Varanasi Airport पर नहीं दिखाई दे रहा Runway, हवा में चक्कर लगा रहे विमान

वाराणसी समेत पूर्वांचल को अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग से जोड़ने वाले वाराणसी एयरपोर्ट पर आईएलएस की क्षमता कम होने के चलते विमानों के लैंडिंग और टेकआफ में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

Varanasi Airport Flight

ठंड का सीजन प्रारंभ हो गया है और कोहरा पड़ने के चलते दृश्यता कम हो जाने पर विमान सेवाएं प्रभावित होने लगी है। Varanasi Airport पर भी कोहरे के चलते विमानों को डायवर्ट करने का सिलसिला शुरू हो गया है। सोमवार को वाराणसी एयरपोर्ट पर आने वाले तीन शेड्यूल विमानों को कोलकाता और लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि कोहरे के चलते दृश्यता कम हो जाने पर विमानों को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिली। ऐसी स्थिति में आसमान में चक्कर लगाने के बाद विमानों को दूसरे हवाई अड्डे पर डायवर्ट करना पड़ा।

डीजीसीए के अनुमति का इंतजार

डीजीसीए के अनुमति का इंतजार

दरअसल वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाल ही में इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की क्षमता बढ़ाई गई है। हालांकि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम अभी वर्क नहीं कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि डायरेक्टरेट जनरल आफ सिविल एविएशन को पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई है। डीजीसीए की अनुमति मिलने के बाद आईएलएस वर्क करना शुरू कर देगा। आईएलएस द्वारा कार्य प्रारंभ हो जाने के बाद वाराणसी एयरपोर्ट पर विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ में समस्या नहीं होगी।

विमानों के लैंडिंग और टेकऑफ में जरूरी है आईएलएस

विमानों के लैंडिंग और टेकऑफ में जरूरी है आईएलएस

दरअसल किसी भी हवाई अड्डे पर विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की मदद ली जाती है। एयरपोर्ट पर कार्यरत एयर ट्रैफिक कंट्रोल अर्थात एटीसी के अधिकारियों द्वारा एयरपोर्ट के ऑपरेशन क्षेत्र में लगाए गए इंस्ट्रूमेंट के आधार पर ही विमानों को उतरने और उड़ान भरने की अनुमति दी जाती है। कभी भी मौसम खराब होने या कोहरा वह किसी अन्य विषम परिस्थिति में इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम द्वारा मिली सूचनाओं के आधार पर ही एयर ट्रेफिक कंट्रोल द्वारा विमानों को उतरने से रोक दिया जाता है। वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अभी तक कैट वन प्रणाली का आईएलएस कार्य कर रहा है। ऐसे में एयरपोर्ट पर विमान उतरने के लिए 800 मीटर व उससे अधिक दृश्यता की आवश्यकता होती है। 800 मीटर से कम दृश्यता होने पर विमानों के लैंडिंग और टेकऑफ की अनुमति नहीं दी जाती है।

सोमवार को चार विमान हुए डायवर्ट

सोमवार को चार विमान हुए डायवर्ट

सोमवार को वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आने वाले 4 विमानों को डायवर्ट किया गया। डायवर्ट किए जाने वाले विमानों में 3 शेड्यूल विमान थे जबकि एक एयर एंबुलेंस था। एयर एंबुलेंस तथा एयर इंडिया के एक विमान को डायवर्ट कर लखनऊ भेजा गया इसके अलावा स्पाइसजेट एयरलाइंस का मुंबई से वाराणसी पहुंचा विमान एसजी 201 वाराणसी हवाई क्षेत्र से कोलकाता डायवर्ट कर दिया गया। इसी तरह एयर इंडिया का मुंबई से वाराणसी पहुंचा विमान एआई 695 को कोलकाता के लिए डायवर्ट किया गया। विमान डाइवर्ट किए जाने के चलते यात्रियों को काफी परेशान होना पड़ा। वही उपरोक्त तीनों विमानों से आने वाले यात्रियों के परिजन भी पहले से ही वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंच गए थे और काफी देर तक इंतजार करते रहे।

रनवे की भी बढ़ाई जानी है लंबाई

रनवे की भी बढ़ाई जानी है लंबाई

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वर्तमान समय में रनवे की लंबाई 2745 मीटर है। पिछले 5 सालों से रनवे की लंबाई बढ़ाए जाने को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए एयरपोर्ट से सटे गांव में भूमि अधिग्रहण किया जाना है, लेकिन कई बार सीमांकन की गई और फिर योजना ठंडे बस्ते में चली गई। अभी हाल ही में पिछले माह पिंडरा तहसील के राजस्व कर्मियों द्वारा पुनः एक बार सर्वे किया गया लेकिन अभी भी भूमि अधिग्रहण और रनवे की लंबाई बढ़ाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारी स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रनवे की लंबाई 17 सौ मीटर बढ़ाई जाएगी जिससे वाराणसी एयरपोर्ट पर बड़े विमानों की लैंडिंग भी आसानी से हो सकेगी। इसके अलावा रनवे की लंबाई बढ़ जाने के बाद इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम को भी इंस्टाल किया जाएगा और वह बृहद रूप से कार्य करना शुरू कर देगा।

बरसात और कोहरे के दिन में होती है सर्वाधिक समस्याएं

बरसात और कोहरे के दिन में होती है सर्वाधिक समस्याएं

एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम का क्षमता बढ़ाया जाना बहुत जरूरी है। अधिकारियों ने कहा कि बरसात और कोहरे के दिनों में दृश्यता कम हो जाती है जिसके चलते विमानों को वाराणसी एयरपोर्ट पर लैंडिंग और टेक ऑफ की अनुमति नहीं दी जाती है। ऐसे में वाराणसी एयरपोर्ट पर कम दृश्यता में भी विमानों की लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की क्षमता को बढ़ाया जाना बहुत आवश्यक है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम लगाया जा रहे हैं, ऐसे में यदि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो जाए तो वाराणसी एयरपोर्ट पर भी अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम से जुड़े उपकरण स्थापित किए जाएंगे।

जानिए आईएलएस इसकी कैटेगरी और उसकी क्षमता

जानिए आईएलएस इसकी कैटेगरी और उसकी क्षमता

कैट वन प्रणाली में दृष्यता 800 मीटर व उससे अधिक होनी चाहिए
कैट सेकेण्ड प्रणाली में दृष्यता 300 मीटर व उससे अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री ए प्रणाली में दृष्यता 180 मीटर व उससे अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री बी प्रणाली में दृष्यता 46 मीटर व उससे अधिक होनी चाहिए
कैट थ्री सी प्रणाली में 0 दृष्यता पर भी विमानों की लैडिंग व टेकआफ आसानी से होती है।

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