क्या लालू परिवार के हाथ से फिसल रही है राजद की बागडोर ?

नई दिल्ली। खुद को शेर का बेटा कहने वाले तेजस्वी पिछले डेढ़-दो महीने से मांद में छिपे बैठे हैं। ललकारने पर भी बाहर नहीं निकल रहे। तेजस्वी के इस तरह मैदान छोड़ने से उनके परिवार में भी हताशा छा गयी है। जिस तेजस्वी को सीएम बनाने के लिए राजद कई कुर्बानियां दे रहा है, वही भागे भागे फिर रहे हैं। अगस्त क्रांति दिवस के मौके पर यानी 9 अगस्त को राजद के सदस्यता अभियान का शुभारंभ होना था। इस मौके पर तेजस्वी तो गायब रहे ही, विधान पार्षद राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती और विधायक तेजप्रताप यादव भी नदारद रहे। विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की यह निर्णायक पहल थी। राजद के वरिष्ठ नेता तो इस मौके पर जुटे लेकिन लालू परिवार से कोई नहीं आया। कहा जा रहा है कि पार्टी ने राबड़ी देवी को इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता ही नहीं दिया था। इस मौके पर राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने जो बयान दिया उससे पार्टी का नेतृत्व संकट खुल कर सामने आ गया है। क्या लालू परिवार की साख घट रही है ? अब यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या लालू परिवार के हाथ से राजद की बागडोर फिसलने वाली है?

क्या राजद के अन्य नेताओं की कोई वैल्यू नहीं ?

क्या राजद के अन्य नेताओं की कोई वैल्यू नहीं ?

तेजस्वी कहां है ? वे पटना से क्यों गायब है ? इन सवालों से राजद के नेता आजिज आ गये हैं। वे खुल कर कुछ बोल नहीं पाते और सवाल हैं कि पीछा नहीं छोड़ते। सदस्यता अभियान के उद्घाटन के मौके पर जब फिर ये सवाल राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी के सामने आया तो उनके सब्र का पैमाना छलक गया। उन्होंने खीज भरे अंदाज में कहा, यहां पार्टी के इतने सारे मजबूत नेता और कार्यकर्ता मौजूद हैं, क्या उनकी कोई वैल्यू नहीं कि सिर्फ एक आदमी के बारे में ही बार-बार बात की जा रही है। ये वही शिवानंद तिवारी हैं जिन्होंने तेजस्वी को कहा था कि अगर आप शेर के बेटे हैं तो मांद से बाहर निकलिये। राजनीतिक बदलाव करना है तो सड़कों पर निकलिये, लाठी खाइए। वे अकेले ऐसे नेता हैं जो राजद में कुछ कहने का साहस रखते हैं।

 राजद बिना पतवार की कश्ती

राजद बिना पतवार की कश्ती

बिना पतवार राजद की कश्ती बीच दरिया में डगमगा रही है। जिसे कश्ती का खेवनहार बनाया गया वही गायब है। राबड़ी देवी पूर्व मुख्यमंत्री रही हैं। अभी वे राजद विधानमंडल दल की नेता हैं। तेजस्वी की गैरमौजूदगी में उनको आगे बढ़ कर कमान संभालनी चाहिए थीं। लेकिन यह भी संभव नहीं हो पा रहा है। राबड़ी देवी से पार्टी की स्थिति छिपी नहीं हुई फिर भी उन्होंने राजद की सदस्यता अभियान का उद्घाटन नहीं किया। अगर उन्हें न्योता नहीं दिया गया तो यह और भी गंभीर बात है। पार्टी में खास जगह बनाने के लिए सक्रिय तेज प्रताप और मीसा भारती की गैरहाजिरी भी खटकने वाली है। उनकी मौजूदगी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश भर सकती थी। लेकिन इन्होंने भी किनारा कर लिया। यह कार्यक्रम भले पार्टी की पटना नगर इकाई द्वारा आयोजित किया गया था लेकिन इसका महत्व मिशन 2020 के लिए कम महत्वपूर्ण नहीं है। पार्टी के नेता अब लाज बचाने के लिए कह रहे हैं राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव इससे बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। तो क्या राजद के लिए यह साधारण कार्यक्रम था ? अगर ऐसा ही तो पार्टी के अन्य दिग्गज नेता क्यों आये?

क्या लालू परिवार की घट रही साख ?

क्या लालू परिवार की घट रही साख ?

राजद को लालू प्रसाद ने बनाया और आगे बढ़ाया। राजद पर एकमात्र लालू का ही वर्चस्व है। उनकी गैरमौजूदगी में तेजस्वी को जिम्मा मिला था कि वे पार्टी को संभाले। लेकिन वे इस परीक्षा में फेल हो गये। तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर सवालिया निशान लगने के बाद भी लालू यादव उन्हें बार-बार आगे कर रहे हैं। लेकिन ये कोशिश भी परवान नहीं चढ़ रही। चुनावी हार से हताश राजद को तेजस्वी ने अपने रवैये से और डिप्रेशन में ला दिया है। लालू परिवार का कोई सदस्य पार्टी की बिगड़ती हालत को संभाल नहीं पा रहा है। हालत दयनीय और गंभीर है। पार्टी कार्यकर्ताओं को तो लालू में असीम आस्था है लेकिन अब वे उनकी विरासत संभाल रहे लोगों भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। 2020 के चुनाव के पहले पार्टी की दुर्दशा से नेता और कार्यकर्ता हताश हैं। उन्हें चिंता है कि विधानसभा चुनाव में जीत कैसे मिलेगी ? क्या अब वो समय आ गया है कि पार्टी को लालू के कुनबे से बाहर निकलना चाहिए?

(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)

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