सरकार किसानों की आय बढ़ाने को लेकर गंभीर है और उन्हें योजना के माध्यम से लाभ दिया जा रहा है -सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को वाराणसी पहुंचे। वाराणसी एयरपोर्ट से वे बीएचयू प्रस्थान किए और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी आयोजित सुफलाम कार्यक्रम में शमिल लोगों को संबोधित किए। इसके बाद टेंट सिटी का भी निरीक्षण किए।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने एक दिवसीय वाराणसी दौरे पर बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सुफलाम के दूसरे दिन रविवार को तकनीकी सत्र के बाद जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने किसानों से कहा कि वे गौ आधारित प्राकृतिक खेती की ओर लौटें, धरती माता के साथ खिलवाड़ गलत हैं। उन्होंने किसानों से गौ आधारित प्राकृतिक खेती करने की अपील की।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार गंभीर है और किसानों को योजनाओं के जरिए लाभ दिया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन से हो रहे खतरे को देखते हुए अब समय की मांग है कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती पर जोर दिया जाए। किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान धरती और जल का ही हुआ है। धरती माता के साथ खिलवाड़ गलत है। जो हर हाल में बंद होना चाहिए। इसके लिए यह जरूरी है कि केमिकल युक्त खेती की जगह गौ आधारित प्राकृतिक खेती की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में गंगा किनारे के जिलों में प्राकृतिक खेती को बढावा दिया जाएगा। इसके लिए प्राकृतिक परिषद का गठन किया गया है। खुद के विकास के लिए लोग पर्यावरण को जहरीला बनाते जा रहे हैं। जीवन का अस्तित्व पांच तत्वों क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा से ही है। इसे अब बचाने की जरूरत है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अगले एक वर्ष तक भारत जी-20 देशों का नेतृत्व करके दुनिया को नया मार्गदर्शन देगा। यह भारत के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ में 24 करोड़ श्रद्धालु आए थे और दुनिया के सामने सुरक्षा, सुव्यवस्था व स्वच्छता का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत हुआ था। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव का वर्ष है। भारत में बहुत सारी उपलब्धियां हासिल की है। जब अमृत महोत्सव की वर्ष की आहट हुई थी, तब दुनिया में कोरोना वायरस की भी आहट सुनाई दे रही थी। दुनिया उसके आगे पस्त थी। दुनिया में कोरोना जैसे महामारी में पूरी तरह पस्त हो चुकी थी। लेकिन भारत लोकतांत्रिक मूल आदर्श के सम्मान करते हुए अपने 140 करोड़ की आबादी को न केवल सुरक्षा कवच के रूप में बल्कि स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर रही थी। यह नए भारत की नई तस्वीर प्रस्तुत करती है।

आज चीन कोरोना वायरस के चपेट में है। मंदी के कगार पर है। चीन ने जो कोरोना वैक्सीन बनाई थी वह फेल हो गई। भारत में दो कोरोना वैक्सीन उस समय बनी थी। जिसका दुनिया के सबसे प्रभावी वैक्सीन में गिनती होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस ब्रिटेन ने हम पर 200 वर्षों तक शासन किया था, आज उसी ब्रिटेन को पछाड़कर भारत दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था बना है। यह वर्ष हम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर से लेकर 30 नवंबर 2023 तक भारत के पास दुनिया के 20 उन बड़े देशों के नीति बनाने का अवसर प्राप्त हुआ है। जी-20 का नेतृत्व भारत कर रहा है। भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न केवल नेतृत्व करेगा, बल्कि दुनिया को एक नया मार्गदर्शन देगा।

इसमें भूमि और सतत विकास, भूमि उपयोग, प्रबंधन और कानून, भूमि और स्वास्थ्य, भूमि एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य, खेती की पद्धति में बदलाव और उसके परिणाम के साथ ही भूस्खलन, खनन पर मंथन हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भैया जी जोशी ने भारतीय चिंतन को विज्ञान के रूप में रखते हुए जन सामान्य को पंच भूतों के प्रति श्रद्धा भाव रखने की परंपरा को विकसित करने की संकल्पना को धरातल पर लाने की बात कही। साथ ही उनका यह भी कहना था कि संपूर्ण विश्व अभी भी भ्रमित हो दोराहे पर खड़ा है l पहला रास्ता आधुनिक विकास का है और दूसरा रास्ता मूलभूत जाने से समझौता न करते हुए विकास के मार्ग पर चलने का है l श्री जोशी ने कहा कि केवल पृथ्वी पर ही जड़ चेतन का अस्तित्व है, केवल भारतीय परिप्रेक्ष्य में ही सुजलाम सुफलाम शब्द का प्रयोग हुआ है।

भारत का मानस बंद दरवाजों का नहीं है हम दुनिया भर के विचारों का स्वागत करते है,
मगर वह विचार जीव जगत के लिए हितकारी होना चाहिए वर्तमान में नए तंत्र से हम दूसरों को भी अन्न देने में सक्षम हुए हैं, मगर दूसरी और भूमि के पोषण का प्रश्न भी हमारे सामने खड़ा हुआ है। भैया जी ने यह भी कहा कि हम आधुनिकता के पक्षधर हैं मगर मर्यादाओं का पालन करने वाले हैं, भारत जो विचार दुनिया को दे रहा है उन विचारों का जीता जागता नमूना भी दिखाई पड़ना चाहिए ,हमे संघर्ष नहीं बल्कि समन्वय के मार्ग से पृथ्वी की समस्याओं का समाधान करना है। दुनिया को मध्य मार्ग इसे सुवर्ण मध्य कहा गया है ऐसे मार्ग पर चलाने वाला भारत हो ऐसा विश्वास है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत सरकार के कृषि मंत्री माननीय नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन की चर्चा जोरों से है ,इसके लिए मानव जाति ही जिम्मेदार है ऐसे परिस्थिति में किसी न किसी को आगे आकर सुधार करना ही होगा, भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों पर आधारित है, पूर्वजों के इस ज्ञान को और अधिक शक्ति प्रदान करने की आवश्यकता है।भारत में 12 स्थानों पर सुफलाम का सफल आयोजन हो चुका है, वर्तमान समय में प्रधानमंत्री भी पंच भूतों के संरक्षण हेतु भारत अथवा दुनिया के हर राजनीतिक मंच पर भारतीय ज्ञान को रख रहे हैं, यह अच्छी बात है कि उत्पादन के संदर्भ में कई क्षेत्रों में भारत नंबर एक पर है, परंतु फिर भी हमें सरकार और समाज के साथ मिलकर पृथ्वी पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को रोकने के संदर्भ में काम करना होगा।

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    प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान प्राकृतिक खेती पर है जिस प्रकार दुनिया के राजनीतिक मंच पर योग को स्थापित किया गया और दुनिया ने उसे स्वीकार किया इसी प्रकार से मोटे अनाज को भी मान्यता मिली है। वर्ष 2023 संयुक्त राष्ट्र संघ ने मोटे अनाज का वर्ष घोषित किया है।वर्तमान में जी-20 की अध्यक्षता भी भारत के पास है यह प्रसन्नता का विषय है आने वाले वर्षों में वन अर्थ वन फैमिली वन फ्यूचर पर विमर्श होगा। सत्पथाचार्य जगतगुरु ज्ञानेश्वर महाराज जी ने कहा कि वैदिक परम्परों में पांच तत्वों को महत्व दिया गया है, भूमि को माता कहा गया है, क्योंकि वो सबकी पोषक है दूसरी हमारी गौ माता है। यदि हम भू-माता और गौमाता की रक्षा नही करेंगे तो तमाम समस्याएं प्रकट होती रहेंगी। भूमि-पुत्र किसान, भूमि से जुड़ा रहता है; भूमि ही उसकी अन्नदाता है। इसीलिए हम भूमि के पांच तत्वों काकी समस्या को कम किया जा सकता है।

    कार्यक्रम की विषय स्थापना भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा जी ने किया। ज्ञानेश्वर दास जी महाराज, अध्यक्षता बीएचयू के कुलगुरु प्रोफेसर वी के शुक्ला ने की।कार्यक्रम का संचालन भाऊराव देवरस न्यास के राहुल जी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कृषि विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर राकेश सिंह ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही जी भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी जी प्रख्यात उद्योगपति मनोज भाई सोलंकी जी,भाउराव देवरस न्यास के ओम प्रकाश गोयल जी कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर यशवंत सिंह जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख अजीत प्रसाद महापात्रा जी, क्षेत्र कार्यवाह वीरेंद्र जायसवाल जी, समग्र ग्राम विकास के चंद्र मोहन जी सहित बड़ी संख्या में प्रोफेसर एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस दौरान वैदिक ब्राह्मणों ने स्वस्तिवाचन और मंगलाचरण प्रस्तुत किया।

    त्पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविदास पार्क में रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके बाद वे यहीं से क्रूज़ द्वारा गंगा उस पार रेती में बनाये जा रहे टेंट सिटी का निरीक्षण कर मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लेने के पश्चात नगर निगम द्वारा स्थापित रैन बसेरा का भी स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने वहां रह रहे लोगों से उनका कुशलक्षेम पूछते हुए रैन बसेरा में किसी भी प्रकार की कमी न होने की भी बात पूछी। लोगों ने रैन बसेरा के व्यवस्था पर मुख्यमंत्री से संतोष जताया। मौके पर मौजूद अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देशित करते हुए कहा कि ठंड के मौसम में कोई भी व्यक्ति खुले में न सोने पाए। रैन बसेरों में बिस्तर एवं कंबल आदि का समुचित व्यवस्था होने के साथ ही शौचालय एवं साफ सफाई का समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराया जाए। रैन बसेरों में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

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