क्या पहले दौर की कम वोटिंग से मोदी हुए निराश?
Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के गुजरात से स्टे आदिवासी क्षेत्र बांसवाड़ा में दिए गए भाषण पर कांग्रेस ने बहुत ही तीखी और चुनौतीपूर्ण प्रतिक्रिया दी है| कांग्रेस ने इससे पहले मोदी के किसी चुनावी भाषण पर उतनी तीखी टिप्पणियाँ नहीं की, जितनी इस भाषण पर की हैं|
मोदी ने भी इससे पहले अपने किसी भाषण में इतनी तीखी टिप्पणियाँ नहीं की थीं, जितनी पहले दौर की मतगणना के 48 घंटे बाद दिए भाषण में की हैं| प्रधानमंत्री का यह भाषण पूरी तरह सांप्रदायिक रंग में रंगा हुआ था| मोदी ने हिन्दुओं को चेतावनी दी कि अगर कांग्रेस की सरकार आ गई, तो वे हिन्दू औरतों का मंगलसूत्र उतरवा कर मुसलमानों को सौंप देंगे| मोदी ने कहा कि कांग्रेस मां-बहनों का सोना लेकर 'घुसपैठियों को बांटना' चाहती है|

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के इस भाषण की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि वह नफ़रत के बीज बो रहे हैं| राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा- "पहले चरण के मतदान में निराशा हाथ लगने के बाद नरेंद्र मोदी के झूठ का स्तर इतना गिर गया है कि घबरा कर वह अब जनता को मुद्दों से भटकाना चाहते हैं|"
पहले चरण की 102 सीटों पर हुए मतदान के प्रतिशत और हिंदी पट्टी के प्रदेशों में हुई वोटिंग को पूरे चुनाव का सैंपल मानें तो लोगों में मोदी को लेकर वह जोश नहीं दिख रहा है, जो 2014 और 2019 में दिखाई देता था| पहले चरण की 102 सीटों पर 64 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो 2019 की 70 प्रतिशत वोटिंग से कोई छह प्रतिशत कम है|

पहले चरण की 102 सीटों की 64 प्रतिशत वोटिंग भी तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पूर्वोतर 57 सीटों पर हुई वोटिंग की बदोलत है, जहां 70 प्रतिशत से 82 प्रतिशत तक वोटिंग हुई| उत्तर प्रदेश में आठ सीटों पर 61.11 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि 2019 में इन्हीं आठ सीटों की वोटिंग 66.41 प्रतिशत थी| इसी तरह राजस्थान में जिन 12 सीटों पर चुनाव हुआ, उनमें हर सीट पर छह से 10 प्रतिशत पर कम वोटिंग हुई| पिछली बार ये सभी 12 सीटें भाजपा जीती थी, दो-तीन को छोड़ कर बाकी सभी सीटों पर भाजपा ने उम्मीदवार बदले थे|
लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर उत्तराखंड, बिहार और मध्य प्रदेश सब जगह वोट प्रतिशत गिरा| पहले चरण की जिन 102 सीटों पर वोटिंग हुई है, पिछली बार इन 102 सीटों में से भाजपा 40 सीटें जीती थी| भाजपा को यह सोचना पड़ेगा कि रामजन्मभूमि मन्दिर निर्माण और 370 हटाए जाने के हिंदुत्व वाले मुद्दों के बावजूद उसके प्रभाव वाले इलाकों में तो वोटिंग कैसे और क्यों घट गई, जबकि तमिलनाडु और बंगाल में वोट प्रतिशत बरकरार रहा|
बड़े जोर शोर से कहा जा रहा था तमिलनाडु में अन्नामलाई के दमदार नेतृत्व के चलते भाजपा 4 से 6 तक सीटें जीतेगी ही, आठ सीटें भी जीत सकती है| अन्नामलाई को भाजपा उसी तरह दक्षिण भारत के चेहरे के तौर पर उभार रही है, जैसे हेमंत बिस्व सरमा को पूर्वोत्तर के प्रभावशाली चेहरे के तौर पर पहचान मिली है| उन्हें केरल और कर्नाटक में भी प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है| लेकिन उनके खुद के कोयंबटूर से जीतने की संभावनाए कमजोर हुई हैं| कोयंबटूर, चेन्नई दक्षिण और रामनाथपुरम से भाजपा की जीत की भविष्यवाणियां की गई हैं, लेकिन इन तीनों सीटों पर तमिलनाडु के औसत से भी कम वोटिंग हुई है|
लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से प्रधानमंत्री मोदी ने पहले चरण की वोटिंग के बाद संतोष जाहिर किया, उन्होंने एक्स पर लिखा- "पहला चरण शानदार प्रतिक्रिया, आज मतदान करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद| आज के मतदान से उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिल रही है। यह स्पष्ट है कि पूरे भारत में लोग रिकार्ड संख्या में एनडीए के लिए वोटिंग कर रहे हैं|" जबकि अखिलेश यादव ने मोदी की प्रतिक्रिया से कोई पांच घंटे पहले ही लिख दिया था कि "भाजपा का पहले दिन फ्लाप शो हो गया है|" उन्होंने तो मोदी और भाजपा का विकल्प चुनने के लिए वोटरों को बधाई भी दे दी|
पता नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया जमीनी हकीकत से अलग क्यों थी| क्या वह ऐसा समझ रहे हैं कि वोटिंग घटने से उन्हें फायदा होगा, एक आकलन यह भी दिया जा रहा है कि मोदी विरोधी खासकर मुस्लिम वोट डालने नहीं आए, क्योंकि उनका मनोबल पहले ही गिर चुका है कि आएगा तो मोदी ही| लेकिन इस बात को जांचने का क्या तरीका है कि किस के वोट घरों से नहीं निकले| जबकि नतीजे काफी हद तक वोटिंग पर निर्भर करते हैं, 2014 और 2019 में वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी से भाजपा को फायदा हुआ था| वोटिंग की बढ़ती संख्या के साथ नरेंद्र मोदी का जो ग्राफ उछलता था, वह ट्रेंड इस चुनाव में गिरता हुआ दिखाई दे रहा है|
2014 में 66.44 प्रतिशत और 2019 में 67.40 प्रतिशत वोटिंग हुई| 66.44 प्रतिशत वोटिंग पर भाजपा को 282 और 67.40 प्रतिशत पर 303 सीटें मिलीं थीं| अगर अगले छह चरणों में भी यही ट्रेंड रहता है और मतदान 64-65 प्रतिशत पर आ कर टिकता है, तो भाजपा 2014 का आंकड़ा भी नहीं छू सकती, इसका मतलब यह हुआ कि भाजपा 370 पार नहीं, बल्कि उसके 270 पार की संभावना भी खत्म हो जाएगी। उसकी सरकार तो बन जाएगी, लेकिन वह एनडीए के घटक दलों पर निर्भर हो जाएगी| लेकिन यह उसी सूरत में होगा, अगर अगले छह चरणों में वोट प्रतिशत 2019 वाला न रहा|
पहले चरण की वोटिंग के बाद राहुल गांधी के हौसले बुलंद हैं, उन्होंने कहा है कि भाजपा केवल 150 सीटें हासिल करेगी, इससे एक सीट भी ज्यादा नहीं आएगी| संभवत महंगाई और बेरोजगारी की वजह से नए वोटरों में नरेंद्र मोदी को लेकर वह उत्साह नहीं है जो 2014 और 2019 के चुनाव से पहले बना था| महंगाई और बेरोजगारी का असर सिर्फ युवाओं पर ही नहीं है, उनके अभिभावकों पर भी दिखाई देता है, तभी भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में वोटिंग में जबर्दस्त गिरावट देखने को मिल रही है| पहले चरण की वोटिंग तो बताती है कि मोदी के प्रति कोई हवा नहीं है, जैसा कि ओपिनियन पोल में दावे किए जा रहे थे|
प्रधानमंत्री मोदी ने भले ही 19 अप्रेल को वोटिंग के बाद एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में संतोष व्यक्त किया था, लेकिन पहले चरण की वोटिंग के बाद उनके भाषणों के तेवर बदल गए हैं| उनके बांसवाडा भाषण में मुसलमानों को लेकर की गई टिप्पणी उनकी अब तक की टिप्पणियों से ज्यादा तल्खी लिए हुए है| उन्होंने कहा कि हिन्दू औरतों से मंगलसूत्र ले लिया जाएगा, और उन्हें बाँट दिया जाएगा, जिनके ज्यादा बच्चे हैं| किसी धर्म या समुदाय विशेष पर इस तरह का सीधा प्रहार उन्होंने पहले कभी नहीं किया था|
मोदी क्योंकि आदिवासी इलाके बांसवाड़ा में बोल रहे थे, इसलिए उन्होंने कहा, "हमारे आदिवासी परिवारों में चांदी होती है उसका हिसाब लगाया जाएगा, जो बहनों का सोना है, और जो संपत्तियां हैं, ये सबको समान रूप से वितरित कर दी जाएंगी, क्या ये आपको मंज़ूर है? आपकी संपत्ति सरकार को लेने का अधिकार है क्या? क्या आपकी मेहनत करके कमाई गई संपत्ति को सरकार को ऐंठने का अधिकार है क्या?"
अपने भाषण में मोदी ने कहा, "पहले जब उनकी सरकार थी तब उन्होंने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है, इसका मतलब ये संपत्ति इकट्ठा करके किसको बांटेंगे- जिनके ज़्यादा बच्चे हैं, उनको बांटेंगे, घुसपैठियों को बांटेंगे। आपकी मेहनत का पैसा घुसपैठियों को दिया जाएगा। क्या आपको मंज़ूर है ये?"
प्रधानमंत्री मोदी ने यह सब कुछ कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र के हवाले से कहा था, उन्होंने बिना शब्दों को चबाए कहा, "ये कांग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है कि वो मां-बहनों के सोने का हिसाब करेंगे, उसकी जानकारी लेंगे और फिर उसे बांट देंगे और उनको बांटेंगे जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था कि संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। भाइयों बहनों ये अर्बन नक्सल की सोच, मेरी मां-बहनों ये आपका मंगलसूत्र भी बचने नहीं देंगे, ये यहां तक जाएंगे|"
प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री देश में नफ़रत के बीज बो रहे हैं| मोदी के भाषण के ख़त्म होने के कुछ देर बाद ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने मोदी को चुनौती दी और कहा, "आप देश को हिंदू-मुसलमान के नाम पर झूठ परोसकर बांट रहे हैं। मैं चुनौती देता हूं प्रधानमंत्री को कि कांग्रेस के मेनिफेस्टो में कहीं भी मुसलमान और हिंदू शब्द हो तो हमें बताएं और ये चुनौती स्वीकार करें या नहीं तो झूठ बोलना बंद करें|"
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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