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चौथे चरण में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों की प्रतिष्ठा दांव पर

Chautha Charan Matdaan: 13 मई को चौथे चरण में 10 राज्यों की कुल 96 सीटों पर मतदान होने जा रहा है। चौथे चरण में आध्रप्रदेश और तेलंगाना की सभी सीटों के साथ ही बिहार की 5, झारखण्ड की 4, मध्य प्रदेश की 8, महाराष्ट्र की 11, ओडीसा की 4, उत्तर प्रदेश की 13, पश्चिम बंगाल की 8 और जम्मू कश्मीर की 1 सीट पर मतदान होगा।

आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा का चुनाव भी हो रहा है। इसमें तेलगूदेशम पार्टी, बीजेपी और पवन कल्याण की जनसेना का गठबंधन एक तरफ है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस, सीपीएम और सीपीआई का गठबंधन है। इन दोनों गठबंधनों की चुनौती का सामना सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्डी कर रहे हैं।

Chautha Charan Matdaan

जगनमोहन रेड्डी अपनी 9 रत्न वेलफेयर स्कीम्स के भरोसे हैं, वहीं चंद्रबाबू नायडू सुपर सिक्स वेलफेयर स्कीम्स और मोदी मैजिक के दम पर सत्ता में आने की उम्मीद कर रहे हैं। लोकसभा सीटों पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 13 से 15 और टीडीपी और बीजेपी गठबंधन को 10 से 11 सीटें मिल सकती है। जगन मोहन की बहन वाईएस शर्मिला के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद भी कांग्रेस का खाता खुलना मुश्किल है।

वहीं आंध्र प्रदेश से टूटकर बने तेलंगाना में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच दिख रहा है। हालांकि विधानसभा चुनाव बुरी तरह हारकर सत्ता से बाहर हुए बीआरएस प्रमुख चंद्रशेखर राव चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके एक दो सीट से ज्यादा जीतने की संभावना नजर नहीं आती है। भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 18 से 38 फीसदी हो सकता है जिसके साथ वह 7 से 8 सीटें जीत सकती है। विधानसभा में 40 फीसद वोट पाने वाली कांग्रेस भी 7 से 8 सीट जीत सकती है। बीआरएस को एक सीट मिलती दिख रही है।

बिहार की दरभंगा, उजियारपुर, समस्तीपुर (एससी), बेगूसराय और मुंगेर की सीटें चौथे चरण में शामिल हैं। उजियारपुर सीट पर महागठबंधन की ओर से कुशवाहा जाति के आलोक मेहता के सामने एनडीए से नित्यानंद राय मैदान में है जो यादव जाति से हैं। समस्तीपुर सीट चिराग पासवान की पार्टी हार सकती है। दरभंगा से लगातार दूसरी बार भाजपा के गोपाल जी ठाकुर की जीत तय है।

मुंगेर सीट से नीतीश के करीबी और पूर्व अध्यक्ष लल्लन सिंह को अशोक महतो की पत्नी अनिता कड़ी चुनौती दे रही हैं। अशोक महतो के जेल से छूटने पर लालू प्रसाद ने कहा था कि जाओ शादी कर लो, तुम्हारी पत्नी को टिकट दे देंगे। अशोक महतो ने चट मंगनी पट ब्याह कर लिया और लालू ने उनकी पत्नी को मुंगेर से टिकट भी दे दिया। मुंगेर भूूमिहार बाहुल्य सीट है। ललन भी भूमिहार हैं। राजद से उम्मीदवार अनिता देवी धानुक हैं और उनके पति अशोक महतो कुर्मी हैं। दोनों जातियों के वोट भी अच्छे खासे हैं। जहां तक बेगूसराय सीट की बात है तो वहां फिलहाल भाजपा के गिरिराज सिंह को कोई चुनौती दिख नहीं रही है।

झारखंड में चौथे चरण से चुनाव शुरू हो रहा है। झारखंड की 4 सीटों सिंहभूम, खूंटी, लोहरदग्गा और पलामू में चौथे चरण में मतदान होगा। पलामू सीट से भाजपा के बीडी राम का फिर से सांसद बनना मुमकिन लग रहा है। लोहरदग्गा सीट से भाजपा ने सिंटिग सांसद सुदर्शन भगत का टिकट काटकर समीर उरांव को उतारा है।

खूंटी लोकसभा सीट से एक बार फिर केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और कांग्रेस के कालीचरण मुंडा का मुकाबला है। इस सीट पर 2019 में कांग्रेस सिर्फ 1445 वोट से हारी थी। 2019 में कांग्रेस की झारखंड से जीती एकमात्र सीट सिंहभूम की सांसद गीता कोड़ा अब भाजपा से मैदान मे है। कांग्रेस ने यहां से मंत्री जोबा मांझी को उतारा है। सीएम चंपई सोरेन की प्रतिष्ठा इस सीट से जुड़ी हुई है क्योंकि सीएम चंपई सोरेने जिस सरायकेला विधानसभा सीट से विधायक हैं वह इसी सिंहभूम लोकसभा सीट में आती है।

मध्यप्रदेश की 8 सीटों देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा में भी चौथे चरण का मतदान होना है। मालवा क्षेत्र से आने वाली इन सीटों पर भाजपा की पकड़ मजबूत है। इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी ने नाम वापस लेकर भाजपा को वाकओवर दे दिया है। रतलाम सीट पर कांग्रेस मैदान में दिख रही है। बाकी सीटों पर एकतरफा चुनाव है।

चौथे चरण में महाराष्ट्र की 11 सीटें औरंगाबाद, नंदुरबार, जलगांव, रावेर, जालना, मावल, पुणे, शिरूर, अहमदनगर, शिर्डी और बीड में मतदान होगा। यहां भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिव सेना का मुकाबला उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस से है। यहां उद्धव भारी पड़ते दिख रहे हैं। मराठा आरक्षण का असर इन सीटों पर दिखना तय है। ओबीसी भी इन सीटों पर प्रभावशाली है। ऐसे में भाजपा के सामने मराठा और ओबीसी दोनों को साधने की चुनौती होगी।

उड़ीसा में चौथे चरण में पहली बार मतदान हो रहा है। उड़ीसा की 4 सीटें कालांहाडी, नवरंगपुर, बेहरामपुर और कोरापुट शामिल हैं। ये सभी नवीन पटनायक की मजबूत पकड़ वाली सीटें हैं लेकिन इस बार भाजपा पटनायक की पार्टी को कड़ी चुनौती पेश कर रही है। नवीन पटनायक के कुछ नेताओं के पाला बदलने से भाजपा को लाभ मिल रहा है लेकिन फिर भी पलड़ा नवीन का ही भारी है। उड़ीसा में भी लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक का फिर से लौटना तय है।

चौथे चरण के चुनाव में उत्तर प्रदेश की 13 सीटें शामिल हैं। ये हैं शाहजंहापुर, खीरी, धौरहरा, सीतापुर, हरदोई, मिश्रिख, उन्नाव, फरूखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर और बहराइच। कन्नौज से खुद अखिलेश यादव मैदान में हैं। यहां कुछ सीटों पर भाजपा को बसपा और सपा से चुनौती मिल रही है लेकिन मोदी और योगी की लोकप्रियता सब पर भारी पड़ती दिख रही है। सपा कन्नौज, शाहजंहापुर, खीरी और हरदोई में चुनौती पेश कर रही है। बसपा के उम्मीदवार उतारने के बाद भी भाजपा के लिए इस बार जीत की राह 2019 जैसी आसान नहीं है। कुछ सीटों पर हार जीत का मार्जिन 5 प्रतिशत से भी कम रह सकता है।

पश्चिम बंगाल की जिन आठ सीटों पर मतदान होना है उनमें आसनसोल, कृष्णानगर और बहरामपुर अहम है। बाबूल सुप्रियो के भाजपा और आरनसोल सीट छोडने के बाद भाजपा इस सीट को हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। बहरामपुर सीट पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को टीमएसी के टिकट पर लड़ रहे यूसुफ पठान कड़ी चुनौती दे रहे हैं। भाजपा ने कृष्णानगर से महुआ मोइत्रा को हराने के लिए राजघराने की अमृता राय को उतारा है। बर्धमान दुर्गापुर सीट पर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष कड़े संघर्ष मेें फंसे हैं। बीरभूम से टीएमसी की शताब्दी रॉय की जीत तय है। मतुआ बाहुल सीट रानाघाट को भाजपा 2019 में जीत चुकी है हालांकि इस बार टीएमसी ने यहां भाजपा के लिए कड़ी चुनौती पेश की है।

चौथा चरण राष्ट्रीय पार्टियों के साथ साथ क्षेत्रीय पार्टियों के लिए भी बेहद महत्व का है। कांग्रेस को तेलंगाना से उम्मीद है, वहीं भाजपा को भरोसा है कि वह उड़ीसा विधानसभा चुनाव में सरकार बना सकती है। बहरहाल कम मतदान के बीच चौथा चरण सभी दलों के लिए करो या मरो का संघर्ष बना हुआ है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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