Super Rich Net Worth: 'गरीब' हो रहे हैं दुनिया के सुपररिच 'अमीर'
दुनिया के सबसे धनी लोगों की तालिका में गौतम अडानी तीसरे स्थान से खिसकर अब 17वें स्थान पर पहुंच गये हैं। लेकिन, वह अकेले नहीं है जिनकी पूंजी कम हुई है। 2022 में विश्व के लगभग सभी शीर्ष धनिकों की नेट वर्थ घटी है।

Super Rich Net Worth: पिछले साल नवंबर में आई ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इन्डेक्स के मुताबिक 2022 के पहले दस महीनों में, दुनिया के टॉप 20 अमीरों की दौलत 50 हजार करोड़ डॉलर घट चुकी थी। अपनी नेटवर्थ में भारी गिरावट देखने वालों में मार्क जुकरबर्ग, लैरी एलिसन और बिल गेट्स जैसे टेक दिग्गज भी शामिल थे तथा एलन मस्क, जेफ बेजोस व जैक मा जैसे अति सफल कारोबारी भी। इन्होंने अपनी दौलत भी गंवाई और शीर्ष अमीरों की सूची में अपनी पोजीशन भी।
इससे पहले जुलाई में भी ऐसी ही रिपोर्ट आई थी जिसमें बताया गया था कि वर्ष 2022 की पहली छमाही में विश्व के 500 सबसे अमीर लोगों की सम्पत्ति 1.4 ट्रिलियन डॉलर घटी।
दिलचस्प बात यह है कि ये वही सुपर रिच थे, जिन्होंने कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी तक को अपनी कमाई पर हावी नहीं होने दिया था। उल्टे जब गरीब लोग अपनी जीविका खो रहे थे, मध्यवर्ग गरीब हो रहा था, तब भी इनकी दौलत करिश्माई तरीके से लगातार बढ़ रही थी।
भारतीय अमीरों पर तो लक्ष्मी कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी। ऑक्सफैम की जनवरी 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में देश के गरीबों की संख्या दोगुनी होकर 13.4 करोड़ हो गई थी। वहीं देश में अमीरों की आमदनी दोगुनी हो चुकी थी। इस दौरान देश में 40 नए अरबपति बने और देसी अरबपतियों की संख्या बढ़कर 142 हो गई।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मार्च 2020 के बाद से विश्व के शीर्ष दस अमीरों की संयुक्त सम्पत्ति 552 खरब रुपये से बढ़कर 1184 खरब रुपये हो गई थी। अकेले एलन मस्क की सम्पत्ति में इस दौरान सबसे तेज, 1000% की वृद्धि दर्ज की गई थी। रिपोर्ट का कहना था कि तब अरबपतियों की सम्पत्ति प्रति दिन 2.7 अरब डॉलर बढ़ रही थी। लेकिन 2022 ने तस्वीर बदल कर रख दी।
जारी है गिरावट का दौर
शास्त्रों में लक्ष्मी को चंचला कहा गया है। इस समय वह दुनिया भर के धनकुबेरों को अपने इसी स्वभाव से परिचित करा रही है। शीर्ष अमीरों की सम्पत्ति में गिरावट का दौर जारी है।
2022 में अरबपतियों की आमदनी ही नहीं बल्कि संख्या भी कम हुई है। इस एक वर्ष में विश्व में 87 अरबपति कम हो गये। साठ फीसदी की सम्पत्ति कम हुई तो चालीस फीसदी की सम्पत्ति बढ़ी। जिस समय टॉप अरबपति नेटवर्थ घटने से परेशान थे, एक हजार अरबपति ऐसे भी थे, जिन्होंने 2021 की तुलना में 2022 में ज्यादा कमाई की।
ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट में 27 जनवरी से 6 फरवरी के बीच सर्वाधिक अमीरों की नेटवर्थ में आई घटत के बारे में बताया गया है। इस अवधि में दुनिया के सबसे रईस व्यक्ति बर्नार्ड अर्नाल्ट, बिल गेट्स, वारेन बफेट, मुकेश अंबानी ( सब एक- एक बिलियन डॉलर), मार्क जकरबर्ग (1.6 बिलियन डॉलर), लैरी पेज, सर्जेई बिन, जेफबेजोस (दो-दो बिलियन डॉलर), एलन मस्क (सात बिलियन डॉलर) व गौतम अडाणी (33.7 बिलियन डॉलर) इस हफ्ते के सबसे बड़े लूजर साबित हुए। एक सप्ताह में जितना नुकसान इस सूची में शामिल बाकी सारे धनिकों ने संयुक्त रूप से उठाया, उसका करीब दोगुना धन, इस अवधि में अकेले अडाणी ने ने गंवाया।
ऐसे कम होती है नेटवर्थ
जब कोई कंपनी बनती है तो उसका कोई मालिक या फाउंडर होता है। जब कंपनी को अपने व्यवसाय को फैलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है तो वह आईपीओ लाकर शेयर बाजार से पैसा जुटाती है। जो भी ये शेयर खरीदते हैं, वे सभी कंपनी के कुछ न कुछ अंश के मालिक बन जाते हैं। लाभ के लिए, और कंपनी पर अपना स्वामित्व बनाए रखने के लिए, जो उसके मालिक, फाउंडर या प्रमोटर होते हैं, वे शेयरों का एक बड़ा हिस्सा खरीद लेते हैं। जब इन शेयरों की कीमतों में उछाल आता है तो उनकी नेट वर्थ भी बढ़ने लगती है और जब शेयर गिरते हैं तो नेटवर्थ गिर जाती है।
अधिकतर तो यह उतार-चढ़ाव बाजार के हिसाब से स्वाभाविक ढंग से होता है, लेकिन कई बार कुछ राजनीतिक, सामाजिक, या अन्य आकस्मिक कारण एकाएक ही भारी उछाल या गिरावट का सबब बन जाते हैं। जैसा कि गौतम अडाणी के मामले में हुआ। हिंडनबर्ग की एक नेगेटिव रिपोर्ट से, उनकी कंपनी के शेयर होल्डर्स का भरोसा डगमगा गया और उन्होंने धड़ाधड़ शेयर बेचने शुरू कर दिए। इससे शेयरों की कीमत बेतहाशा गिर गई और अडाणी की निजी सम्पत्ति का भी काफी नुकसान हुआ। मंगलवार से फिर से अडाणी समूह की कई कंपनियों के शेयरों मे तेजी का रुझान देखने को मिल रहा है और उनकी रैंकिंग में सुधार आने की संभावनाएं काफी बढ़ गयी हैं।
एक धरती पर दो दुनिया
अगर धन के स्वामित्व के हिसाब से देखा जाये तो इस पृथ्वी पर दो दुनियाएं हैं। एक अमीरों की दुनिया और दूसरी गरीबों की दुनिया। दोनों दुनियाएं बेशक समांतर नजर आती हों, लेकिन दोनों के बीच खाई बहुत चौड़ी है। विश्व असामानता रिपोर्ट, 2021 का दावा है कि दुनिया के आधे लोग ऐसे हैं, जो विश्व की सारी दौलत में सिर्फ दो प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं। 76 प्रतिशित सम्पत्ति एक प्रतिशत सबसे अमीर लोगों के पास है और बाकी की 22 प्रतिशत मध्यवर्गीय लोगों के पास। इन एक प्रतिशत की यह दौलत अगर विश्व के सभी लोगों में बराबर बाँट दी जाये तो हर व्यक्ति के हिस्से में करीब साठ लाख रूपये आयेंगे।
जनवरी में वर्ल्ड इकोनॉमिक फॉरम में पेश ऑक्सफैम की रिपोर्ट के हिसाब से भारत में स्थिति थोड़ी सी बेहतर है। यहाँ एक प्रतिशत सबसे धनी लोगों के पास देश की सिर्फ 40% सम्पत्ति ही है। जबकि देश के पचास प्रतिशत सर्वाधिक गरीबों के पास कुल तीन प्रतिशत सम्पत्ति है। इस लिहाज से भारत के अमीरों और गरीबों के बीच खाई अपेक्षाकृत कम चौड़ी है।
चौड़ाई कम हो या ज्यादा, लेकिन यह खाई आर्थिक दुनिया की एक कठोर सच्चाई है। धनिकों की सम्पत्ति कम होने से गरीबों को एक खुशी भले ही मिले, लेकिन कोई फायदा नहीं मिलता।
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सच तो यह है कि भालू के बाल झड़ जाने से उसका वजन कम नहीं होता। जो सुपर रिच होते हैं, उनके जीवन में इस तरह के उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा फर्क पैदा नहीं करते। लेकिन अगर मान भी लें कि अमीर अब वाकई गरीब हो रहे हैं, तो भी गरीबों को इसका कोई लाभ नहीं होने वाला। दुनिया की आधी दौलत इन्हीं दो-तीन फीसदी लोगों के बीच इधर-उधर होती रहने वाली है।
यह भी पढ़ें: अडानी का 3 दिन में 34 अरब डॉलर डूबा, अमीरी में 10वें पायदान से भी नीचे खिसके
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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