धार्मिक मुद्दों को उठाने से क्या चुनाव में भाजपा को मिलेगा राजनीतिक लाभ, समझिए पूरा गणित

हरीश रावत की फोटो से छेड़छाड़ का विवाद

देहरादून, 7 फरवरी। उत्तराखंड में चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे सियासी दल एक दूसरे पर हमलावर हो रहे हैं। चुनाव में प्रमुख मुद्दों को छोड़कर सियासी दल अब तुष्टीकरण और धार्मिक मुद्दों को लेकर आमने सामने हैं। हालांकि ऐसे में सवाल ये उठता है, कि इन मुद्दों से किस सियासी दल को कितना फायदा होगा। खासकर भाजपा जो कि इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है।

मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बयान के बाद हुआ विवाद

मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बयान के बाद हुआ विवाद

उत्तराखंड में चुनाव के दौरान भाजपा ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर जमकर राजनीति की है। कांग्रेस के एक नेता के उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मांग पर किए गए दावे के बाद भाजपा ने सोशल मीडिया पर जमकर हरीश रावत और कांग्रेस पर निशाना साधा। जिसके बाद राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। मुद्दे पर बवाल बढ़ता देख मामला निर्वाचन आयोग तक पहुंच गया। जिसके बाद भाजपा बैकफुट पर भी नजर आ रही है। बवाल तब बढ़ा जब पूर्व सीएम हरीश रावत के एक चित्र के साथ छेड़छाड़ कर उसे खूब प्रसारित किया गया। इसके जवाब में पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया में एक वीडियो अपलोड कर भाजपा को विकास के मुद्दों पर खेल खेलने की चुनौती दी है। हरीश रावत इस दौरान घर पर ग्रीन मैट बिछाकर हाथ में क्रिकेट बल्ला थामे भाजपा को मुद्दों का खेल खेलने की चुनौती दे रहे हैं। हरीश रावत ने कहा कि मुस्लिम यूनिवर्सिटी और मेरी दाढ़ी वाली फोटो प्रसारित कर भाजपा क्या साबित करना चाहती है। उसे चुनाव के समय हमेशा हिंदू-मुस्लिम ही क्यों याद आता है।

भाजपा, कांग्रेस आमने-सामने

भाजपा, कांग्रेस आमने-सामने

मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़ी वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस को घेरना शुरू किया। भाजपा की ओर से सोशल मीडिया में हरीश रावत की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर वायरल किया गया। इसके बाद हरीश रावत को निशाना बनाते हुए ट्वीट किया गया। पूरे मामले की शिकायत आने के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया। आयोग ने ट्वीट को उत्तेजक और गंभीरता से भावनाओं को भड़काने वाला करार दिया।
इसके बाद आयोग ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को नोटिस जारी किया है, जिसमें 24 घंटे के भीतर उनसे जवाब मांगा गया। जो कि अब सोशल मीडिया से भाजपा ने हटा लिया है। माना जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने इस तस्वीर को हटा दिया।

हरदा ने भाजपा को दी विकास के नाम पर खेल खेलने की

हरदा ने भाजपा को दी विकास के नाम पर खेल खेलने की

हरीश रावत ने वीडियो जारी कर ​कहा कि भाजपाइयों और भाजपा नेताओं मुझसे बहुत खेल रहे हो। क्या तुम्हारे पास रोजगार-रोजगार जैसा कोई खेल नहीं? अगर हमारे साथ खेल ही खेलना है तो रोजगार, महंगाई और विकास के मुद्दे पर खेल खेलो? हम आपको बताएंगे अपने शासनकाल में हमने कैसे महंगाई को कंट्रोल में रखा, कैसे लोगों की पेंशन लगवाई और कैसे किसानों और गरीबों के लिए योजनाएं चलाईं। आपने पिछले पांच सालों में कुछ नहीं किया। शिक्षा को चौपट कर दिया तो स्वास्थ्य व्यवस्था को गर्त में पहुंचा दिया।
हरीश रावत ने चेतावनी दी कि अगर हिम्मत है तो विकास कार्यों का खेल खेलो और बराबरी करके दिखाओ। उन्होंने कहा कि भाजपाइयों को समझ लेना चाहिए कि उनके ऊपर उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोले जाने की पैरवी का झूठा इल्जाम लगाने से उनकी पार्टी का भला होने वाला नहीं है। उनकी फोटो पर दाढ़ी लगाकर भाजपा के लोग अपने मानसिक दिवालियापन को प्रदर्शित कर रहे हैं।

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    भाजपा की नजर हिंदू वोटर पर

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    उत्तराखंड में 2022 का चुनाव हरीश रावत के लिए आखिरी चुनाव माना जा रहा है। हरीश रावत ने शुरूआत से ही इस बार हिंदुत्व के मुद्दों पर अपना खुलकर पक्ष रखा है। पहले प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का गणेश अवतार और श्री गणेश का नारा देना उसके बाद चारधाम पर जमकर भाजपा को कोसना आदि। इस बार कांग्रेस हिंदुत्व के मुद्दें पर ज्यादा हमलावर नजर आ रही है। ऐसे में भाजपा को एक मुद्दा मुस्लिम यूनिवर्सिटी के रूप में मिला है। जिसमें कांग्रेस के उपाध्यक्ष ने दावा किया कि वे इस लिए नाम वापिस ले रहे हैं, उनके सीनियर नेताओं खासकर हरीश रावत का नाम लिया कि चुनाव जीतने के बाद मुस्लिम यूनिवर्सिटी उत्तराखंड में खोलने पर काम ​होगा। इस बयान के बाद भाजपा ने मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बना दिया। लेकिन इस मुद्दे से चुनावी मुद्दे कहीं खो से गए हैं। भाजपा उत्तराखंड में हिंदू वोटर को अपने पक्ष में करने के लिए इस रणनीति पर काम कर रही है। राज्य की कुल आबादी में से करीब 83 फीसदी परसेंट हिंदू हैं और करीब 14 परसेंट फीसदी मुस्लिम। साफ है कि हिंदुओं की संख्या 83.6 लाख से ज़्यादा है और मुस्लिमों की 14 लाख से ज़्यादा और 2.34 प्रतिशत सिखों की आबादी करीब ढाई लाख की है।

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