Dating Scams: चैटिंग की आड़ में चीटिंग का खेल
Dating Scams: डेटिंग स्कैम को लेकर एक नई रिपोर्ट आई है। एक्सपोज़र मैनेजमेंट कंपनी टेनेबल की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले एक साल में लगभग दो-तिहाई (66%) भारतीय वयस्क ऑनलाइन डेटिंग या रोमांस स्कैम का शिकार हुए हैं। इनमें से 81% को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि जितनी जानकारी वे अपने शोध के दौरान जुटा पाए, उसके अनुसार ऐसी धोखाधड़ी के चलते होने वाला यह नुकसान करीब 1.3 करोड़ डॉलर था। लेकिन, वे यह भी मानते हैं कि यह एक सतही अनुमान है। वास्तविक रकम इससे कई गुना ज्यादा हो सकती है।

इसी से मिलते-जुलते आंकड़े पिछले साल भी आए थे। उनमें भी यही बताया गया था कि भारत के 66% वयस्क, ऑनलाइन डेटिंग या रोमांस स्कैम का शिकार बन चुके हैं। लेकिन, तब पैटर्न अलग था। पिछले साल, इस तरह की ठगी में बहुत ज्यादा पैंतरेबाजी नहीं थी, बस दोस्ती और रोमांस का कॉकटेल तैयार किया जाता और शिकार को पिला दिया जाता था। वह या तो भावनाओं के बहाव में, या फिर लालच में फँस जाता और ठगा जाता। बीते साल, इन 'शिकारों' की जितनी रकम स्कैमर्स की जेब में गई, उसके हिसाब से हर व्यक्ति को औसतन 7,966 रुपए की चपत लगी।
इस तरह के घोटालों में होता यह है कि स्कैमर मैट्रिमोनियल वेबसाइटों पर अपने प्रोफाइल में आकर्षक व्यक्तित्व वाले फोटो लगाकर, खुद को यूएस या यूके जैसे किसी देश में रहने वाले रईस कारोबारी या अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और इन साइटों पर अपने लिए जीवन साथी तलाश रही, ज्यादातर तीस के पार वाली, महिलाओं को टार्गेट करते हैं।
सामान्य बातचीत पहले दोस्ती में बदलती है और फिर रोमांस में। इसी बीच परदेशी पार्टनर उसे बताता है कि उसने उसके लिए एक गिफ्ट भेजा है। प्रियतम के पहले उपहार का इंतजार करती प्रेयसी को एक कॉल आता है। कॉलर बताता है कि वह कस्टम से बोल रहा है और उसके लिए एक गिफ्ट आया है। उसे गिफ्ट के लिए कस्टम ड्यूटी भरनी होगी। फिर टार्गेट को एक बैंक नंबर देकर उसमें एक विषम रकम जमा करने के लिए कहा जाता है, क्योंकि राउंड फिगर अमाउंट संदेह पैदा कर सकता है। अक्सर टार्गेट को विक्टिम में बदलने में देर नहीं लगती।
दूसरा तरीका स्कैमर यह आजमाता है कि वह टार्गेट को भावनाओं में इतना गहरे तक ले जाता है कि टार्गेट उससे बहुत जुड़ाव महसूस करने लगता है। फिर एक दिन वह इमरजेंसी बताकर उससे एक बड़ी रकम उधार मॉंग लेता है और रकम मिलने के बाद शिकार से संबंध पूरी तरह तोड़ लेता है। तीसरे तरीके में उसे वह अपनी फर्म या प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट कर पार्टनर बनाने का प्रस्ताव रखता है और मोटे मुनाफे का सपना दिखाता है।
हर टार्गेट की भावनात्मक व आर्थिक स्थिति और रिश्ते की गहनता के आधार पर स्कैमर तय करते हैं कि किस पर कौन सा तरीका लागू होगा। अगर टार्गेट ऐसे जाल में नहीं फँसता, तो फिर स्कैमर सीधे एक्सटॉर्शन पर उतर आता है और मांगी हुई रकम न देने पर उसकी फोटो और चैट को पब्लिश करने की धमकी देने लगता है। इस तरह के मामले इतने बढ़ गए थे कि पिछले साल अगस्त में सरकार को जनता के लिए चेतावनी जारी करनी पड़ी कि वे इस तरह के स्कैम में न फँसें।
अब चूंकि ये तरीके बहुत ज्यादा एक्सपोज हो चुके हैं, इसलिए स्कैमर्स ने अपने पैटर्न को थोड़ा बदला है। बाकी सब तो पहले की तरह रहता है, लेकिन इन नए तरीकों में जो बुनियादी फर्क आए हैं, वे ये हैं कि एक तो इसमें मैट्रिमोनियल वेबसाइट की जगह टिंडर, बंबल जैसी डेटिंग साइट या इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प जैसे एप्प का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है और दूसरा इसमें अब सिर्फ 'भावुक' महिलाओं को ही शिकार नहीं बनाया जाता, बल्कि हर वो स्त्री-पुरुष टार्गेट हो सकता है, जो ऊबा हुआ है या अकेला है और ऑनलाइन प्यार की तलाश में है।
जो शिकार बनाया जा रहा है उसका जेंडर हो सकता है, लेकिन स्कैमर का कोई जेंडर नहीं होता। हो सकता है कि हर प्रोफाइल के पीछे एक पूरा गिरोह काम कर रहा हो। तीसरा सबसे बड़ा फर्क यह आया है कि संभावित शिकार से दोस्ती या रोमांस करते हुए, उससे एकदम से या सीधे पैसा नहीं मांगा जाता। बल्कि उसे एक सुनहरे भविष्य का विश्वास दिलाया जाता है। इस तरह के घोटालों के शिकार बनने वालों में भोले-भाले, अल्पज्ञानी व्यक्ति नहीं, बल्कि काफी उच्चशिक्षित प्रोफेशनल, एग्जीक्यूटिव्स, बिजनेसमैन, नेता आदि होते हैं।
साइबर शब्दावली में इन घोटालों के लिए 'पिग बूचरिंग स्कैम्स' टर्म का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पीछे तर्क है कि जिस तरह से सुअर पालने वाला कसाई उसे काटने से पहले उसे खूब खिलाकर मोटा करता है, उसी तरह से ऐसे घोटालों में ठग अपने शिकार को पहले अपनी ओर से कुछ आर्थिक लाभ कराते हैं और उसका भरोसा जीतते हैं। ये पिग बूचर्स सोशल मीडिया, मैसेजिंग और डेटिंग एप्स पर नकली खातों का एक विशाल नेटवर्क संचालित करते हैं। वे अपने शिकार से कई दिनों तक लगातार चैट करते हैं, जो काफी भावनात्मक और अंतरंग होती है।
इसके बाद वे उन्हें यकीन दिलाते हैं कि बिटकॉइन, एथेरियम, लिटकॉइन और स्पॉट गोल्ड आदि में निवेश से कम वक्त में कैसे बहुत ज्यादा मुनाफे का सौदा बन सकता है। वे उन्हें क्रिप्टो ट्रेडिंग एप्प डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। शिकार का भरोसा जीतने के लिए वे उसे कुछ कॉइन गिफ्ट देने में भी पीछे नहीं रहते। घोटाले में प्रदर्शित क्रिप्टो कॉइन और उनकी 'तेजी से बढ़ती दिखने वाली कीमतें' दोनों ही फर्जी होते हैं। लेकिन, शिकार के पास संदेह करने की कोई वजह नहीं होती और वह अच्छी खासी रकम निवेश के रूप में दांव पर लगा देता है। एक बार उसके पास से पैसा निकलने की देर है, उसके बाद तो न उसे मुनाफा नजर आता है, न निवेश के लिए प्रेरित करने वाला हितैषी दोस्त।
ऐसे स्कैमर्स का नेटवर्क पूरी दुनिया में फैला है। तमाम जागरुकता अभियानों और सुरक्षा कवचों के बावजूद, ये ठग हमेशा पात-पात ही साबित होते हैं। इसीलिए ठगे जाने वालों की संख्या और ठगी की रकम लगातार बढ़ती ही जा रही है। वर्ष 2019 में रोमांस स्कैम में लोगों ने 493 मिलियन डॉलर गंवाए, वहीं 2022 में यह रकम बढ़कर 1.3 बिलियन डॉलर हो चुकी है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications