इंडिया गेट से: झूठ बोलते पकड़े गए हामिद अंसारी
हामिद अंसारी का किस्सा अब बड़ा दिलचस्प होता जा रहा है। पाकिस्तान के पत्रकार नुसरत मिर्जा ने उनकी पोल खोल कर रख दी है। मिर्जा ने यूपीए शासनकाल के समय भारत के पांच दौरे किए थे। इन्हीं दौरों में से 2009 के दौरे में हामिद अंसारी से उसकी मुलाक़ात हई और अंसारी उसके मुरीद बन गए। नुसरत मिर्जा अपने भारत दौरों के दौरान विभिन्न सूचनाएं एकत्र करके पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई को देता था। यह बात उसने अपने एक इंटरव्यू में खुद कही है। अपने इंटरव्यू में उसने हामिद अंसारी का जिक्र किया है।

भारत में यह खबर जंगल की आग की तरह फ़ैल गई कि हामिद अंसारी ने आईएसआई के एजेंट पत्रकार को भारत बुलाया था। इसके साथ अंसारी के पुराने काले कारनामें भी उजागर होने लगे हैं कि जब वह ईरान में भारत के राजदूत थे तो उन्होंने भारतीय गुप्तचर एजेंसी रॉ के अधिकारियों की पहचान उजागर करके उन्हें संकट में डाल दिया था। इसी तरह एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि उस सीआईए के एजेंट आईबी के पूर्व अफसर रतन लाल से उनका क्या रिश्ता है, जिसने इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन को अमेरिका के इशारे पर झूठा फंसाया था और बाद में खुद अमेरिका भाग गया था।
मिर्जा प्रकरण सामने आने के बाद हामिद अंसारी ने अपनी तरफ से बचाव में जो बयान दिया है उसमें उन्होंने नुसरत मिर्जा को वीजा दिलाने या भारत बुलाने का खंडन किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि वह मिर्जा से कभी नहीं मिले। एक ओर स्वयं हामिद अंसारी जहां जानने तक से इंकार कर रहे हैं वहीं कांग्रेस हामिद अंसारी के बचाव में खड़ी हो गयी है। लेकिन अंसारी के बचाव में सामने आकर स्वयं कांग्रेस ही बुरी तरह फंस गई है। क्योंकि अंसारी ने अपने सिर से बला टालते हुए नुसरत मिर्जा को भारत बुलाने का ठीकरा विदेश मंत्रालय यानि तब की कांग्रेस सरकार के विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद के माथे फोड़ दिया है।
इस पर कांग्रेस के अलग अलग नेता और प्रवक्ता अलग अलग तरीके से बचाव कर रहे हैं। पवन खेड़ा ने कहा है कि उपराष्ट्रपति रह चुके व्यक्ति पर "ऊल जुलूल" बकवास नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तो अंसारी के बचाव में कुछ ज्यादा ही बोल दिया है। उन्होंने कहा कि 2010 में न्यायविदों के जिस सम्मेलन की बात की जा रही है, वह मोदीभक्त आदिश अग्रवाल ने आयोजित किया था।
जयराम रमेश के इस रहस्योद्घाटन पर अंतर्राष्ट्रीय ज्यूरिस्ट काऊंसिल के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने हामिद अंसारी और कांग्रेस दोनों को धो कर रख दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिठ्ठी लिख कर अंसारी के खिलाफ जांच करवाने की मांग करते हुए अग्रवाल ने खुलासा किया है कि नुसरत मिर्जा को अंतरराष्ट्रीय ज्यूरिस्ट काऊंसिल ने नहीं, बल्कि 27 अक्टूबर 2009 में जामा मस्जिद यूनाइटेड फोरम कांफ्रेंस ने बुलाया था, जिसका उन्होंने फोटो भी जारी कर दिया है। फोटो में हामिद अंसारी और नुसरत मिर्जा मंच पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में हामिद अंसारी का यह दावा तो गलत साबित हो गया कि वह कभी नुसरत मिर्जा से नहीं मिले। लेकिन उनके झूठ की असली कहानी तो यहाँ से शुरू होती है।
असल में हामिद अंसारी की नुसरत मिर्जा से इस सम्मेलन में "अच्छी खासी" मुलाक़ात हुई थी। जिस का प्रमाण भी आदिश अग्रवाल ने दे दिया है।
2010 में अंतरराष्ट्रीय ज्यूरिस्ट काऊंसिल के मानवाधिकार सम्मेलन के लिए आदिश अग्रवाल ने उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को न्योता भेजा था। उन्होंने न्योता स्वीकार किया और एक घंटा वहां रहने का वायदा किया। इसके बाद उप राष्ट्रपति कार्यालय के डायरेक्टर अशोक दीवान ने उन्हें फोन करके कहा कि उप राष्ट्रपति चाहते हैं कि पाकिस्तान के पत्रकार नुसरत मिर्जा को भी कांफ्रेंस में बुलाया जाए। क्योंकि पाकिस्तान से जजों को नहीं बुलाया गया था, इसलिए अंतरराष्ट्रीय ज्यूरिस्ट काऊंसिल ने नुसरत मिर्जा को भी नहीं बुलाया। इस पर हामिद अंसारी उनसे बेहद खफा हुए और 20 मिनट में ही सम्मेलन से उठ कर चले गए।
आदिश अग्रवाल के विस्फोटक आरोपों और भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया के नए हमलों पर कांग्रेस ने चुप्पी साध ली है क्योंकि जिस फोटो में हामिद अंसारी और नुसरत मिर्जा मंच पर बैठे दिख रहे हैं, उसमें मंच पर उस समय के केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आज़ाद और फारूक अब्दुल्ला भी बैठे दिखाई दे रहे हैं। उस सम्मेलन के आयोजकों में एक नाम कांग्रेस सरकार के केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का भी है। नए खुलासों के बाद हामिद अंसारी ने भी सफाई देने से इनकार कर दिया है।
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(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)












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