IFFI Award for Cinema Bandi: फिल्म फेस्टिवल में कश्मीर फाइल्स से श्रेष्ठ क्यों घोषित हुई "सिनेमाबंडी"?
गोवा में 53वें IFFI के समापन समारोह में नडाव लैपिड ने कश्मीर फाइल्स पर विवादित बयान देकर बवाल खड़ा कर दिया था। कश्मीर फाइल्स को खारिज करके ज्यूरी ने कौन सी भारतीय फिल्म चुनी जिसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवार्ड दिया गया?
IFFI Award for Cinema Bandi: इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) की इंटरनेशनल ज्यूरी के प्रमुख नडाव लैपिड के 'कश्मीर फाइल्स' पर बयान को लेकर भारत में उनकी काफी आलोचना हुई। ऐसे में सवाल उठता है कि उन्हें या उनकी ज्यूरी को जो भारतीय फिल्म पसंद आई, वो कौन सी है? क्या है उस फिल्म की कहानी, जिसे IFFI की इंटरनेशनल ज्यूरी ने अवॉर्ड देने के लिए चुना है?

उत्सुकता होनी स्वभाविक है क्योंकि केवल एक भारतीय मूवी ही इस बार IFFI के कॉम्पिटिशन सेक्शन में अवॉर्ड ले पाई है और इस अवॉर्ड का नाम भी है 'स्पेशल ज्यूरी मेंशन अवॉर्ड'। यानी इस फिल्म को ज्यूरी ने भी खास समझा।
इस फिल्म का नाम है 'सिनेमा बंडी'। तेलुगु भाषा में बनी इस मूवी के टाइटल का शाब्दिक अर्थ होता है सिनेमा का वाहन। आपको ये जानकर हैरत होगी कि इस मूवी में काम करने वाले ज्यादातर कलाकारों की ये पहली मूवी है और निर्देशक की भी ये पहली ही मूवी है। निर्देशक का नाम है प्रवीण कांड्रेगुला, जो अभी काफी युवा हैं। आंध्र कर्नाटक सीमा पर एक गांव में फिल्माई गई इस मूवी की कहानी भी बड़ी ही दिलचस्प है।
गांव में एक टेम्पो में एक ल़ड़की का महंगा कैमरा छूट जाता है। कैमरा टेम्पो वाले को मिलता है और वह उसे बेचने की कोशिश करता है। इसी क्रम में वह गांव के एक फोटोग्राफर से मिलता है। फोटोग्राफर को जब सारी बात बताता है तो दोनों एक मूवी बनाने की ठान लेते हैं। फिर कैसे मूवी की कहानी तय की जाती है, कैसे उसके हीरो हीरोइन ढूंढे जाते हैं, कैसे उसकी शूंटिग होती है, कैसे कॉस्टयूम का इंतजाम होता है, फाइट के सीन फिल्माना भी अपने आप में बड़ा दिलचस्प था। फिल्म का हीरो गांव के नाई को चुना जाता है और सब्जी बेचने वाली उसकी प्रेमिका को फिल्म की हीरोइन।
उनको ये भी नहीं पता था कि फिल्म एडिट कैसे होगी, मिक्सिंग या डबिंग कैसे होगी, लेकिन वो शूट करने में जुटे रहते हैं। दिक्कत तब आती है, जब कैमरा गिर जाने से उसमें कोई खराबी आ जाती है, उसे ठीक कराने पास के कस्बे में ले जाना ही आफत बन जाता है। हालांकि फिल्म के किरदार अपने काम में और मूवी प्रोजेक्ट में इतने सीरियस दिखते हैं कि आप उनका मजाक भी नहीं उड़ा सकते और ना ही उनको हलके में ले सकते हैं।
कुल मिलाकर मूवी ये बता रही है कि हर किसी के पास कोई ना कोई कहानी है और हर व्यक्ति में एक फिल्मकार छुपा बैठा है। पैसों और संसाधनों की कितनी भी तंगी हो मूवी बनाने की कोई ठान ले तो सपना पूरा हो सकता है। ना केवल इस फिल्म के किरदारों ने ये कर दिखाया बल्कि सिनेमाबंडी के डायरेक्टर प्रवीण ने भी साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। तभी तो आज उनकी मूवी ना केवल इंडियन पेनोरमा के लिए चुनी गई है बल्कि उसे IFFI का अवॉर्ड भी मिला है।
सिनेमाबंडी के किरदारों के लिए फिल्म बनाना आसान काम नहीं था। एक बार तो बीच में एक हीरोइन ही बॉयफ्रेंड के साथ भाग गई तो दूसरी लेनी पड़ी। इसी तरह प्रवीण के लिए भी अपनी ये मूवी बनाना आसान नहीं था। 2018 में उन्हें इस फिल्म के लिए प्रोडयूसर मिला, 2019 में मूवी रिलीज होनी थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते रुकना पड़ा, फिर 2020 में नेटफ्लिक्स से 2020 की तारीखें तय हुईं। लेकिन हालात नहीं सुधरे तो 2021 में इसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया जा सका। मूवी की कहानी इतनी जोरदार थी कि पहले हफ्त में ही ये मूवी टॉप ट्रेंडिंग में आ गई थी।
ऐसे में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल ऑफ इंडिया (इफ्फी) में फिल्म को भेजना फिल्म के लिए डबल बोनांजा लेकर आया। एक तो फिल्म को इंडियन पैनोरमा में जगह मिली, जिसके चलते पूरी स्टार कास्ट को गोवा फेस्टीवल में बुलाया गया, रेड कारपेट सम्मान दिया और प्रेस कांफ्रेंस भी हुई। इसके बाद सरकार अपने खर्चे पर मूवी और स्टार कास्ट को कई विदेशी फिल्म फेस्टिवल्स में भी भेजेगी।
लेकिन जिस ज्यूरी ने कश्मीर फाइल्स जैसी बड़ी फिल्म को अवॉर्ड देने लायक नहीं समझा हो, वही ज्यूरी 'सिनेमाबंडी' जैसी कम बजट की तेलुगु फिल्म को अगर स्पेशल ज्यूरी मेंशन अवॉर्ड के लिए चुनती है तो इसका मतलब फिल्म में इंटरनेशनल अपील है। ऐसे में इस मूवी को कल देश विदेश की बाकी भाषाओं में भी डब करके दिखाया जा सकता है।
इससे फिल्म के प्रोडयूसर्स डायरेक्टर्स के साथ साथ स्टार कास्ट को भी फिल्म जगत में इससे काफी फायदा होगा। ना केवल उनकी पहचान बनेगी, बल्कि आर्थिक लाभ भी होने तय हैं।
सिनेमाबंडी के बारे में बताने का मकसद यही है कि आम लोगों को इफ्फी में अवॉर्ड्स पाने वाली फिल्मों की चयन प्रक्रिया का भी पता होना चाहिए। इंटरनेशनल ज्यूरी के लिए करीब 400 फिल्मों को उनकी प्रिव्यू कमेटी देखकर 18-20 टॉप फिल्में निकालती है और इंडियन पैनोरमा की ज्यूरी ने जो 25 भारतीय फिल्में पैनोरमा के लिए तय की हुई होती हैं, उनमें से भी प्रिव्यू कमेटी कॉम्पिटिशन सेक्शन के लिए चार-पांच भारतीय फिल्में भी तय करती है। इसी के चलते इस सेक्शन में कश्मीर फाइल्स भी पहुंची और सिनेमाबंडी भी।
लेकिन इंटरनेशनल ज्यूरी ने जहां कश्मीर फाइल्स को सिनेमा के मानकों पर सही न मानकर उसे चुनने से इंकार कर दिया वहीं सिनेमाबंडी को सम्मान के लिए चुन लिया।
यह भी पढ़ें: IFFI Controversy: लेफ्टिस्ट लेपिड को आमंत्रित करने के पीछे किसका हाथ?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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