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Love Jihad Cases: बेटियों की सुरक्षा के लिए संकट बनकर उभरा लव जिहाद

साल बीतते बीतते लव जिहाद से जुड़ी दो ऐसी वारदातें सामने आयीं जो राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का कारण बनीं। पहली श्रद्धा वॉकर की क्रूरता से हत्या और दूसरी टीवी कलाकार तुनिशा शर्मा की आत्महत्या।

Love Jihad aftab shraddha and tunisha sharma crime cases in 2022 year

Love Jihad Cases: राजनीति और मीडिया में एक वर्ग ऐसा है जो अंतर्धामिक विवाहों को राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए 'जरूरी' और 'पवित्र' मानता है। यह वर्ग ऐसा मानता है कि अंतर्धार्मिक विवाह होने से विभिन्न धर्मों के आपसी संबंध मजबूत होते हैं। यह हो सकता था अगर एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष पर धर्म परिवर्तन का दबाव न बनाया जाता। जहां भी धर्म परिवर्तन का दबाव होगा, वहां लव जिहाद की चर्चा अपने आप शुरु हो जाएगी।

बीते एक दशक में लव जिहाद की सैकड़ों घटनाएं सामने आ चुकी हैं। आज से कोई दस बारह साल पहले केरल में सबसे पहले प्रतिबंधित पीएफआई ने योजनापूर्वक गैर मुस्लिम लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर इस्लाम कबूल करवाने की मुहिम की शुरुआत की थी। इसमें हिन्दू और ईसाई लड़कियों को निशाना बनाया जाता था। गैर मुस्लिम लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर इस्लाम कबूल करवाने वालों को कथित तौर पर पीएफआई द्वारा पैसा, प्रोत्साहन और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहारा भी दिया जाता था।

अथिरा को हादिया बनाने की लड़ाई तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी जब एक ओर अथिरा के पिता अकेले अपनी बेटी को वापस पाने की लड़ाई लड़ रहे थे तो दूसरी ओर पीएफआई ने मंहगे वकीलों की भारी भरकम फौज खड़ी कर दी थी। अंतत: भारतीय कानूनों की ऐसी मजबूरी थी कि सारी साजिश जानने समझने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने अथिरा को अपने शौहर सफी के साथ जाने का आदेश दिया। कानूनन अथिरा 18 साल की उम्र पार कर चुकी थी और ऐसे बालिग अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

भारतीय संविधान और कानून भारतीय समाज व्यवस्था के विपरीत हुए विवाहों को प्रोत्साहित भी करता है और संरक्षण भी देता है। लव जिहाद का कुचक्र रचने वाले लोग भारतीय संविधान और कानूनों की इसी कमजोरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर राजनीतिक और मीडिया विमर्श में भी अल्पसंख्यकवाद को इस तरह से स्थापित किया गया है कि उसके हर प्रकार के अतिक्रमण को भी राजनीति, मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र का एक वर्ग संरक्षण देने के लिए खड़ा हो जाता है। लव जिहादियों को इससे बहुत बल मिला है।

अगर राजनीतिक विमर्श यह पैदा कर दिया जाए कि हिन्दू लड़कियों का उनके परिवार में शोषण होता है तो स्वाभाविक है कोई भी लड़की हर प्रकार की पारिवारिक और सामाजिक व्यवस्था को तोड़ने का प्रयास करती है। फिर उसके सामने प्यार एक स्वतंत्र विकल्प के तौर पर सामने आता है जिसके लिए उसे अपना परिवार, समाज और संबंध त्याग देने है। इस प्रोपेगंडा की शिकार लड़की स्वाभाविक तौर पर अपने परिवार पर अविश्वास करती है जबकि जिससे प्यार करती है, उसी को अपना सबकुछ समझती है।

ऐसे में जिस बेटी को धोखा मिलता है वह लौटकर पीछे नहीं आ पाती। श्रद्धा वॉकर का मामला इसका सटीक उदाहरण है। वह आफताब के साथ खुश नहीं थी, वह उसे भयंकर मारता पीटता था लेकिन वह तब भी उसे छोड़ नहीं पा रही थी। इसका कारण यह था कि वह अपने परिवार से यह कहकर आयी थी कि अब वह आफताब के साथ जा रही है और कभी लौटकर नहीं आयेगी। अगर उसने ऐसा न कहा होता तो शायद पीड़ित होने पर उसके लौटने की संभावना बनी रहती।

लव जिहाद के जितने मामले सामने आते हैं उसमें एक बात समान दिखती है कि लव जिहादी शुरु से दोहरा चरित्र निभा रहा होता है। मानों, उसे पता होता है कि वह जो कर रहा है उसकी स्क्रिप्ट लिखी हुई है। फिर भी उसका अभिनय इतना शानदार होता है कि उसके कब्जे में फंसने वाली लड़कियां आखिर तक उसके वास्तविक इरादों को भांप नहीं पाती हैं।

टीवी कलाकार तुनिशा शर्मा के ही केस को देखें तो पुलिस की पूछताछ में अब तक जो तथ्य सामने आये हैं वो यह साबित करने के लिए पर्याप्य हैं कि शीजान खान उसके साथ विश्वासघात कर रहा था। पुलिस जांच के मुताबिक एक ओर वह तुनिशा के सामने एक लविंग, केयरिंग पर्सन के रूप में आता था जबकि पीछे कई लड़कियों से उसके नाजायज संबंध भी थे। यह बात उसे पता चली तो वह डिप्रेशन में चली गयी।

मुंबई पुलिस की जांच के मुताबिक तुनिशा शर्मा जहां एक ओर डिप्रेशन में थी, वहीं दूसरी ओर शीजान खान बिल्कुल सहज था। पुलिस जांच में ये तथ्य भी सामने आ रहे हैं कि वह तुनिशा को मजहबी तालीम भी दे रहा था और उसे हिजाब पहनने के लिए दबाव भी बना रहा था। स्वाभाविक है किसी ऐसी लड़की के लिए जो इतनी स्वतंत्र सोच समझ वाली हो जो अपने ही समाज की हर व्यवस्था को नकारकर प्यार के रास्ते पर आगे बढ रही हो, उसके लिए नयी नयी शर्तें फंसाने और परेशान करने वाली ही होंगी।

श्रद्धा वॉकर की हत्या का मामला हो या फिर तुनिशा शर्मा की आत्महत्या का। दोनों ही केस में एक बात और कॉमन है कि दोनों ही मामलों में लव जिहादी ने अपने आप को बहुत लिबरल, प्रोग्रेसिव और केयरिंग पर्सन के रूप में प्रस्तुत किया। जब आपको पता होता है कि आप जो कर रहे हैं वह एक अभिनय है तब आपके लिए वह करना बहुत आसान हो जाता है। वरना क्या ऐसा हो सकता है कि आप जिसके प्रति इतने केयरिंग हों कि उसकी छींक आने पर टीश्यू पेपर लेकर खड़े हो जाते हों, उसके शरीर को टुकड़े टुकड़े में काट देंगे?

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    साल 2022 में लव जिहाद पर नये सिरे से चर्चा जरूर शुरु हुई है लेकिन यह एक ऐसी सामाजिक समस्या की ओर संकेत है जिसकी जड़ें बहुत गहरी होती जा रही हैं। अब तक इस समस्या को आरएसएस का दुष्प्रचार कहकर राजनीति और मीडिया के एक वर्ग द्वारा खारिज किया जाता रहा है। लेकिन श्रद्धा वॉकर और तुनिशा शर्मा के बहाने 2022 में इस समस्या पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान गया है। समय रहते इससे बचाव के संवैधानिक और कानूनी उपाय नहीं किये गये तो यह भारतीय बेटियों के शोषण का सबसे घातक हथियार साबित होगा। बेटियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है लव जिहाद के भस्मासुर का समय रहते निदान प्रस्तुत किया जाए।

    यह भी पढ़ें: Love Jihad: इन राज्यों में है लव जिहाद के खिलाफ कानून, कोर्ट भी कर चुका है सख्त टिप्पणी

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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