Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Indian IT: बिल गेट्स नहीं, हमें डॉली चायवाला जैसा आत्मविश्वास चाहिए

Indian IT: नागपुर के डॉली चायवाला की टपरी पर जब बिल गेट्स पहुंचे तो उसे यही लगा कि ये भी कोई फॉरेनर होगा। उसने बड़ी लगन से चाय बनाई और बिल गेट्स को पिलाई।

जब वह बिल गेट्स को चाय की गिलास देता है तो यो-यो अंदाज में अपनी अंगुली का इशारा उस चाय की गिलास की ओर करता है जो बिल गेट्स ने अपने हाथ में पकड़ रखा है। उसका यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।

Indian IT: we need confidence like Dolly Chaiwala Bill Gates viral trending on social media

लेकिन इस वीडियो में देखनेवाली बात यह है कि वह चाय देने के बाद बिल गेट्स की ओर इशारा करने की बजाय अपनी चाय की ओर ही इशारा कर रहा है। इसका मतलब उसे बिल गेट्स के वहां होने से उतना मतलब नहीं है जितना अपनी बनायी चाय पर है। इसलिए वीडियो बनाते समय वह बिल गेट्स के बजाय अपनी बनायी चाय की ओर गर्व से इशारा कर रहा है और इशारा कर रहा है कि डॉली चायवाले की चाय बेमिसाल है।

हालांकि बाद में उसने यह बताया कि उसे नहीं पता कि वह कौन था। उसे लगा कि कोई फॉरेनर है, उसे चाय बनाकर देनी है। हो सकता है बिल गेट्स की मैनेजमेन्ट टीम ने यह बात उससे छिपा ली हो लेकिन जिस तरह का वीडियो बनाया गया है उसे देखकर यही लगता है कि बिल गेट्स की पूरी टीम वहां मौजूद थी। उसने एक पीआर प्लान के तहत यह वीडियो शूट किया और उसे इंटरनेट पर वायरल भी किया ताकि बिल गेट्स की यात्रा चायवाली चर्चा में आ सके।

बिल गेट्स तो चर्चा में आये लेकिन उससे अधिक चर्चा में डॉली चायवाला आ गया। अपनी बनायी चाय को लेकर उसका जो आत्मविश्वास है वह जरूर नोटिस किया जाना चाहिए। यह वह आत्मविश्वास है जो हमारे देश के अंग्रेजी में आधुनिक शिक्षा पानेवाले लोगों में लगभग खत्म हो चुका है। मंहगे कान्वेन्ट स्कूल से लेकर मंहगे मैनेजमेन्ट और टेक्निकल इंस्टीट्यूट तक अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ग्रहण करनेवाले सहज ही ये सीख जाते हैं कि जो कुछ बेहतर है वो पश्चिम में ही है। हमारे पास कुछ भी बेहतर नहीं है।

इसलिए हमें जो कुछ सीखना है वो पश्चिम से ही सीखना है। उनकी तकनीकी, उनका मैनेजमेन्ट और उनके बनाये उत्पाद हमसे बेहतर है। मेड इन इंडिया की बजाय अगर कोई प्रोडक्ट मेड इन फॉरेन कन्ट्री हो तो उसको खरीदने और उपभोग करने में हम ज्यादा गर्व का अनुभव करते हैं। इसलिए भारत में आधुनिक शिक्षा पानेवाला व्यक्ति पश्चिमी ज्ञान और लोगों के सामने इतना बौना हो जाता है कि उसके सामने अपने आप झुक जाता है और खुद को बौना महसूस करने लगता है।

लेकिन डॉली चायवाला ऐसा नहीं है। उसे न केवल अपने ऊपर बल्कि अपने बनाये प्रोडक्ट के ऊपर इतना आत्मविश्वास है कि सामने कोई बिल गेट्स भी खड़ें हों तो वह अपनी चाय की ओर ही इशारा करता है। निश्चित ही उसके पास चाय की एक छोटी सी टपरी है लेकिन उसे उसके होने पर भी शर्म नहीं बल्कि गर्व है।

बिल गेट्स आज भले ही दवा और वैक्सीन कारोबार में चले गये हों लेकिन दुनिया उनको जानती है उनके विन्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम के कारण। शुरुआत में माइक्रोसाफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स की आर्थिक हालत वैसी नहीं थी जैसी डॉली चायवाला की है लेकिन 1976 में जब उन्होंने माइक्रोसाफ्ट की शुरुआत की तो उन्हें विश्वास था कि वो कम्प्युटिंग को आसान करने जा रहे हैं। 1985 में जब उनकी कंपनी का ऑपरेटिंग सिस्टम विन्डोज आया तो शुरुआत में उसकी उतनी मांग नहीं थी। लेकिन क्रमश: सुधार के बाद विन्डोज 95 आने के साथ ही वह पूरी दुनिया में कम्प्यूटर क्रांति का अगुवा बन गया।

यह वही दौर था जब भारत में भी सॉफ्टवेयर डेवलमेन्ट की शुरुआत हो रही थी। इन्फोसिस, सिफी जैसी कंपनियां उभरीं लेकिन उनका सारा जोर स्वतंत्र प्रोडक्ट बनाने के बजाय सर्विस प्रोवाइडर की ही रही। वो दुनियाभर की कंपनियों के लिए सॉफ्टवेयर बना रहे थे लेकिन एक अदद ऑपरेटिंग सिस्टम बनाकर विन्डोज का विकल्प प्रस्तुत नहीं कर सके। इसका कारण हमारी वही मानसिकता थी कि जब एक ऑपरेटिंग सिस्टम चल ही रहा है तो हम अलग से उसमें पूंजी निवेश क्यों करें? इससे हमें हासिल क्या हो जाएगा?

जबकि उसी अमेरिका में पहले एप्पल का ऑपरेटिंग सिस्टम था ही। फिर 2005 के बाद गूगल ने क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम शुरु किया जो आगे चलकर एन्डरॉयड ओएस बन गया। आज यही एन्डरॉयड दुनियाभर के मोबाइल का ऑपरेटिंग सिस्टम है और इसके ही कारण गूगल डिजिटल वर्ल्ड का सबसे मजबूत खिलाड़ी भी। डिजिटल दुनिया बदलती रही, नये नये प्लेयर आते रहे और उन्होंने भविष्य की इस तकनीकी की कुंजी अपने हाथ में ले ली लेकिन हमारे यहां टीसीएस जैसी भारी भरकम सॉफ्टवेयर कंपनी ने कभी अपना स्वतंत्र प्रोडक्ट बनाकर मैदान में उतरने का आत्मविश्वास नहीं दिखाया।

चीन अगर आज अमेरिका को चुनौती दे रहा है तो उसका एक बड़ा कारण डिजिटल तकनीकी में उसके अपने खुद के ब्रांड हैं। उसकी कंपनियों ने अपना सर्च इंजन, सोशल मीडिया प्लेटफार्म स्वयं तैयार किये। आज बैदू हो या टिकटॉक, लेनोवो हो या शाओमी वो दुनिया में सॉफ्टवेयर से लेकर हार्डवेयर तक अमेरिकी कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं। मोबाइल हार्डवेयर में तो चीनी कंपनियों का सिक्का पूरी दुनिया में चलता है।

लगभग 18 से 20 लाख करोड़ की भारत की सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में एक डॉली चायवाला नहीं पैदा हुआ जिसे अपने प्रोडक्ट पर इतना भरोसा होता कि उसे अपने ब्रान्ड से मार्केट में उतार पाता। भारत के आईटी सेक्टर में करीब 55 लाख लोग काम जरूर करते हैं लेकिन उनमें से शायद ही किसी के पास वह आत्मविश्वास हो जो डॉली चायवाला के पास था कि सामने भले बिल गेट्स खड़ें लेकिन उसके लिए अपनी चाय का महत्व उनसे ज्यादा है।

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि आत्मविश्वास के इस सन्नाटे में कहीं कोई शोर नहीं है। जोहो टेक्नॉलाजी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू जैसे लोग भी हैं जिन्होंने न केवल अपना हेडक्वार्टर अमेरिका से चेन्नई ट्रांसफर कर दिया बल्कि खुद वो अपने गांव में ही ज्यादातर समय व्यतीत करते हैं। श्रीधर वेम्बू मानते हैं कि ग्रामीण परिवेश में पलनेवाले बच्चों में ज्यादा नैसर्गिक प्रतिभा होती है। अगर उन्हें अच्छी ट्रेनिंग मिले तो वो संसार में भारत का नाम ऊंचा कर सकते हैं। इसलिए वो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की तकनीकी शिक्षा और भर्ती पर विशेष ध्यान देते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और गूगल की मौजूदगी के बाद भी उनका ऑफिस सूइट और जोहो वर्कप्लेस उनके लिए सालाना 1.1 बिलियन डॉलर का कारोबार पैदा करता है। अपने बनाये प्रोडक्ट के प्रति उनका आत्मविश्वास ही है कि आज श्रीधर वेम्बू और जोहो का नाम अलग सम्मान से लिया जाता है।

लेकिन दुर्भाग्य यह है कि यह आत्मविश्वास कभी कभार ही दिखता है। कभी किसी श्रीधर वेम्बू में तो कभी डॉली चायवाला में नजर आता है। भारत के लोगों को ऐसे ही आत्मविश्वास की जरूरत है जो किसी बिल गेट्स के सामने होने के बावजूद अपने ऊपर और अपने उत्पाद पर भी गर्व कर सके।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+