वाराणसी: टिकट कटने पर फूट-फूटकर रोए सपा के पूर्व विधायक, कहा- धोखेबाज को पार्टी ने टिकट दिया
वाराणसी, 17 फरवरी। यूपी में विधानसभा का चुनाव चल रहा है। इसमें पार्टियां अपने प्रत्याशी को चुनाव लड़वाने के लिए टिकट दे भी रही है और काट भी रही है। इसी कड़ी में अब जबकि वाराणसी में सातवें चरण में मतदान होना है तो समाजवादी पार्टी ने शहर के उत्तरी विधानसभा से कारोबारी और पूर्व सपा नेता अशफाक अहमद डब्लू को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। लेकिन इस टिकट की लड़ाई में पिछड़ने पर सपा के ही पूर्व विधायक फूट- फूट कर रोये। हालांकि उन्होंने अपने आंसू छिपाने के लिए चश्मा पहना था लेकिन बोलते-बोलते भी रोते हुए अपने लोगों से अपील की। उनकी आंखों से इतने आंसू निकले कि रुमाल आंखों पर रखना पड़ा। सपा के नेता के रोने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।
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समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अब्दुल समद अंसारी ने रोते हुए कहा कि नेता के नाम पर तो बहुत लोग हैं, कैसे हम लोगों ने समाजवादी पार्टी की सेवा की, यह किसी से छुपा नहीं है। हम लोगों ने पूरी इमानदारी से गरीब मजलूम कौम की खिदमत की है और घर का गेट हमेशा खुला रहा। मगर आज मुझे इस बात की तकलीफ है कि समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जो फैसला लिया उससे मैं बहुत दुखी हूं। इसलिए मैं अपने कार्यकर्ताओं से यही अपील करूंगा हमारे समाज के हमारे कौम के जो बड़े बुजुर्ग लोग फैसला दें, उस पर लोग अमल करें। बड़े बुजुर्गों की बात मानना जरूरी होता है। जो समाजवादी पार्टी के मुखिया हैं उनकी भी बहुत सारी मजबूरी होगी इलेक्शन है। बहुत कठिन लड़ाई है, बहुत कठिन सामने वाला दुश्मन है, इसलिए बहुत तरीके का फैसला चला होगा। मगर जिस तरह हमारे इस उत्तरी विधानसभा में प्रत्याशी का चुनाव अप्रत्याशित तरीके से किया गया है। सबसे ज्यादा कष्टदायक यही है।
अब्दुल समद अंसारी ने कहा कि यहां पर 17-18 दावेदार लोग थे, अगर उन 17-18 लोगों में से भी किसी को टिकट दिया होता, तो यह तकलीफ नहीं होती। और जो प्रत्याशी आपके बीच आए हैं वह आपके हितैषी नहीं है, यह मैं आपको बताना चाहता हूं। मैं भी बहुत वक्त तक उनके साथ बिता चुका हूं। उन्होंने हमेशा एक - दूसरे को धोखा दिया है, अपने परिवार में धोखा दिया है, अपने सगे रिश्तेदारों को धोखा दिया और और उनकी एक पहचान है कि हमेशा बार-बार वह धोखा देते हैं, मौके -बे -मौके पार्टी बदलते हैं । और मेरे ऊपर इस बात का दबाव बनाया गया कि हम पार्टी बदल लें। हम जगह बदल लें। लेकिन हम लोग मुलायम सिंह यादव के सिपाही हैं। हम लोग अखिलेश यादव के सिपाही हैं। इसलिए हम लोग कोई जगह नहीं बदलेंगे। जहां है वहीं रहेंगे। अपने नेता का इंतजार करेंगे, इसलिए हम सब कार्यकर्ताओं से उम्मीद करते हैं कि हमारे कार्यकर्ता हमारे बड़े बुजुर्गों की बात मानेंगे।












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