बनारस के मुसलमान की पहली पसंद नरेंद्र मोदी

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में कहा गया था कि बनारस के मुसलमान ही यहां की लोकसभा सीट तय करते हैं। जेल में बंद मुख्तार अंसारी ने चुनाव न लड़ने का फैसला कर कहा है कि उनकी पार्टी किसी अन्य पार्टी को समर्थन देकर मोदी को हार का स्वाद चखाएगी। लेकिन अभी तक किए गए विभिन्न सर्वे से यही पता चला है कि इस बार लोक सभा चुनाव 2014 में बनारस के मुसलमान मुख्तार को बॉय-बॉय कहने वाले हैं। यहां के मुसलमानों की पहली पसंद नरेंद्र मोदी ही बन चुके हैं।
क्या कर सकते हैं मुख्तार
यह हमारे देश का दुर्भाग्य ही है कि जेल में बैठा हुआ एक आदमी या फिर कोई गुंडा राजनीति की असली बागडोर थामता है। इसी तर्ज पर मुख्तार अंसारी भी काम करते हैं। वैसे तो ये जेल में हैं लेकिन बनारस की सीट से इन्होंने नहीं लड़ने का फैसला किया है। कौमी एकता दल ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि वो नरेंद्र मोदी को हराना चाहती है लेकिन प्रत्यक्ष रूप से नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से यानी कि किसी अन्य पार्टी को समर्थन देकर। यह कहना कतई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि यदि मुख्तार किसी पार्टी को समर्थन देते हैं तो उस पार्टी को एक मजबूती मिलेगी। पिछले वर्ष 2009 के लोक सभा चुनाव में मुख्तार को 27 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे।












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