वाराणसी में Swami Prasad Maurya के वाहन पर फेंकी गई स्याही, दिखाए गए काले झंडे
वाराणसी से सोनभद्र जाते समय रविवार को वाराणसी में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा नेता द्वारा दिखाया गया काला झंडा और वाहन पर फेंकी गई स्याही।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव Swami Prasad Maurya रविवार को वाराणसी से सोनभद्र जा रहे थे। इसी दौरान भाजपा नेताओं द्वारा उनके गाड़ी पर स्याही फेंकी गई और उन्हें काले झंडे दिखाए गए। इस दौरान आक्रोशित नेताओं को काबू में करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं वाराणसी में शनिवार को रात्रि शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि लखनऊ का नाम लखन पासी के नाम पर रखा जाना चाहिए।

माला फूल लेकर खड़े थे भाजपा नेता
दरअसल स्वामी प्रसाद मौर्य शनिवार की रात्रि में वाराणसी पहुंचे थे और रविवार सुबह में वे वाराणसी से सोनभद्र जा रहे थे। स्वामी प्रसाद मौर्य का काफिला वाराणसी जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के टेंगरा मोड़ के समीप पहुंचा था उसी दौरान सड़क पर भाजपा नेता कुछ कार्यकर्ताओं के साथ माला को लेकर खड़े थे। देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हैं ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्या का काफिला उनके पास रुक गया। काफिला रुकने के बाद वहां पर मौजूद भाजपा नेता और कार्यकर्ता जय श्रीराम के नारे लगाने लगे। काफिले में शामिल लोग जब तक कुछ समझ पाते तब तक भाजपा नेताओं ने काला झंडा निकाल लिया और लहराने लगे।

वाहन पर स्याही और काला कपड़ा फेंक दिए
स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों और वहां पर मौजूद पुलिसकर्मियों को जब इसकी जानकारी लगी तो तुरंत वे वाहन बढ़ा दिए। इस दौरान भाजपा नेता दीपक सिंह राजवीर द्वारा स्वामी प्रसाद मौर्य की गाड़ी पर स्याही फेंकी गई और काला कपड़ा भी फेंका गया। स्वामी प्रसाद मौर्य की गाड़ी आगे बढ़ने लगी तो लोगों द्वारा जमकर नारेबाजी की गई इस दौरान भाजपा नेताओं को काबू में करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि काफिला गुजर जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। वह भाजपा नेता दीपक सिंह राजवीर का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस पर टिप्पणी करके बहुत ही गलत किया गया है। जब तक स्वामी प्रसाद मौर्य माफी नहीं मांगते हैं तब तक उनका विरोध किया जाता रहेगा।

लखनऊ नाम में आखिर क्या बुराई है
यह भी बता दें कि वाराणसी में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नाम लक्ष्मणपुर क्यों किया जाए आखिर लखनऊ नाम में बुराई क्या है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्मण कौन सी लड़ाई लड़ने आए थे और कहीं भी फ्रीडम फाइट में लक्ष्मण दिखाई दिए थे क्या? वहीं उन्होंने यह भी कहा कि लखनऊ गंगा जमुनी तहजीब का केंद्र है और हमारी संस्कृति विरासत है। जब कोई चुनाव नजदीक आता है तो भारतीय जनता पार्टी के लोग इसी तरह बेलगाम हो जाते हैं और अनाप-शनाप मांग करते रहते हैं।

लाखन पासी के नाम पर रखा जाए राजधानी का नाम
इसके अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा यह भी कहा गया कि यदि लखनऊ का नाम ही बदलना है तो लखनऊ के राजा लाखन पासी के नाम पर लखनऊ का नाम रखा जाना चाहिए। यदि लाखन पासी के नाम पर सरकार लखनऊ का नाम नहीं रखना चाहती तो पासी समाज की वीरांगना महिला उँदा देवी के नाम पर लखनऊ का नाम रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति में उँदा देवी ने 36 अंग्रेजी सैनिकों को मार गिराया था ऐसे में उनके नाम पर लखनऊ का नाम रखा जाना न्यायोचित होगा।

राष्ट्रीय संपत्ति को निजी हाथों में बेच रही सरकार
इसके अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा यह भी कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा राष्ट्रीय संपत्ति को निजी हाथों में बेचा जा रहा है। देश के बंदरगाह और एयरपोर्ट तक को बेच दिया गया। देश के किसान काफी परेशान हैं और नौजवानों को नौकरी नहीं मिल रही है तथा बढ़ती महंगाई ने महिलाओं की कमर तोड़ रखी है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी के माध्यम से व्यापारी वर्ग के लोगों से धन उगाही की जा रही है। आगे उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकारी संपत्ति को निजी हाथों में सौंप दिया गया है तो नौजवानों को सरकारी नौकरी कहां से मिलेगी।
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