रशासनिक अफसरों समैण नवधनाढ्यों के लिए शादियां दिखावे का इवेंट हो गया है।

मगर इस कालखंड में यदि कोई व्यक्ति समर्थ होने के बाद भी अपने बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन से करता है तो निश्चित ही वह एक बहुत बड़ी लकीर खींचता है ।और यह साहस कर दिखाया है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने जो इस कालखंड में देश के एकमात्र ऐसे पहले मुख्यमंत्री होंगे जिन्होंने अपने बेटे का विवाह सामूहिक विवाह सम्मेलन में संपन्न करवा के न केवल एक उदाहरण प्रस्तुत किया है बल्कि इतिहास के पन्ने में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अपने नवाचारों के साथ सादगी पूर्ण और आडंबर रहित जीवन जीने के लिए जाने जाते हैं ।मुख्यमंत्री बनने के बाद और राजनीति में कई बड़े सोपान चढ़ने के बाद भी उनका ठेठ बिंदास मालवी मानस और मालवी अंदाज उनके अंतस में और साथ ही व्यवहारिक जीवन में जीवन्त दिखाई देता है। एक मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्य और कार्यकाल जनता जनार्दन के सामने ऑडिट के लिए है ही जो अपेक्षाकृत बेहतर ही माना जाता है । बेशक वे एक मुख्यमंत्री के तौर पर निश्चित खरे उतरे हो मगर एक बेटे के पिता और परिणय सूत्र बंधन में बंधने जा रहे पुत्र के अभिभावक के रूप में उन्होंने पिछले दिन उज्जैन में जो किया है वह अब देश नहीं बल्कि विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है।
वह मप्र जैसे महत्वपूर्ण और बड़े प्रदेश के ताकतवर मुख्यमंत्री हैं और उनके चाहने मात्र से उनके पुत्र अभिमन्यु का विवाह समारोह किसी सेवन स्टार होटल में राजसी ठाट-बाट से आयोजित हो सकता था। मगर एक सही और प्रजा पालक शासक के रूप में उन्होंने अपने पुत्र का विवाह उज्जैन में आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने का निर्णय लेकर आम जनता को यह संदेश दिया कि बेशक मैं मुख्यमंत्री जरूर हूं लेकिन हूं मैं आप जैसा आम इंसान ,जो अपनों के बीच इस खुशी को बांटकर ,आम इंसानों के बीच आम इंसान ही बना रहना चाहता है। इस सम्मेलन में उनके पुत्र सहित विभिन्न समाजों के कुल 21 जोड़े परिणय बंधन में बंधे जिन्हें आशीष देने के लिए विभिन्न राजनेताओं के साथ देश का प्रतिष्ठित संत समाज भी उपस्थित था।
इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें विभिन्न समाज, जाति और वर्ग के जोड़े बिना किसी भेदभाव ऊंच ,नीच और जाति, वर्ग के एक ही मंडप के बीच परिणय सूत्र में बंध रहे थे। और इन्हीं सबके बीच मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के पुत्र और पुत्र वधू भी थे। निश्चित रूप से यह कोई फिल्मी सेट पर किसी फिल्म का दृश्य शूट नहीं हो रहा था बल्कि जीवन के रंग मंच का वह दृश्य था जो जाति ,वर्ग और आर्थिक असमानता से ऊपर उठकर वसुदेव कुटुंबकम और हम सब एक हैं की आत्मा को साकार प्रस्तुत कर रहा था।
यह सामाजिक सद्भाव और समरसता की वह जीवंत प्रस्तुति थी जो सालों बाद देखने में आई और बाबा महाकाल के साथ उज्जैन की धारा इसकी साक्षी बनी। इस समारोह में हमारे सनातन मूल्य के दर्शन भी हुए क्योंकि मंच पर देश के विख्यात साधु संतों ने मंत्रोचार से नवदम पत्तियों को न केवल आशीष दिया बल्कि सप्तपदी की रस्म पूरे वैदिक ,सनातनी ,विधि विधान से संपन्न भी कराई ।
बेशक इस सामूहिक विवाह समारोह में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के बेटे की शादी जरूर थी मगर विवाह की पाती बेहद साधारण सरल और सादगी से परिपूर्ण थी। इसमें डॉक्टर मोहन यादव के बेटे का नाम जरूर था मगर उन सभी 21 जोड़ों के बीच और खास बात यह है कि मोहन यादव का नाम इस निमंत्रण पाती में बतौर मुख्यमंत्री नहीं था बल्कि अविभावक के रूप में सिर्फ और सिर्फ मोहन यादव भर था। अब सहजता ,सादगी और आडंबर से दूर इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी ? यह इस बात को भी दर्शाता है कि मोहन राज में आम आदमी और मोहन यादव के परिवार में कोई फर्क नहीं है क्योंकि सत्ता शिखर पर बैठे व्यक्ति का पुत्र और सामान्य तथा दलित का पुत्र एक ही मंडप के नीचे परिणय सूत्र में बंध रहे हैं। सामाजिक समरसता शायद यही है और सामाजिक समरसता ऐसी होनी और रहनी भी चाहिए। मोहन यादव का यह प्रयास निश्चित रूप से उन तमाम लाखों परिवारों के लिए एक संदेश है जो महंगी शादी के कारण न केवल कर्ज के बोझ से दब जाते हैं बल्कि अपनी जीवन भर की बचत को भी इसमें लगा बैठेते हैं। उनका यह आयोजन यह भी स्पष्ट करता है कि विवाह केवल पैसे का दिखावा और फिजूल खर्ची नहीं है बल्कि एक संस्कार युक्त वह आयोजन है जिसका हमारे सनातन में धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है और यही शायद सबसे महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आंगन की शादी एक सामूहिक विवाह सम्मेलन मात्र नहीं थी जो प्रशासनिक दृष्टि से सिर्फ और सिर्फ एक कार्यक्रम मात्र लगे बल्कि संस्कृतिक अर्थ और मायने में यह हमारे नैतिक और सनातन मूल्य के पुनर्जागरण और उनकी प्राण प्रतिष्ठा का ऐसा उद्घोष है जिसकी अनुज कश्मीर से कन्याकुमारी तक और राजस्थान से पूर्वोत्तर तक सुनाई देगी। क्योंकि इस आयोजन में ना तो शाही तामझाम का दिखावा था और ना ही सुपर प्रीमियम व्यवस्थाएं। बस आवश्यकता इस बात की है कि जिस तरह से डॉक्टर मोहन यादव ने बेहद सादगी, सामाजिक समरसता और सद्भाव के साथ अपने बेटे का विवाह संपन्न कराया है क्या इससे अन्य जनप्रतिनिधि ,मंत्री प्रशासनिक अधिकारी प्रेरणा लेंगे ? क्या यह लोग भी मोहन यादव के पद का अनुसरण करेंगे ? क्योंकि गंगा हमेशा ऊपर से नीचे की ओर बहती है ।यकीन मानिए यदि यह संभव हो गया तो इस प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में महंगी और खर्चीली शादियों का मिथक धीरे-धीरे टूटना शुरू हो जाएगा और हम एक बार पुनः उसे सनातन की ओर लौट पड़ेंगे जिसमें विवाह संस्कार ही महत्वपूर्ण होता था। और विवाह एक इवेंट ना होकर आध्यात्मिक प्रक्रिया होती थी जिसका हमारे 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता था यदि यह हुआ तो डॉक्टर मोहन यादव का नाम इसमें मिल के पत्थर के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने निश्चित ही मरुधर में उसे गंगा को लाने का प्रयास किया है जिसकी गोद में सामाजिक सद्भाव ,समरसता,सनातन और आपसी सौहार्द पनपेगा वहीं इन दिनों विवाह मैं शामिल हो गये तथाकथित इवेंट ,कुरीतियां और अनावश्यक लग्जरी खर्च तिरोहित हो जायेंगे
पीर पर्वत सी गहरी है पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
मशहूर कवि दुष्यंत कुमार का शेर डॉक्टर मोहन यादव पर बहुत मौजू है।
नोट: (लेखक वरिष्ठ पत्रकार स्तंभकार और राजनीतिक विश्लेषक है)
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