Gujarat Cabinet: सबसे बड़ी जीत के बाद भी सबसे छोटी सरकार क्यों?
गुजरात विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतने का रिकार्ड बनाने वाली भाजपा ने गुजरात में सबसे छोटे मंत्रिमंडल का गठन क्यों किया है?

Gujarat Cabinet: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार केन्द्र में प्रधानमंत्री लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या के सिर्फ 15 प्रतिशत सांसदों को अपना मंत्री बना सकता है। यही फार्मूला राज्यों में भी लागू होता है। 2004 से पहले प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अपने विवेकाधीन कोटे के तहत मंत्रिमंडल का जितना चाहें उतना विस्तार कर सकते थे। लेकिन 2003 की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा किये गये 91वें संशोधन के बाद प्रधानमंत्री का यह विवेकाधिकार समाप्त कर दिया गया। अब प्रधानमंत्री या कोई मुख्यमंत्री सदन की कुल संख्या का सिर्फ 15 प्रतिशत ही मंत्री नियुक्त कर सकता है।
लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संभवत: 15 प्रतिशत की संख्या को भी अधिक मानते हैं। वो छोटा मंत्रिमंडल बनाने में विश्वास करते हैं। चाहे वो गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हों या दो बार से भारत के प्रधानमंत्री हों, उन्होंने इस 15 प्रतिशत की संख्या को कभी नहीं छुआ। इस बार गुजरात विधानसभा की 188 सीटों में 156 सीटें जीतने के बाद भी सिर्फ 16 मंत्री नियुक्त हुए हैं तो उसके पीछे भी मोदी का ही आदेश है। जबकि, भूपेन्द्र पटेल चाहते तो गुजरात में कुल 28 मंत्री नियुक्त कर सकते थे।
प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा से जुड़े विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि गुजरात में ऐतिहासिक जीत के बाद 10 दिसंबर को राज्य के निवर्तमान और भावी मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह को शपथ ग्रहण का न्यौता देने दिल्ली पहुंचे थे। इसी दिन अमित शाह की उपस्थिति में प्रधानमंत्री मोदी ने संभावित मंत्रियों की सूची सौंपकर उन्हें अपने साथ शपथ ग्रहण करवाने के लिए कहा था। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और गुजरात प्रदेश अध्यक्ष अपने साथ संभावित मंत्रिमंडल की एक सूची लेकर आए थे और भाजपा हाईकमान से उस पर मुहर लगवाना चाहते थे। लेकिन भूपेन्द्र पटेल को इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके दिल्ली पहुंचने के पहले ही मंत्रिमंडल फाइनल कर दिया गया है।
गुजरात में 20 साल में तीसरी सबसे छोटी सरकार का गठन हुआ है। ऐसा कहा जा सकता है कि कांग्रेस के जितने विधायक जीते हैं उतने भूपेन्द्र सरकार में मंत्री बने हैं। इसे गुजरात में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के शिल्पकार प्रधानमंत्री मोदी के विजन का मंत्रिमंडल कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के चार बार मुख्यमंत्री रहे लेकिन उन्होंने कभी भी 20 से अधिक मंत्रियों को अपनी कैबिनेट में जगह नहीं दी। मोदी ने 2001 में गुजरात में 8 मंत्री बनाए थे, 2002 में 16 मंत्री, 2007 में 18 मंत्री, 2012 में 16 मंत्री और अब 2022 में भूपेन्द्र को उसी राह पर चलने की सीख देते हुए 16 मंत्री तक गुजरात का मंत्रिमंडल सीमित कर दिया है।
खबर है कि प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटील हार्दिक पटेल को राज्य मंत्री बनाना चाहते थे और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल अल्पेश ठाकोर को मंत्री बनाना चाहते थे लेकिन मोदी और शाह द्वारा सौंपी गयी मंत्रियों की सूची में इन दोनों नेताओं का नाम नहीं था। इसके अलावा जीतू वघानी, पूर्णेश मोदी और मनीषा वकील का मंत्री न बनना आश्चर्यजनक रहा। चुनाव के बाद इन तीनों का मंत्री बनना तय माना जा रहा था।
भाजपा ने उत्तर गुजरात की कुल 32 सीटों में से 22 जीती है और इस क्षेत्र से 3 मंत्री, मध्य गुजरात की 61 सीटों में से 55 जीतकर इस क्षेत्र से 4 मंत्री, दक्षिण गुजरात से आने वाली 35 सीटों में से 33 सीटें जीतकर वहां से 5, सौराष्ट्र से आने वाली 48 सीटों में से 40 सीटें जीतकर इस क्षेत्र से 5 मंत्री और कच्छ से आने वाली 6 सीटों में से सभी 6 जीतने के बाद भी इस क्षेत्र से एक भी मंत्री नहीं बनाया है। गुजरात के 21 जिले ऐसे हैं जहां से किसी को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।
55 सीटें देने वाले मध्य गुजरात से मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के साथ चार मंत्रियों को जगह दी गई है। भूपेन्द्र पटेल की पूर्व सरकार के 8 मंत्रियों को फिर से शामिल किया गया है। 5 नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि रूपाणी सरकार के 3 मंत्रियों की फिर से भूपेन्द्र सरकार में वापसी हुई है। जीतू वघानी, पूर्णेश मोदी, विनू मोरडिया, किरीटसिंह राणा, अर्जुन चौहान, जीतू चौधरी, निमिषा सुथार, गजेन्द्र परमार, देवा मालम, नरेश पटेल, मनीषा वकील सहित 11 से ज्यादा ऐसे पूर्व मंत्री हैं, जिन्हे इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है।
भूपेन्द्र पटेल सरकार की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उनके पहले कार्यकाल में 8 मंत्री पटेल थे जो इस बार घटकर सिर्फ 4 रह गए हैं। पिछली सरकार में आदिवासी 5 मंत्री थे जो घटकर 2 हैं। क्षत्रिय 3 मंत्री थे इस बार एक क्षत्रिय को ही मौका दिया है। दलित, जैन और ब्राह्मण जितने भूपेन्द्र पटेल की पहली सरकार में थे उतने ही इस बार भी हैं मतलब एक-एक मंत्री। ओबीसी पिछली सरकार में 6 मंत्री थे, इस बार बढ़कर 7 हो गए हैं। दलित समाज से आने वाली महिला विधायक भानुबेन बावरिया को भूपेन्द्र पटेल मंत्रिमंडल में जगह दी गई है।
नई सरकार में सूरत जिले की सभी 16 सीटें जीतने वाली भाजपा ने 3 विधायकों को मंत्री बनाया है। पिछली बार सूरत से 4 मंत्री थे। पिछली सरकार में सूरत से हर्ष संघवी, मुकेश पटेल, पूर्णेश मोदी और वीनू मोरडिया शामिल थे। इस बार सूरत पश्चिम के विधायक पूर्णेश मोदी और कतारगाम के विधायक वीनू मोरडिया को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। इस क्षेत्र से प्रफुल्ल पानसेरिया को मौका देने के साथ हर्ष संघवी और मुकेश पटेल को रिपीट किया है। चुनाव के पहले ही सूरत पश्चिम के विधायक पूर्णेश मोदी से मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग वापस ले लिया था। इस कारण भी उनकी मंत्रिमंडल में वापसी मुश्किल लग रही थी।
भाजपा के विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि भूपेन्द्र पटेल से साफ कहा गया है कि यह मंत्रिमंडल एक साल के लिए है। एक साल बाद भाजपा हाईकमान मंत्रियों के प्रदर्शन का आंकलन करने और रिपोर्ट कार्ड के बाद मंत्रिमंडल से कुछ मंत्रियों को बाहर भी कर सकता है या विभाग बदल सकता है। उनकी जगह नए लोगों को मौका दिया जा सकता है। भूपेन्द्र पटेल को 2024 के लोकसभा चुनाव और आप पार्टी से मिल रही चुनौती को देखते हुए बेहतर प्रदर्शन करने और स्वच्छ प्रशासन चलाने की हिदायत दी गई है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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