Indian Economy: घरेलू बाजार गुलजार, निर्यात भी 770 अरब डॉलर के पार

भारत घरेलू बाजार में सक्रिय होने के साथ-साथ विदेशी व्यापार के मोर्चे पर भी दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सधी हुई चाल से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Indian Economy overall exports jumps to 770 billion dollar of india

Indian Economy: इस समय घरेलू बाजार और वैश्विक व्यापार दोनों को लेकर दो शुभ संकेत प्राप्त हुए हैं। 13 अप्रैल को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में भारत से निर्यात का आंकड़ा 770 अरब डॉलर का रहा। इस निर्यात में उत्पादों का निर्यात 447 अरब डॉलर और सेवा निर्यात की राशि 323 अरब डॉलर की रही। हालांकि इस वित्त वर्ष में भारत का कुल व्यापार घाटा पिछले वर्ष के 83 अरब डॉलर से बढ़कर 122 अरब डॉलर हो गया है, जो कि थोड़ा चिंता बढ़ाने वाला है लेकिन देश में निर्यात का यह सर्वोच्च स्तर किसी उपलब्धि से कम नहीं है।

आज दुनिया के विकसित देश मंदी की गिरफ्त में आने की कगार पर हैं लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। भारत के तमाम पड़ोसी देशों सहित यूरोप और अमेरिका में भी महंगाई का हाहाकार मचा हुआ है, पर हमारे यहां महंगाई दर मार्च महीने में घट कर 15 महीने के निचले स्तर पर 5.6 प्रतिशत पहुंच गई है। अमेरिका और यूरोप के देशों की मुद्रा कमजोर हो रही हैं, पर हमारा रुपया मजबूती के साथ टिका हुआ है।

वैसे भी कोविड का वक्त गुजर चुका है। लोग अपने काम पर लौट चुके हैं। कमाई की राह भी खुलने लगी है। कमाई होने के साथ-साथ खर्चे भी शुरू हो गए हैं। इस बात की तस्दीक डिजिटल लेन-देन के आंकड़े भी कर रहे हैं।

रिजर्व बैंक के एक अन्य आंकड़े के मुताबिक लगातार यह तेरहवां महीना है जब क्रेडिट कार्ड से लोगों ने एक लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किया है। रिज़र्व बैंक के मुताबिक मार्च 2023 में डिजिटल माध्यम से लोगों ने 1.37 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए हैं। राष्ट्रीय भुगतान नियम के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2022 की तुलना में मार्च 2023 में यूपीआई लेन देन में 60% की वृद्धि हुई है। मार्च 2022 में यूपीआई के जरिए कुल 5.4 अरब लेनदेन हुए जिनमें 9.6 लाख करोड़ रुपयों का पेमेंट हुआ। वहीं मार्च 2023 में ये बढ़कर 8.7 अरब लेनदेन हो गए, जिनमें 14.05 लाख करोड़ रुपयों का पेमेंट किया गया।

मालूम हो कि क्रेडिट कार्ड के ग्राहकों को अधिकतम एक महीने तक के लिए शून्य ब्याज पर कर्ज दिया जाता है लेकिन एक महीने की अवधि बीतने पर खर्च की गई राशि पर अधिक ब्याज वसूल किया जाता है। ग्राहकों को इस सुविधा के एवज में वार्षिक शुल्क देना होता है। हालांकि जिनकी साख अच्छी होती है और आय अधिक होती है, उनसे कोई वार्षिक शुल्क नहीं लिया जाता, जबकि यूपीआई लेन-देन खुद के खाते से किया जाता है। बीते मार्च महीने में देश के विभिन्न बैंकों से 19.3 लाख क्रेडिट कार्ड जारी किए गए थे। अब तक देश में जारी किए क्रेडिट कार्ड की कुल संख्या 8 करोड 53 लाख हो गई है। वर्ष 2022-2023 में क्रेडिट कार्ड से किया जाने वाला खर्च लगभग 15 लाख करोड़ के स्तर को जल्दी छूने वाला है। यह गत वर्ष की तुलना में लगभग 48 प्रतिशत अधिक है।

चूंकि क्रेडिट कार्ड पास रहने पर ग्राहक को नकदी नहीं रखनी पड़ती और इसके खोने, चोरी होने का भी डर नहीं रहता इसलिए इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इसका लेन देन इतना सरल है कि आज बड़े स्टोर के साथ साथ रेहड़ी वाले, सब्जी वाले, ऑटो रिक्शा वाले भी खूब उपयोग कर रहे हैं।

इस बीच वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद वैश्विक निर्यात में भारत का योगदान 1.8 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी जो अभी दो प्रतिशत से भी कम है इसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर तीन गुना करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी कि आज भारत के कुल निर्यात का स्तर जो कि 770 अरब डॉलर का है इसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 2,000 अरब डॉलर किया जाना है।

निश्चित रूप से नई विदेश व्यापार नीति के तहत निर्धारित किए गए निर्यात और विदेश व्यापार के ऊंचे महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं तो चुनौतियां भी हैं। विश्व बैंक के मुताबिक माल परिवहन ढुलाई के मामले में भारत दुनिया में बहुत पीछे 44 वें स्थान पर है। शोध और नवाचार के मामले में भारत दुनिया में 40 वें क्रम पर है। देश की श्रम शक्ति नई डिजिटल कौशल योग्यता से अभी भी दूर हैं। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव के संतोषजनक परिणाम अभी मिलने शुरू नहीं हुए हैं। चीन के साथ व्यापार असंतुलन कम करने की बड़ी चुनौती सामने खड़ी है।

वर्ष 2022-23 में चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 83.12 अरब डॉलर हो गया जो वर्ष 21-22 में 72.91 अरब डॉलर था। आयात के क्षेत्र में भारत की चीन पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है, जिसे हमें आने वाले दिनों में धीरे धीरे कम करना होगा। लेकिन डॉलर पर निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने के लिए विदेशी व्यापार के लेन देन में रूपए को मान्यता देने से लगने लगा है कि लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। बीते 15 अप्रैल तक रूस, मारीशस, श्रीलंका सहित 18 देशों के बैंको ने रूपए में व्यापार के लिए विशेष खाते खोले हैं।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक व्यापार सौदों में डॉलर की हिस्सेदारी पहले के 70% से घटकर अब 59 प्रतिशत पर आ गई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक दुनिया के 35 से अधिक देशों ने रुपए में व्यापार करने की रुचि दिखाई है, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता को रेखांकित करती है। सरकार के आर्थिक संतुलनकारों ने ताजा आंकड़ा जारी करते हुए कहा भी है कि जी-20 की अध्यक्षता करते हुए 'मेक इन इंडिया' के साथ-साथ 'मेक फॉर ग्लोबल' और 'मैन्युफैक्चरिंग हब' की डगर पर चलना है। ऐसा करते हुए जहां एक ओर देसी बाजार को गुलजार बनाए रखना होगा, वही निर्यात को लक्षित ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए सतत प्रयास जारी रखना होगा।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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