Varanasi: दुल्हन के चेहरे पर मूंछें और दाढ़ी देख दूल्हे का ठनका माथा, पल भर में टूट गई 'बेमेल शादी'
एक अप्रैल की रात्रि में वाराणसी के राजेंद्र घाट पर महामूर्ख मेला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बेमेल शादी के अलावा हास्य कवियों ने अपनी कविताएं भी सुनाए।

Varanasi में 50 वर्षों से अधिक समय से महामूर्ख मेला का आयोजन किया जाता है। इस मेले में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं और गंगा नदी के किनारे स्थित घाट पर बैठकर लोग मेले का आनंद लेते हैं। वाराणसी में इस साल शनिवार की रात्रि में इस मेले का आयोजन किया गया। इस मेले में बेमेल विवाह की रस्म निभाई गई। मंत्रोचार के साथ संपन्न हुआ बेमेल विवाह मात्र कुछ क्षणों में ही टूट गया। उसके बाद देर रात्रि तक कवियों द्वारा अपनी प्रस्तुति दी जाती रही और लोग ठहाके लगाकर हंसते रहे।
विवाह का मंत्र सुनते ही हंसी नहीं रोक पाए दर्शक
काशी में हर साल एक अप्रैल की रात में आयोजित होने वाला यह मेला शनिवार को रात्रि में आयोजित हुआ। रात में इस आयोजन में दुल्हन का किरदार निभा रहे डॉक्टर एके पांडेय जब मंच पर पहुंचे तो दर्शक तालियां बजाते नजर आए। थोड़ी ही देर बाद दूल्हा बनी आशा पांडेय भी मंच पर पहुंचीं। दुल्हन और दूल्हा के पहुंच जाने के बाद इस बेमेल विवाह को कराने के लिए जिस मंत्र को पढ़ा गया उसे सुनकर भी दर्शक ठहाके लगाकर हंसते नजर आए। विवाह संपन्न कराने के लिए पहुंचे पुरोहित उज्जवल पांडेय ने 'अगड़म बगड़म जूता रगड़म, व्याह कराऊँ पकड़म धकड़म...' नामक मंत्र पढ़े। मंत्र पढ़ने के बाद किसी तरह यह बेमेल विवाह संपन्न हुआ।
दुल्हन की दाढ़ी मूछें देख नाराज हो गया दूल्हा
इस बेमेल विवाह में शादी की रस्म संपन्न हो जाने के बाद जैसे ही दूल्हे ने दुल्हन का घूंघट उठाया तो वह अवाक रह गया। दरअसल दुल्हन के चेहरे पर बड़ी-बड़ी दाढ़ी और मूछें थीं। ऐसे में दूल्हे ने उसे अपने साथ ले जाने से इंकार कर दिया और उसने कहा उसे यह शादी मंजूर नहीं है। बाद में काफी देर तक पंचायत हुई और इस पंचायत के दौरान भी दर्शक ठहाके लगाकर हंसते रहे। काफी देर तक पंचायत चलने के बाद भी जब दूल्हा दुल्हन को अपने साथ रखने से इंकार कर दिया तो दोनों की शादी टूट गई। शादी टूट जाने के बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया और इस दौरान भी हास्य रस की कविताओं पर मौजूद श्रोता देर रात तक हंसते रहे।
बुलडोजर से अपराधी माफिया बिल में घुस गए
आयोजित हुए इस कवि सम्मेलन में सांड बनारसी, दमदार बनारसी, श्याम लाल यादव उर्फ फक्कड़ गाजीपुरी, राजेंद्र मालवीय, विनीत पांडेय, मोहन मुंतजीर, बिहारी लाल अंबर सहित कई अन्य कवियों ने हास्य रस की कविताएं सुनाए। दमदार बनारसी ने अपनी कविता ' जिस दिन से राजनीति की महफिल में घुस गए, उस दिन से योगी जी सबके दिल में घुस गए। दो-चार लोगों के घर पर बुलडोजर क्या चला, अपराधी माफिया जैसे बिल में घुस गए।' का पाठ किया जिस पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई। इसके अलावा सांड बनारसी और फक्कड़ गाजीपुरी आदि कवियों ने भी बुलडोजर पर ही कविता सुनाए। इसके अलावा अन्य कवियों ने भी अपनी प्रस्तुति दी जिसे सुनकर श्रोता मध्य रात्रि तक ठहाके लगाकर हंसते रहे।
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