Bakrid 2025: शांति और सम्मान से मनाएं त्योहार, शंकराचार्य की धार्मिक भावनाओं को लेकर चेतावनी
Bakrid 2025: बकरीद से पहले काशी में धार्मिक तनाव की आहट महसूस की जा रही है। कुर्बानी को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पशु की कुर्बानी को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर हिंदू समाज को उकसाने के लिए गौवंश की बलि देते हैं। शंकराचार्य ने इसे सनातन परंपरा पर हमला बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेताया कि अगर इस पर रोक नहीं लगी, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

पातालपुरी मठ में धर्माचार्यों और विद्वानों की बैठक बुलाई गई, जिसमें इस विषय पर खुलकर चर्चा हुई। बैठक की शुरुआत हनुमान चालीसा के पाठ से हुई, इसके बाद वक्ताओं ने त्योहार के दौरान खुले में जानवरों की बलि दिए जाने को अनुचित और समाज विरोधी बताया।
धार्मिक आस्था और पर्यावरण पर खतरे की आशंका
बैठक में जगद्गुरु बालकादेवाचार्य ने कहा कि वाराणसी केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था की नगरी है। यहां गंगा सहित कई पवित्र नदियों का प्रवाह है। यदि त्योहार के नाम पर यहां जानवरों की खुलेआम कुर्बानी दी गई, तो इससे न सिर्फ धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचेगी, बल्कि जल प्रदूषण और पर्यावरण पर भी विपरीत असर होगा।
उन्होंने कहा कि काशी की पवित्रता को बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की पशु बलि का विरोध जरूरी है। संतों ने कहा कि यह केवल हिंदू समाज की नहीं, बल्कि समूचे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है कि किसी की धार्मिक भावना आहत न हो।
बकरीद मनाएं, लेकिन कानून के दायरे में रहें
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इस मुद्दे पर संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने समुदाय से कहा है कि वे त्योहार को परंपरा के अनुसार मनाएं, लेकिन संविधान और कानून का पालन करते हुए। कुर्बानी आदि को सार्वजनिक रूप से न किया जाए, जिससे किसी की भावनाएं आहत न हों।
धर्मगुरुओं ने यह भी स्पष्ट किया कि इस्लाम किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से भी आग्रह किया कि त्योहार के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
कुर्बानी पर मक्का-मदीना में भी पाबंदी का हवाला
बैठक में बीएचयू के इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि मक्का और मदीना जैसे इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों पर भी कुर्बानी को लेकर सख्त नियम हैं। मक्का के आठ किलोमीटर के दायरे में पशु बलि की अनुमति नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर यह प्रतिबंध है, तो वाराणसी जैसी धर्मनगरी में भी सार्वजनिक रूप से कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन को स्थायी समाधान की ओर कदम उठाना चाहिए ताकि हर साल इस तरह का तनाव न हो।
बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि किसी भी प्रकार की पशु बलि सार्वजनिक स्थानों पर नहीं होनी चाहिए। धर्माचार्यों ने प्रशासन से अपील की कि वह पहले से तैयारी करे और ऐसे मामलों पर सख्ती से नजर रखे।












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