Mizoram Elections: चमकेगी कांग्रेस की तकदीर या जोरामथंगा सीएम बनेंगे चौथी बार?
Mizoram Elections: पांच राज्यों के लिए घोषित विधानसभा चुनाव में मिजोरम भी शामिल है जहां 7 नवंबर को मतदान होगा। मिजोरम में 21 अक्टूबर तक नामांकन की तिथि थी। मिजोरम में कुल 40 विधानसभा सीटों के लिए 174 प्रत्याशियों ने नामांकन किया है। इनमें 16 महिलाएं हैं। इस समय मिजोरम में चुनाव प्रचार चल रहा है और उम्मीद है कि बीजेपी के चुनाव प्रचार के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी भी मिजोरम जा सकते हैं।
गौरतलब है कि मिजोरम कई वर्षो के उग्रवाद के बाद 1987 में अलग राज्य बना। उसके बाद राज्य में या तो मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की सरकार रही या कांग्रेस की। मुख्यमंत्री जोरामथंगा की अगुवाई वाला सत्तारूढ एमएनएफ 2023 के विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है। इस कारण मिजो नेशनल फ्रंट ने एचपीसी पार्टी के एक धड़े 'हमार पीपुल्स कन्वेशन' से गठबंधन कर लिया है। दोनों दलों ने बीते शनिवार को घोषणा की थी कि यह समझौता केवल विधानसभा चुनाव तक ही नहीं है। आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव भी साथ मिलकर लड़ेंगे।

'मिजो नेशनल फ्रंट' इस राजनीतिक गठजोड़ से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हमार पीपुल्स कन्वेशन के प्रभाव वाली सीटों तुइवावल, चलफिल्ह और सेरलुई में मिजो नेशनल फ्रंट के उम्मीदवार को चुनाव जीतने में कोई दिक्कत न हो। मिजो नेशनल फ्रंट को गठबंधन करने के बाद भी सत्ता बरकरार रखना आसान नहीं होगा।
इस बार चार दल मिजोरम में सत्ता के लिए दावेदार हैं। मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), जोराम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम), कांग्रेस और चौथी पार्टी के रूप में भाजपा चुनाव परिणामों में अपना दखल देेने को तैयार है। भाजपा ने केन्द्रीय मंत्री किरण रिजुजू को मिजोरम का चुनाव प्रभारी बनाया है। भाजपा की नजर दूसरे दलों के असंतुष्टों पर है। मिजोरम विधानसभा अध्यक्ष और एमएनएफ नेता लालरिनलियाना सेलो ने विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है।
भाजपा की नजर कांग्रेस के असंतुष्टों पर भी है। असम के मुख्यमंत्री और नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रमुख हेमंत विस्वसरमा खुद मिजोरम में भाजपा के लिए जगह बनाने में जुटे हैं। हालाकि 87 फीसदी ईसाई आबादी वाले इस राज्य में भाजपा के लिए गुंजाइश न के बराबर है। मिजोरम में धार्मिक और जातीय पहचान बेहद अहम हैं और इसीलिए 79 वर्षीय जोरामथंगा मिजो-कुकी-चिन को साध रहे हैं।
केंद्र की चेतावनी के बाद भी मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने संकटग्रस्त म्यांमार के 35,000 चिन शरणार्थियों को शरण दी, जो मिजो मूल के ही हैं। इस साल मणिपुर से बेदखल 12,000 से ज्यादा कुकी-जोमी लोगों को भी शरण मिजोरम में दी गई है। ये भी मिजो जातीय मूल के हैं। जातीय एकजुटता का प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि यह उनके सत्ता में बने रहने का आधार बनेगी।
हालांकि मुख्यमंत्री जोरामथंगा को सबसे बड़ी चुनौती 'जोराम पीपुल्स मूवमेंट' से मिल रही है। 2017 में बनी जेडपीएम 2018 के चुनाव में न केवल मिजोरम की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बल्कि अप्रैल, 2023 में लुंगलेई कस्बे के नगरपालिका चुनावों में सभी 11 वार्ड जीतकर अपनी बढ़ती ताकत से मुख्यमंत्री जोरामथंगा को बता दिया कि उनको फिर से मुख्यमंत्री बनने के लिए जोराम पीपुल्स मूवमेंट से निपटना आसान नहीं होगा।
उधर, 74 वर्षीय ललदुहोमा की अगुआई में जेडपीएम जोरामथंगा के मंसूबों पर पानी फेरने की तैयारी में है। कांग्रेस अपनी पिछली सरकार में वित्त मंत्री ललसावता को नए नेता के तौर पर पेश करके प्रदर्शन सुधारने और सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष की छवि साफ है और ग्रामीणों, किसानों की समस्याओं को उठाकर कांग्रेस के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं।
मिजोरम की 40 में से 30 निर्वाचन क्षेत्रों में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं बड़ी तादाद में वोट देने आती हैं। परंतु यह दुर्भाग्य है कि 2018 में इस छोटे से राज्य से एक भी महिला विधायक नहीं चुनी गई। मिजोरम विधानसभा का रिकार्ड बताता है कि 1987 में राज्य के गठन होने के बाद यह राज्य महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के मामले में बहुत उदासीन रहा है। मिजोरम में प्रति एक हजार पुरूषों पर 975 महिलाएं हैं। इसके बाद भी शून्य सांसद भेजने और सबसे कम महिला विधायक होने का रिकार्ड भी इसी मिजोरम के नाम है।
मिजोरम में लगभग 36 सालों में मंत्रिमंडल में केवल दो महिलाएं मंत्री बनी। राज्य के मंत्रिमंडल में पहली बार 1987 में लालहलिम्पुई हमार शामिल हुई थी। 2014 में वनलालावम्पुई चावंगथु हांगतुर्जो सीट से चुनाव जीतकर मंत्री भी बनी। कांग्रेस सरकार में पहली बार चुनी गई महिला विधायक को रेशम उत्पादन, मत्स्य पालन और सहकारी विभाग का मंत्री बनाया गया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में 18 महिलाए मैदान में थी लेकिन सभी चुनाव हार गईं।
मिजोरम के 8,56,868 मतदाता 07 नवंबर को 40 विधानसभा सीटों के लिए अपने मतदान का प्रयोग करेंगे। 2018 के मिजोरम चुनाव में एमएनएफ ने 26 सीटें, कांग्रेस ने 5, जेडपीएम ने 8 और बीजेपी ने 1 सीट जीती थी। उससे पहले 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 34 सीटें तो एमएनएफ ने 5 सीटें जीती थी।
कांग्रेस इस बार मिजोरम में सरकार बनाने की उम्मीद कर रही है। वहीं भाजपा अपनी सीटों में इजाफा करने और किसी तरह गठबंधन की सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। मिजोरम में सरकार कौन बनाता है यह 3 दिसंबर को सामने आएगा लेकिन मिजोरम में इस बार चार दल एक दूसरे को पटकने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
इस बार मिजोरम के चुनाव में उसके पड़ोसी राज्य मणिपुर में लंबे समय से चल रही हिंसा का असर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में कांग्रेस के पक्ष में मिजोरम की जनता वोट कर कांग्रेस की सरकार बना सकती है। राहुल गांधी मिजोरम का दौरा कर आये हैं। राहुल गांधी मणिपुर भी गए थे। ऐसे में यहां कांग्रेस के पक्ष में माहौल बन सकता है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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