'अडानी ग्रुप मामले पर चुप रहने के मिले होंगे निर्देश', ममता बनर्जी की चुप्पी पर अधीर रंजन चौधरी ने उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी की चुप्पी का एक ही कारण हो सकता है, मोदी के साथ उनकी निकटता और अडानी के साथ नई दोस्ती।

अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी

Adhir Ranjan Chowdhary on Mamata Banerjee Adani Group: हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद कांग्रेस अडानी ग्रुप को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमलावर है। आज यानी मंगलवार को इस मामले को लेकर सभी विपक्षी दलों की बैठक हुई। इस बीच कांग्रेस ने ममता बनर्जी की चुप्पी पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस मसले पर चुप रहने के निर्देश मिले होंगे। साथ ही अधीर रंजन चौधरी ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ऐसा कुछ भी करने के लिए तैयार नहीं हो सकती हैं जो अडानी ग्रुप के हितों को नुकसान पहुंचाए।

'पीएम मोदी से मिला होगा निर्देश'

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी की चुप्पी का एक ही कारण हो सकता है, मोदी के साथ उनकी निकटता और अडानी के साथ नई दोस्ती। पत्रकारों से बातचीत में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अडानी ग्रुप द्वारा ताजपुर बंदरगाह बनाया जाएगा और उस प्रभाव के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दीदी ने सभी प्रकार के वादे किए हैं। उन्हें मोदी या अडानी से ऐसा कुछ भी नहीं करने का निर्देश हो सकता है जो ग्रुप के हितों के खिलाफ हो।

'गौतम अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट एक घोटाला'

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि गौतम अडानी ग्रुप के शेयरों में गिरावट एक घोटाला है जिसमें आम लोगों का पैसा शामिल है, एलआईसी और एसबीआई ने उनमें निवेश किया है। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सीएम ममता बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भाजपा जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा लोगों के पैसे का इस्तेमाल पार्टी के साथियों को फायदा पहुंचाने के लिए कर रही है। वह जाहिर तौर पर अडानी ग्रुप में एसबीआई और एलआईसी द्वारा किए गए कथित निवेश का जिक्र कर रही थीं।

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    'टीएमसी बीजेपी को कर रही मजबूत'

    बंगाल के मंत्री फिरहाद हाकिम ने भी कहा था कि अडाणी ग्रुप के संकट का असर ताजपुर बंदरगाह परियोजना पर नहीं पड़ेगा। पार्टी सदस्यों ने एसबीआई की शाखाओं और एलआईसी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया और भाजपा नीत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। त्रिपुरा चुनाव लड़ने के टीएमसी के फैसले के बारे में बात करते हुए चौधरी ने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य भाजपा को मजबूत करना और अन्य दलों को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि मेघालय जाकर टीएमसी ने भाजपा की मदद की। वे त्रिपुरा में भी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। उनके पास त्रिपुरा में उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने के लिए पर्याप्त लोग नहीं हैं। उनका एकमात्र मकसद भाजपा को मजबूत करना और अन्य सभी दलों को कमजोर करना है।

    यह भी पढ़ें- ममता बनर्जी ने भाजपा में लगाई सेंध, पंचायत चुनाव से पहले अलीपुरद्वार बीजेपी विधायक टीएमसी में हुए शामिल

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