Ganga vilas Cruise यात्रा में भारत की विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा -प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दुनिया की सबसे लंबी क्रूज यात्रा को वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। Ganga Vilas Cruise 32 पर्यटकों को लेकर वाराणसी से डिब्रूगढ़ के लिए प्रस्थान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दुनिया के सबसे लंबे रिवर क्रूज़ यात्रा को का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री द्वारा वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाने के बाद वाराणसी से 32 स्विस यात्रियों को लेकर Ganga vilas Cruise शुक्रवार को सुबह 11:20 बजे वाराणसी से डिब्रूगढ़ के लिए प्रस्थान किया। इस दौरान संत रविदास घाट पर मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कैबिनेट मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अन्य मंत्रियों और अधिकारियों ने हाथ हिलाते हुए क्रूज पर सवार पर्यटकों को उनकी यात्रा के लिए शुभकामना दी।

क्रूज में सभी के लिए कुछ न कुछ खास
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आध्यात्मिकता चाहने वालों को काशी, बोधगया, विक्रमशिला, पटना साहिब और माजुली जैसे गंतव्यों को देखने का अवसर मिलेग। एक बहुराष्ट्रीय क्रूज अनुभव की तलाश करने वाले पर्यटकों को बांग्लादेश में ढाका के माध्यम से जाने का अवसर मिलेगा। जो लोग भारत की प्राकृतिक विविधता को देखना चाहते हैं उन्हें सुंदरबन और असम के जंगलों को देखने का अवसर मिलेगा। प्रधान मंत्री ने कहा कि यह क्रूज का उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण महत्व है, जो भारत की नदी प्रणालियों को समझने में गहरी रुचि रखते हैं क्योंकि यह क्रूज 25 विभिन्न नदी धाराओं से होकर गुजरेगा। जो भारत के समृद्ध खानपान और व्यंजनों का अनुभव लेना चाहते हैं, उनके लिए भी यह बेहतरीन अवसर है। यानि भारत की विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम हमें इस क्रूज यात्रा में देखने को मिलेगा।
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देश के युवाओं के लिए पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि क्रूज टूरिज्म का यह नया दौर इस क्षेत्र में हमारे देश के युवा साथियों को रोजगार के नए अवसर भी देगा। विदेशी पर्यटकों के लिए तो यह आकर्षण होगा ही, देश के जो पर्यटक पहले ऐसे अनुभवों के लिए विदेश जाते थे उनको भी इस क्रूज के माध्यम से यात्रा करने का सुखद अनुभव प्राप्त होगा। विभिन्न देशों की यात्रा करने वाले भारतीय भी अब उत्तर भारत की ओर रुख कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि बजट के साथ-साथ लग्जरी अनुभव को ध्यान में रखते हुए क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश के अन्य अंतर्देशीय जलमार्गों में भी इसी तरह क्रूज संचालित किए जाने को लेकर तैयारियां चल रही हैं।

पर्यटन के एक मजबूत चरण में प्रवेश कर रहा भारत
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि भारत पर्यटन के एक मजबूत चरण में प्रवेश कर रहा है, क्योंकि बढ़ती वैश्विक प्रोफ़ाइल के साथ, भारत के बारे में जानने के लिए लोगों की उत्सुकता भी बढ़ रही है। पिछले 8 वर्षों में देश में पर्यटन क्षेत्र के विस्तार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। तीर्थ स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जा रहा है और काशी इसका जीता-जागता उदाहरण है। बेहतर सुविधाओं और काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बाद काशी में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आवागमन के चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी बढ़ावा मिला है। काशी में नवनिर्मित टेंट सिटी पर्यटकों को आधुनिकता, आध्यात्मिकता और आस्था का एक नया अनुभव प्रदान करेगी।

ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म ही नहीं उद्योग के नए अवसर भी पैदा होंगे
प्रधान मंत्री ने कहा कि आज के कार्यक्रम पूर्वी भारत को विकसित भारत के लिए एक विकास इंजन बनाने में मदद करेंगे। यह हल्दिया मल्टीमॉडल टर्मिनल को वाराणसी से जोड़ता है और भारत बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग और पूर्वोत्तर से भी जुड़ा हुआ है। यह कोलकाता बंदरगाह और बांग्लादेश को भी जोड़ता है। इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक व्यापार करने में आसानी होगी। प्रधान मंत्री ने बताया कि गुवाहाटी में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित किया गया है और जहाजों की मरम्मत के लिए गुवाहाटी में एक नई सुविधा का निर्माण भी किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि क्रूज शिप हो या कार्गो शिप, ये न सिर्फ ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनकी सर्विस से जुड़ा पूरा उद्योग भी नए अवसर पैदा करता है।

जल मार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों से ढाई गुना कम
प्रधान मंत्री ने बताया कि जलमार्ग न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं बल्कि इनमें खर्च भी कम लगता है। उन्होंने कहा कि जलमार्गों के संचालन की लागत सड़क मार्गों की तुलना में ढाई गुना कम है और रेलवे की तुलना में एक तिहाई कम है। प्रधान मंत्री ने कहा कि भारत में हजारों किलोमीटर के जलमार्ग नेटवर्क को विकसित करने की क्षमता है। भारत में 125 से अधिक नदियां और नदी धाराएं हैं, जिन्हें माल के परिवहन और लोगों को लाने-ले जाने के लिए विकसित किया जा सकता है, साथ ही बंदरगाह के नेतृत्व वाले विकास को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा सकता है।












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