शिवराज सिंह चौहान को BJP ने दिया रायसेन-विदिशा लोक सभा का टिकट, जानिए कैसे पैदल नाप दिया था ये संसदीय क्षेत्र
बीजेपी ने मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के उम्मीदवारों का एलान किया है। इसमें कुछ को रिपीट किया गया है और कुछ चेहरे बदले गए हैं। इस सूची में राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल है। बीजेपी ने उन्हें विदिशा से टिकट देने का ऐलान किया है।
टिकट मिलने पर शिवराज सिंह चौहान ने खुशी जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कहा है कि वे युगपुरुष और युगदृष्टा हैं। उन्होंने भारत का अभूतपूर्व विकास कर जनकल्याण का इतिहास रचा है और अब विकसित भारत का संकल्प भी उनके ही नेतृत्व में पूरा होगा। इस संकल्प को पूरा करने में मुझे भी गिलहरी की तरह योगदान देने का अवसर मिला है।

1991 में विदिशा सीट पर उपचुनाव में जीत हासिल कर महज 32 साल की उम्र में सांसद बने शिवराज सिंह चौहान संसदीय क्षेत्र में सैकड़ो किमी तक यात्रा पर पैदल ही निकल पड़ते थे। लोगों से मिलने जुलने की इस आदत में कई बार विदिशा से बुदनी तक पैदल यात्रा से शिवराज को पांव पांव वाले भैया की पहचान मिल गई। शिवराज की इस पैदल यात्रा की आदत उस दौर के दिग्गज नेताओं के लिए भारी मुसीबत का कारण भी बन जाती थी क्योंकि कई किमी तक लगातार पैदल चलकर रास्ते में किसी गांव में ही रात भी रुक जाते थे।
वाहनों का था अभाव, फक्कड़पन में चलती थी नेतागिरी
91 के दौर में वाहनों का बहुत अभाव था शिवराज सांसद जरूर बन गये थे लेकिन उनके पास तब अपना खुद का कोई घर और गाड़ी नहीं थे। अक्सर बस से रायसेन और विदिशा आ जाने वाले शिवराज शहरी क्षेत्र में कभी कभार तांगे से आना जाना कर लेते थे तो ग्रामीण क्षेत्र में दौरों पर पैदल ही निकल जाते थे। शुरुआती दौर में शिवराज के कई बार आने जाने और रुकने आदि के लिए प्रबंध भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा किया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार कई दिनों तक और सैकड़ो किलोमीटर का पैदल सफर शिवराज तय कर लेते थे।
1992 में किराए पर लिया मकान आज भी हैं किराएदार
शिवराज सबसे पहले विदिशा की स्वर्णकार कॉलोनी में मकान किराए से लेकर रहे लेकिन जब सांसद बन गए और आमजन और कार्यकर्ताओं का घर आना जाना बढ़ा तो थोड़े बड़े मकान की जरूरत भी महसूस हुई। तब उन्होंने शेरपुरा में मुन्ना लाल जैन का मकान किराए पर ले लिया। 32 साल से शिवराज इस मकान का किराया दे रहे हैं और अब भी विदिशा जाने पर इस मकान में पहुँचते हैं। शिवराज जब तक सीएम रहे तब यह मकान विदिशा में सीएम हाउस के नाम से पहचाना गया।
अटल के उत्तराधिकारी बने थे शिवराज
शिवराज सिंह चौहान 1990 में बुदनी से विधायक थे बाद में लोकसभा चुनाव में उन्होंने विदिशा से प्रत्याशी अटल जी के लिए खूब भाषण मंच से दिए। यहां से सीधे स्व बाजपेयी की पसंद में शामिल हर शिवराज ही बाद में उपचुनाव में प्रत्याशी बने और फिर लगातार 5 चुनाव जीते। उनके मुख्यमंत्री बनने पर उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके सबसे भरोसेमंद और तब सरकार में राज्य मंत्री रहे रामपाल सिंह ने उदयपुरा विधानसभा सीट से इस्तीफा देकर चुनाव लड़े और जीते।












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