Election Training UP: आगामी चुनावों के लिए अफसरों को संवैधानिक और तकनीकी नियमों की दी गई ट्रेनिंग
Election Training UP: चुनावों को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। वाराणसी कमिश्नरी सभागार में मंगलवार को 24 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने की।
प्रशिक्षण सत्र में मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मृतक, स्थानांतरित अथवा दोहरी प्रविष्टियों को सूची से हटाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की दिशा में सक्रियता दिखाई जाए।

चुनाव में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संविधान के भाग-15 में वर्णित छह प्रमुख अनुच्छेदों की विस्तार से जानकारी दी गई। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम 1960 के प्रावधानों पर विशेष चर्चा हुई। इन कानूनी आधारों की समझ अधिकारियों को गहराई से कराई गई।
तकनीकी टूल्स से होगी निगरानी और सुधार
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि ईआरओ नेट प्रणाली अब मतदाता सूचियों की निगरानी और अपडेट का प्रमुख माध्यम होगी। आधार क्यूआर कोड स्कैनिंग से अवैध प्रविष्टियों की पहचान और दोहराव रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
बीएलओ ऐप और वोटर सर्विस पोर्टल के उपयोग को अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। इन डिजिटल माध्यमों से मतदाता सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही, बीएलओ की जिम्मेदारियां पहले से कहीं अधिक व्यापक होंगी।
मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ेगी, सुविधाएं होंगी बेहतर
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता न हों, इसके लिए केंद्रों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। यह व्यवस्था मतदाताओं की सुविधा और सहज मतदान प्रक्रिया के लिए आवश्यक बताई गई।
मतदान केंद्रों पर पीने का पानी, पर्याप्त प्रकाश, साइनेज, शौचालय और दिव्यांगजनों के लिए रैंप जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। इन बिंदुओं की समीक्षा ज़िलास्तरीय निगरानी दलों द्वारा की जाएगी।
बीएलओ की भूमिका में आएगा विस्तार
बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की नियुक्ति अब पहले से ज्यादा नियमबद्ध और पारदर्शी ढंग से होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि एक व्यक्ति का नाम केवल एक ही स्थान की मतदाता सूची में होना चाहिए, इसे सुनिश्चित करना उनकी ज़िम्मेदारी है।
फॉर्म 6, 7, 8 और 8A जैसे विभिन्न आवेदन पत्रों के सत्यापन, नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया में बीएलओ की भूमिका निर्णायक मानी गई है। प्रशिक्षण में इस प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, भदोही, सोनभद्र, बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर समेत पूर्वांचल के कुल 24 जनपदों के डीएम शामिल हुए। इससे पहले मेरठ में पहले चरण में 15 जिलों के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।












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