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Aftab Amin Poonawala: एक साइको किलर या जिहादी हत्यारा?

Aftab Amin Poonawala: आफताब के नाम में जो अमीन उपनाम जुड़ा है वह अरबी का शब्द है जिसका अर्थ होता है विश्वास के योग्य। इसके इसी अर्थ के कारण मुसलमानों में शायद यह नाम बहुत प्रचलित है। लेकिन आफताब अमीन पूनावाला ने अपनी प्रेमिका श्रद्धा वॉकर की जिस क्रूर और निर्मम तरीके से हत्या की, उससे कम से कम एक बात तो साबित हो गयी कि उस अमीन पर विश्वास करके श्रद्धा ने जीवन की सबसे बड़ी भूल की। इसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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आफताब अमीन पूनावाला द्वारा श्रद्धा की हत्या की बात जैसे ही सामने आयी एक समूह सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गया जिसने आफताब को पारसी बताना शुरु कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उसकी इस्लामिक पहचान को छिपाई जा सके।

इसी मानसिकता के लोगों ने स्टोरी लिखनी शुरु कर दी कि ऑफताब ने ऐसी क्रूर और निर्मम हत्या के लिए एक अमेरिकी वेब सीरिज डेक्सटर से प्रेरणा ली थी। मतलब, उसकी ऐसी क्रूर और हिंसक मानसिकता के लिए उसकी अपनी परवरिश नहीं बल्कि एक अमेरिकी वेब सीरिज जिम्मेवार है।

जो लोग ऐसा लिख बोल रहे हैं उनका अपना एजेंडा होता है। इनको सत्य से कोई लेना देना नहीं होता। ये हर बात को हिन्दू मुस्लिम से जोड़कर समस्या के मूल से लोगों का ध्यान भटकाते हैं ताकि समस्या जस की तस बनी रहे। कुछ देर के लिए हम ये मान भी लें कि आफताब पूनावाला की साइको किलर की मानसिकता एक वेब सीरीज देखने के बाद बनी तो फिर ऐसी ही उन घटनाओं के बारे में क्या कहेंगे जो उसी के समुदाय से जुड़े थे और उन्होंने डेक्सटर जैसी कोई वेब सीरीज भी नहीं देखी थी।

अभी पिछले साल की ही बात है। मेरठ में एक हिन्दू लड़की की हत्या का भी महीनों बाद इसी तरह खुलासा हुआ था। एकता देशवाल को मेरठ के रहने वाले शाकिब ने जालंधर में अपने प्रेम जाल में फंसाया था। एकता को शाकिब ने अपना नाम अमन बताया था और उसे अपने प्रेमजाल में फंसाकर मेरठ लेकर चला आया।

बीकॉम की छात्रा एकता को मेरठ पहुंचने पर पता चला कि जिसे वह अमन समझ रही थी असल में वह शाकिब है। इसके बाद दोनों में तकरार हुई और शाकिब ने अपने घरवालों के साथ मिलकर एकता की उसी तरह हत्या कर दी जैसे श्रद्धा की हत्या आफताब ने की।

उस हत्या में निर्ममता की सारी हदें पार कर दी गयीं थी। उसे न सिर्फ प्रताड़ित करके जान से मार दिया गया था बल्कि उसका एक हाथ काटकर अलग कर लिया गया। वह इसलिए क्योंकि उसने उसी हाथ पर अपने प्रेमी का नाम अमन गुदवाया हुआ था। अमन को शक हुआ कि अगर ये सबूत पुलिस को मिल गया तो वह पकडा जाएगा।

एकता अपने साथ नौ लाख रूपये मूल्य के गहने और नकद लेकर आयी थी। यह सब शाकिब और उसके परिवारवालों ने अपने पास रख लिया। लेकिन एक दिन अचानक खेत में लाश मिलने से मामला खुल गया और मेरठ पुलिस ने जांच पड़ताल की तब ये मामला सामने आया।

मेरठ में ही दूसरा मामला शमशाद और प्रिया का है। शमशाद मेरठ के पास मोदीनगर में रहता था और फेसबुक के जरिए उसने लोनी में रहनेवाली प्रिया से दोस्ती कर ली। शमशाद एक फेक आईडी अमित गुर्जर के नाम से प्रिया से मिला और अंतत: तलाकशुदा प्रिया ने अमित गुर्जर उर्फ शमशाद के साथ रहने का फैसला कर लिया।

प्रिया तलाकशुदा थी और उसकी दस साल की बेटी भी उसके साथ थी। लेकिन शमशाद की पहचान उजागर होने पर शमशाद ने मां बेटी दोनों की हत्या करके अपने घर के भीतर ही उनकी लाशों को गाड़ दिया। जिस घर में वह रहता था वहीं जमीन खोदकर उसने मां बेटी दोनों को दफन कर दिया और उसके ऊपर सोफा रख दिया। इसके बाद वह उसी तरह सामान्य जीवन जीने लगा जैसे श्रद्धा की लाश को फ्रीज में रखकर आफताब जी रहा था।

अगर आफताब ने डेक्सटर देखकर ऐसी खुंखार मानसिकता पायी थी तो शाकिब और शमशाद ने ऐसी क्रूर हिंसा करने के लिए कौन सी वेब सीरीज से प्रेरणा ली थी?

एक बात तो तय है कि क्रूरता और हिंसा किसी खास प्रेरणा या नियमित अभ्यास से मनुष्य में घर करती है। अभी दो महीना पहले ही मध्य प्रदेश से सागर से शिव प्रसाद नामक एक व्यक्ति पकड़ा गया। वह रात में निकलता था और सोते हुए गार्ड की हत्या कर देता था। उसने कुल छह हत्याएं की थीं।

गार्डों के हत्याकांड की जांच की गयी तो पता चला कि शिव प्रसाद पुष्पा मुवी देखकर काफी प्रभावित हो गया था और वह उन सबको सजा दे रहा था जो अपनी ड्यूटी पर लापरवाही कर रहे थे। शिव प्रसाद इस लिहाज से एक साइको किलर की शब्दावली में फिट बैठता है क्योंकि वह किसी खास घटनाक्रम से प्रेरित होता है और हत्या को समस्याओं के समाधान के रूप में देखता है।

तो क्या आफताब, शाकिब और शमशाद जैसे हत्यारे गैर मुस्लिम लड़कियों को समस्या के रूप में देखते हैं जिन्हें अपने प्रेम जाल में इसलिए फंसाते हैं ताकि उनकी हत्या की जा सके?

आफताब, शाकिब और शमशाद द्वारा हिन्दू लड़कियों की हत्याओं का अध्ययन करेंगे तो पायेंगे कि तीनों ही हत्याओं में एक बात कॉमन हैं। तीनों ही हत्याओं के बाद हत्यारे बहुत सामान्य व्यवहार करते हैं। उनके लिए जैसे कुछ खास हुआ नहीं। जैसे मोदी नगर का शमशाद अपनी हिन्दू लिव इन को मारकर घर में जिस जगह गाड़ देता है उसी पर सोफा रखकर उठता बैठता है। कुछ ऐसा ही आफताब ने भी किया था। घर की फ्रिज में उसने लाश रखी हुई थी फिर भी वह उसी घर में रह रहा था।

इसी तरह एकता देशवाल का हत्यारा शाकिब लंबे समय तक एकता के परिवार को एकता बनकर मोबाइल पर आनेवाले मैसेज का जवाब देता रहा जैसे आफताब ने किया। आफताब ने भी ठीक उसी तरह श्रद्धा का सोशल मीडिया एकाउण्ट हैंडल किया जैसे शाकिब ने एकता देशवाल का किया था। दोनों बिल्कुल एक ही पैटर्न पर हत्या करने के बाद धोखा देने का प्रयास कर रहे थे कि जैसे वह जिन्दा है। क्या ऐसा संयोगवश हुआ है या फिर इसके पीछे कोई एकजैसी मानसिकता काम करती है?

लव जिहाद कही जाने वाली ऐसी हत्याओं में एक बात और बहुत चौंकाने वाली होती है। ऐसे हत्यारे अपनी गैर मुस्लिम प्रेमिकाओं की जिस क्रूरता से हत्या करते हैं उसे देखकर विश्वास करना मुश्किल होता है कि क्या सचमुच उनको कभी उस लड़की से प्रेम था?

यह कैसे हो सकता है कि जिस लड़की या महिला से वह कुछ समय पहले तक इतना प्यार करता है कि लड़की उस पर भरोसा करके अपना घर परिवार छोड़कर कुछ भी करने को तैयार हो जाती है। लेकिन वही व्यक्ति किसी न किसी कारण से उसी लड़की को इतनी क्रूरता से मारता है कि कोई जानी दुश्मन भी ऐसी क्रूरता न कर पाये। जब ऐसा होता है तब क्या विश्वास के साथ हम ये कह सकते हैं कि सचमुच वह प्रेम करता था या फिर प्रेम का नाटक खेल रहा था?

आप जिससे प्रेम करते हैं, उसे कभी मार नहीं सकते। आप चाहें जितना दुख सह लेंगे लेकिन उसे दुख नहीं देंगे जिसे आप प्रेम करते हैं। आफताब, शाकिब, शमशाद या फिर ऐसे और भी क्रूर जिहादी मानसिकता वाले जब अपनी प्रेमिका को ही घृणित तरीके से हत्या करते हैं तब सवाल खड़ा होना स्वाभाविक हो जाता है कि क्या वो सचमुच प्रेम करते हैं? इसी सवाल से लव जिहाद का शक पैदा होता है जब एक खास मकसद से गैर मुस्लिम लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसाया जाता है और यूज करने के बाद जैसे चाहें वैसे ठिकाने लगा दिया जाता है।

इसमें धर्म परिवर्तन के दबाव से लेकर हिन्दू लड़कियों से देह व्यापार करवाने तक के मामले सामने आ चुके हैं। इसी साल अप्रैल में ग्वालियर की एक लड़की का मामला सामने आया था जब इमरान ने राजू बनकर पहले उससे शादी की और फिर उसे देह व्यापार में धकेल दिया। किसी तरह से वह अपनी जान बचाकर वहां से निकली और बहन की मदद से पुलिस में शिकायत की। प्रेम के बाद धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बनने का दबाव बनाने वाली तो सैकड़ों घटनाएं सामने आ ही चुकी हैं।

इसलिए आफताब के मामले को सिर्फ एक साइको किलर का केस मानकर नहीं देखना चाहिए। ऐसी क्रूर और हिंसक मानसिकता की जड़ें व्यापक हैं और वह व्यक्तिगत न होकर किसी खास समूह तक फैली हुई हैं। समय है कि हम उस हिंसक और क्रूर मानसिकता पर कम से कम सच्चाई से बात करें जो दो वर्गों में इतना गहरा बंटवारा करती है कि हत्या जैसे जघन्य अपराध भी इस तरह से किये जाते हैं मानों ऐसा करके उन्हें कोई शवाब मिलने वाला है।

जब एक ही पैटर्न पर एक से अधिक घटनाएं घटित होने लगें तब किसी व्यक्ति को दोष देने से उसका उपाय नहीं निकलता। उसकी गहराई में जाना पड़ता है कि एक खास समुदाय या मजहब के लोग दूसरे समुदाय के लोगों के साथ बार बार एक ही पैटर्नवाला हिंसक व्यवहार क्यों कर रहे हैं? उनकी ऐसी हिंसक और क्रूर सोच आती कहां से है?

यह भी पढ़ें: Love, Marriage and Women: आफताब द्वारा मर्डर पर सवाल उठाने वाले श्रद्धा के प्रेम पर सवाल क्यों नहीं उठाते?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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