Imran Khan Arrest: पाकिस्तान के आगे कुआं, पीछे खाई
इमरान खान की गिरफ्तारी उस भंवर की सिर्फ शुरुआत भर है जिसमें पाकिस्तान पूरी तरह फंस चुका है। इस समय पाकिस्तान में फौज, अदालत, सरकार और विपक्ष सब एक दूसरे से लड़ रहे हैं।

Imran Khan Arrest: इमरान खान को कल गिरफ्तार करने के बाद से पाकिस्तान जल रहा है। पाकिस्तानी रेंजर्स इस्लामाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड रूम से इमरान को घसीटते हुए ले गए। कहने को पाकिस्तान के नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो के वारंट पर भ्रष्टाचार के मामले में इमरान खान की गिरफ्तारी हुई है, पर हकीकत है कि सेना के इशारे पर यह कार्रवाई हुई है। इस गिरफ्तारी की तत्काल वजह बना, रविवार को लाहौर के जलसे में इमरान खान द्वारा आई.एस.आई. के एक बड़े अधिकारी जनरल फैसल नासिर को अपनी हत्या का षड्यंत्र रचने का सीधा आरोप लगाना।
पाकिस्तान में आर्मी के खिलाफ न तो कोई वहां कुछ कह सकता है ना ही आर्मी अपने खिलाफ कुछ सुन सकती है। लेकिन पीटीआई लगातार फौज पर हमलावर है। कहा तो यही जाता है कि पकिस्तान की सत्ता में खान को आर्मी ही लेकर आई और अब आर्मी ही उन्हें ठिकाने लगाने में लगी है।
पिछले साल अप्रैल में इमरान को सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। तब उनके ही समर्थक सांसदों ने बगावत कर पाला बदल लिया था और शहबाज शरीफ के नेतृत्व में पीडीएम की सरकार बनवा दी थी। तभी से इमरान खान यह सिद्ध करने में लगे है कि उनकी सरकार पाकिस्तान की आर्मी ने गिरवाई और उसके लिए सीधे तब के आर्मी चीफ जनरल बाजवा को जिम्मेदार बताते हैं।
इमरान खान की मुश्किल दोहरी है। न केवल आर्मी उनके खिलाफ है बल्कि पाकिस्तानी सरकार की भी उनसे कोई सहानुभूति नहीं है। प्रधानमंत्री रहते उन्होंने इन सबके खिलाफ मुहिम चलाई थी। अब सब उनसे अपना हिसाब ले रहे हैं। रिटायर्ड आर्मी चीफ जनरल बाजवा तो उनके खिलाफ हैं ही, मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिफ मुनीर भी उनसे खार खाए हुए हैं। उनके और आसिफ मुनीर के बीच उस समय से अदावत चल रही है, जब आसिफ मुनीर पंजाब में तैनात थे और उन्होंने तब के पंजाब के मुख्यमंत्री और इमरान खान के बहुत करीबी उस्मान बुजदार के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत इमरान खान से की थी।
लेकिन इमरान ने उनकी बात पर गौर करने की बजाए आसिफ मुनीर को पंजाब से ही हटा दिया। वजीर-ए-आजम रहते हुए इमरान खान ने पूरी कोशिश की थी कि आसिफ मुनीर पाकिस्तान के सेना प्रमुख न बन पाए, पर ऐसा हो न सका। हालांकि बाद में इमरान ने बहुत प्रयास किया कि नये आर्मी चीफ से सुलह हो जाए, लेकिन जनरल मुनीर ने पुट्ठे पर हाथ नहीं रखने दिया।
वैसे यह गिरफ्तारी एनएबी द्वारा दर्ज एक भ्रष्टाचार के केस में हुई है। इसमें इमरान खान पर यह आरोप है कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने पाकिस्तान के बड़े बिल्डर मलिक रियाज की मदद की। लंदन में जब्त 190 मिलियन पाउंड के मनी लांड्रिंग केस में उनकी मदद करते हुए पैसे खजाने में जमा कराने की बजाय उसे वापस बिल्डर को ही दिलवा दिये। बदले में अपने और अपनी बीवी के नाम रजिस्टर्ड ट्रस्ट अल कादिर के नाम 460 कनाल जमीन हासिल कर ली, जिसे पाकिस्तान में 60 अरब रुपए का घोटाला कहा जा रहा है।
कहा जाए तो इमरान को गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारी बहुत दिनों से चल रही थी। पीटीआई लीडर के खिलाफ पूरे पाकिस्तान में 80 से ज्यादा केस दर्ज है। इनमें तोशाखाना से चोरी, मजिस्ट्रेट को जान से मारने की धमकी, चुनाव आयोग के समक्ष झूठा हलफनामा और अपनी पार्टी के लिए गलत ढंग से विदेशी चंदा जमा करना शामिल है। पर इमरान अभी तक इसलिए गिरफ्तारी से बचते हुए चले आ रहे थे क्योंकि अदालतों से उनको लगातार राहत मिलती आ रही थी। कभी किसी केस में जमानत हो जाती थी तो कभी उनको पेशी से छूट मिल जाती थी।
लेकिन उन्होंने दो दिन पहले फिर से पाकिस्तानी आर्मी के बड़े अधिकारी को जब नाम लेकर उनकी हत्या के षडयंत्र में शामिल होना बताया और केन्या में मार दिए गए पाकिस्तानी पत्रकार अरशद शरीफ की हत्या के लिए भी उसी अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया तो पाकिस्तानी आर्मी बर्दाश्त नहीं कर पायी। रेंजर्स के जरिए हिरासत में लिया जाना यही इंगित करता है। इसके पहले भी डीजी आईएसपीआर और आईएसआई प्रमुख ने प्रेस काॅन्फ्रेस करके इमरान खान को फौज पर झूठे इल्ज़ाम लगाने को लेकर चेतावनी दी थी। पर इमरान रुके नहीं और आर्मी पर जबानी हमले करना जारी रखा।
दरअसल इमरान खान पाकिस्तान की सत्ता में वापसी के लिए सभी हथकंडे अपना रहे हैं। वह हर हाल में चुनाव चाहते हैं वह भी अपनी दी हुई तारीख पर। पाकिस्तान के संविधान में एसेम्बली भंग होने के 90 दिनों के अंदर चुनाव कराने का प्रावधान है और इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पिछले नवम्बर में अपनी पार्टी की पंजाब और खैबर पख्तुनवा की सरकार को खुद कह कर असेम्बली भंग करा दी थी। उनका गणित था कि मार्च 2023 तक चुनाव हो जाएंगे और बहुमत पाकर दोनों सूबो में फिर से सरकार बना लेंगे। फिर केंद्र सरकार पर दबाव डालकर जल्दी चुनाव कराने की तारीख ले लेंगे। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने अपने अधिकार से बाहर जाकर इमरान का पक्ष लेते हुए जब खुद पंजाब में चुनाव की घोषणा कर दी, तब पाकिस्तान के चीफ जस्टिस बांदियाल ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब में 13 मई की तारीख मुकर्रर कर दी। लेकिन शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीडीएम सरकार ने इमरान के हर दांव को विफल कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोेग को पैसा नहीं दिया और न ही पुलिस या फौज को चुनाव में ड्यूटी में लगाने की इजाजत दी। उस पर से पार्लियामेंट के जरिए एक नया कानून बना कर चीफ जस्टिस के कई अधिकारों को सीमित कर दिया गया। इसमें स्वतः संज्ञान के आधार पर मुकदमा चलाने के अधिकार में कटौती भी है। फिलहाल पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में जजों द्वारा अपने ही अधिकार में की गयी कटौती पर सुनवाई चल रही है।
इधर चुनाव न होता देख इमरान खान आपे से बाहर हो गए हैं और पूरे देश में चीफ जस्टिस के समर्थन में जलसे का आयोजन करने जा रहे थे। इस समय पाकिस्तान की अदालत और पाकिस्तान की सेना भी एक दूसरे के सामने खड़े है। सुप्रीम कोर्ट को इस बात का आर्मी की ओर से संदेश भेजा गया कि वह अपनी हद में रहे और आर्मी की सहमति के बिना कोई भी निर्णय एकतरफा न लें।
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इस समय पाकिस्तान आगे कुआं पीछे खाई की स्थिति में पहुंच गया है। लोकतंत्र बुरी तरह से फेल होने के कारण वहां फिर से मार्शल लॉ की संभावना बहुत बढ़ गई है और दूसरी तरफ मुल्क दिवालिया होने की कगार पर आ चुका है। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद जो खून खराबा मचा है, वह 1970 के मुक्ति वाहिनी संघर्ष और बांग्लादेश निर्माण की याद दिला रहा है। ऐसा दिख रहा है कि पाकिस्तान फिर से विखंडन के रास्ते पर है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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