बंगाल चुनाव 2021: ममता के गोत्र पर बोले ओवैसी, मेरा क्या जो शांडिल्य या जनेऊधारी नहीं ?

कोलकाता: नंदीग्राम में चुनाव प्रचार खत्म होने के ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना गोत्र बताने की क्या मजबूरी थी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। लेकिन, उन्होंने ऐसा करके चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा तो उनके इस अचानक के गोत्र प्रेम पर हमले कर ही रही है, हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को भी उनका यह नया चुनावी हिंदुत्व प्रेम रास नहीं आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सभी पार्टियां जिस तरह से हिंदुत्व की ओर भाग रही हैं, वह सिद्धांतहीन है अपमानजनक है और इसका उन्हें फायदा नहीं मिलने वाला। इससे पहले भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी इस मुद्दे पर अपना एक्सपर्ट कमेंट दे चुके हैं।

हमारे जैसे लोगों का क्या जो शांडिल्य या जनेऊधारी नहीं-ओवैसी

हमारे जैसे लोगों का क्या जो शांडिल्य या जनेऊधारी नहीं-ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के शांडिल्य गोत्रधारी होने के दावे पर जोरदार पलटवार किया है। ओवैसी ने ट्वीट कर सवाल किया है, 'हमारे जैसे लोगों का क्या होगा जिसका गोत्र शांडिल्य नहीं है या जो जनेऊधारी नहीं है, जो कुछ खास देवताओं का भक्त नहीं है, जो किसी चालीसा का पाठ नहीं करता या किसी मत को नहीं मानता ? सभी पार्टियां सोच रही हैं कि जीत के लिए हिंदू भावनाओं को दिखाना जरूरी है। यह सिद्धांतहीन, अपमानजनक और सफल नहीं होने वाला है।' गौरतलब है कि बिहार में 5 सीटें जीतने के बाद ओवैसी इसबार बंगाल में भी बड़ी उम्मीदों के साथ पहुंचे थे, लेकिन जब फुरफुरा शरीफ के मौलवी ने इनके मंसूबों पर बट्टा लगा दिया तो उन्होंने अपनी पार्टी को अकेले ही मैदान में उतारने का फैसला किया और वहां चुनाव प्रचार भी करने वाले हैं।

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    असल में मेरा गोत्र शांडिल्य है- ममता बनर्जी

    असल में मेरा गोत्र शांडिल्य है- ममता बनर्जी

    ममता बनर्जी की दिक्कत ये है कि बंगाल में उनकी ऐसी छवि बन गई है कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें बार-बार खुद को हिंदू साबित करना पड़ रहा है। वह मंदिर-मंदिर घंटा बजाकर आ चुकी हैं तो चुनावी मंचों से कभी दुर्गा पाठ तो कभी चंडी पाठ करके यह साबित करने की कोशिशों में लगी हैं कि वह यह सब भूली नहीं हैं। लेकिन, फिर भी वो जहां भी जाती हैं, बीजेपी वाले जय श्रीराम का नारा लगाकर उन्हें इस मोर्चे पर घेरने की कोशिश करते हैं। मंगलवार को नंदीग्राम में कम से कम दो ऐसे मौके आए जब, ममता की मौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाने शुरू कर दिए। यह सब तब से शुरू हुआ है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में वह ऐसा होने पर तिलमिला गई थीं। लेकिन, अब उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में वोटिंग से ठीक पहले अपना गोत्र बताकर नई बहस छेड़ दी है। चुनाव प्रचार खत्म होने से ठीक पहले उन्होंने कहा, 'मैं एक मंदिर में गई जहां पुजारी ने मुझसे मेरा गोत्र पूछा। मैंने उससे कहा कि मां माटी मानुष, लेकिन असल में मेरा गोत्र शांडिल्य है।'

    'दीदी ये बताइए क्या रोहिंग्याओं और घुसपैठियों का गोत्र भी शांडिल्य है'

    'दीदी ये बताइए क्या रोहिंग्याओं और घुसपैठियों का गोत्र भी शांडिल्य है'

    चुनाव की पूर्व संध्या पर अपने गोत्र के प्रति दीदी की इस 'ममता' को देखकर भाजपा ने पलटवार करने में देरी नहीं की। केंद्रीय मंत्री और ऐसे मामलों पर भाजपा के एक्सपर्ट नेता माने जाने वाले गिरिराज सिंह बोले, 'चुनाव हारने के डर से ममता दीदी अब अपना गोत्र बता रही हैं। दीदी, मुझे सिर्फ इतना बताइए कि क्या रोहिंग्याओं और घुसपैठियों का गोत्र भी शांडिल्य है। वह अब भयभीत हो गई हैं, इसीलिए कभी सुवेंदु अधिकारी जैसे बीजेपी के कार्यकर्ता पर हमला करती हैं और कभी अपने गोत्र का इस्तेमाल करती हैं।' जहां तक ममता का सवाल है तो उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र में प्रचार के आखिरी दिन न सिर्फ अपना गोत्र बताया, बल्कि 20 दिन में पहली बार राष्ट्रगान के लिए व्हीलचेयर छोड़कर उठकर खड़ी भी हुईं।

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