Bastar Movie: क्या बस्तर फिल्म में सुदीप्तो सेन वामपंथ का हिंसक चेहरा दिखाएंगे?

Bastar Movie: सुदीप्तो सेन पिछले साल तब चर्चा में आए थे, जब इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल (इफ्फी) गोवा की इंटरनेशनल ज्यूरी प्रमुख और इजरायल के फिल्मकार ने विवेक अग्निहोत्री की मूवी 'कश्मीर फाइल्स' के फाइनल में पहुंचने पर ही आपत्ति जता दी थी और उसे एक प्रोपेगेंडा फिल्म बताया था। तब ज्यूरी के इकलौते भारतीय सदस्य के तौर पर सुदीप्तो सेन ने ही उनसे असहमति जताई थी। लेकिन तब किसी को क्या पता था कि उनकी आने वाली फिल्म 'द केरला स्टोरी' भी 'कश्मीर फाइल्स' की ही तरह विवादों का तूफान लाने वाली है। 300 करोड़ से भी अधिक कमाने वाली 'द केरला स्टोरी' के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन और प्रोडयूसर विपुल अमृतलाल शाह की जोड़ी ने अब एक नई मूवी का पोस्टर जारी किया है, 'बस्तर'।

पोस्टर को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में ही चर्चाएं शुरू हो गईं, क्योंकि पोस्टर में फिल्म की रिलीज की तारीख तो थी, लेकिन कोई चेहरा नहीं था। यानी स्टारकास्ट के बारे में अभी तक सस्पेंस रखा गया है, जबकि फिल्म की रिलीज की तारीख पोस्टर पर 5 अप्रैल 2024 रखी है। बस्तर छत्तीसगढ़ का वो इलाका है, जो नक्सल प्रभावित है, बस्तर डिवीजन में ही बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा, कोंडागांव और कांकेर जिले आते हैं। पोस्टर से ये तो अनुमान लग गया था कि फिल्म नक्सलियों से जुड़ी होगी। पोस्टर शेयर करते हुए विपुल शाह के प्रोडक्शन हाउस के ट्वीट में लिखा कि अपने कैलेण्डर में 5 अप्रैल 2024 को मार्क कर लीजिए। एक ऐसी सच्चाई देखने के लिए तैयार हो जाइये जो आपको निशब्द कर देगी। हम बस्तर लेकर आ रहे हैं।

Bastar Movie: Will Sudipto Sen show the violent face of the Left in the film Bastar?

उसके बाद फिल्म की स्टोरी को लेकर कयास लगने शुरू हो गए थे। सुदीप्तो सेन का एक पुराना इंटरव्यू भी वायरल होने लगा, जिसमें उन्होंने किसी अखबार को कहा था कि नक्सलियों की 50 साल की कहानी एक मूवी में लेकर जल्द आऊंगा। ऐसे में खुद सुदीप्तो सेन ने ट्वीट पर बताया कि, "6 अप्रैल 2010 को बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में 76 सीआरपीएफ जवान और 8 गरीब गांववाले नक्सली टेररिस्टों के हमले में मारे गए थे। ठीक 14 साल बाद उन्हें 'पोइटिक जस्टिस' दिया जाएगा'। शायद इसीलिए ये मूवी इस घटना की बरसी यानी 6 अप्रैल से ठीक एक दिन पहले यानी 5 अप्रैल को रिलीज की जाएगी।

14 साल बाद उठा ये मुद्दा वामपंथियों में बेचैनी बढ़ाने वाला हो सकता है। इसकी दो वजहे हैं। एक तो फिल्म की रिलीज की टाइमिंग, जिस तरह 'द केरला स्टोरी' की रिलीज कर्नाटक चुनाव के समय हुई थी, उसी तरह ये मूवी आम चुनावों के समय अगले साल होगी। उस समय देश का चुनावी माहौल चरम पर होगा। दूसरी वजह ये भी है कि इस फिल्म के चलते लेफ्ट और कांग्रेस के रिश्ते फिर से चर्चा में आएंगे और कई दबा दी गईं बातें फिर से मीडिया चर्चा का विषय बनेगी।

दरअसल वाजपेयी सरकार गिरने के बाद सीपीआई (एमएल) नक्सलबारी ने सीपीआई (माओवादी) में विलय कर लिया था। उस वक्त वामपंथी पार्टियां यूपीए वन में गठबंधन का हिस्सा थीं, सो नक्सली भी फलते फूलते रहे। यूपीए के पहले कार्यकाल में इनके खिलाफ कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया गया। लेकिन जब अमेरिका से परमाणु अप्रसार संधि का मौका आया तो वामपंथी पार्टियों और कांग्रेस में अनबन हो गई। ऐसे में दोनों ने अपने अपने रास्ते अलग कर लिए।

2009 में आम चुनावों में यूपीए 2 की सरकार बिना वामपंथी पार्टियों के सहयोग के ही सत्ता में आ गयी। ये बड़ा झटका था ना केवल वामपंथियों के लिए बल्कि नक्सलियों के लिए भी। दूसरा झटका यूपीए की सरकार ने इनको ये दिया कि दूसरी बार सरकार बनते ही माओवादियों पर प्रतिबंध लगा दिया। उस समय के गृहमंत्री पी चिदंबरम ने तो नक्सलियों के खिलाफ सेना उतारने की बात भी कह दी थी जिसका बहुत विरोध हुआ था। लेकिन दूसरे कार्यकाल में पीएम मनमोहन सिंह ने भी बयान दिया कि माओवादी भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं।

यूपीए 1 के दौरान 2007 में दंतेवाड़ा में ही नक्सलियों ने 55 पुलिसवालों पर हमला करके हत्या कर दी थी, जबकि 2010 में सिल्दा कैम्प हमले में भी 25 पुलिसवाले मारे गए थे। मनमोहन सिंह की सरकार पर बड़ा दवाब था कि एक्शन लिया जाए। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' शुरू किया गया। 2010 के नक्सली हमले के बाद एक नक्सली गोपाल का बयान भी सामने आया था कि नक्सलियों ने बस्तर में जो भीषण हमला किया था वह ऑपरेशन ग्रीन हंट के जवाब में किया गया था।

उस समय नक्सलियों ने भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले की बड़ी योजना बनाई थी। 62वीं बटालियन जब 6 अप्रैल 2010 को सुबह 6-7 बजे एक ऑपरेशन के लिए सुकमा घाटी के जंगल में घुसी तो बारूदी सुरंगों में ब्लास्ट करके उन पर हमला बोल दिया गया। बाद में पाया गया कि कुल 76 सीआरपीएफ जवानों की हत्या हुई थी, जिसमें से 2 जवानों के तो गले काट दिए गए थे। कुल 300 हमलावरों ने इस ब्लास्ट के बाद उन पर धावा बोला था कि कहीं कोई जिंदा नहीं रह पाए। जवानों ने मरते दम तक संघर्ष किया था और उनके 8 लोगों को मार गिराया था। हालांकि अपने पोस्टर और ट्वीट में सुदीप्तो सेन लिख रहे हैं कि 8 गरीब गांव वाले भी मारे गए। क्या फिल्म में जिन आठ मौतों को दिखाया जाएगा वो निर्दोष ग्रामीण होंगे या नक्सली, यह तो फिल्म के रिलीज होने पर ही पता चलेगा।

अभी तक साउथ में तमाम फिल्में नक्सलवाद पर बनी हैं। हिंदी में प्रकाश झा की 'चक्रव्यूह' और सुनील शेट्टी की 'रेड अलर्ट' जैसी फिल्में बनती रही हैं जो नक्सल समस्या के दाएं बाएं से निकलती रही हैं। इसी तरह बुद्धा इन ट्रैफिक जाम नक्सली समस्या पर बनी फिल्म थी जो पहली बार फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री को चर्चा में ले आई थी। हालांकि सुदीप्तो सेन का दावा यही है कि ये मूवी केवल एक ही हमले पर आधारित होगी, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इस बहाने तमाम राजनीतिक डायलॉग्स व घटनाओं के जरिए नक्सल समस्या फिर से चर्चा में आ जाएगी।

लेकिन आम दर्शकों की दिलचस्पी तो यह जानने में है कि फिल्म की रिलीज की तारीख और पोस्टर जारी कर दिया तो स्टार कास्ट के बारे में क्यों नहीं बताया? जनता ये भी जानना चाहती है कि क्या फिल्म की शूटिंग गुपचुप ढंग से हो गई या फिर ये निर्माता निर्देशक का अति आत्मविश्वास है कि फिल्म की रिलीज पहले से चुनावों के आस पास घोषित करके सुर्खियों बटोर लेंगे औऱ बाद में शूटिंग शुरू करेंगे? एक वेबसाइट ने तो बाकायदा अमिताभ बच्चन, अजय देवगन और फातिम शेख के नाम का भी ऐलान कर दिया है, लेकिन फिल्म की टीम की तरफ से इस सब पर अभी तक खामोशी ही बरती गई है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+