उत्तराखंड के मुख्यमंत्री क्यों हुए भावुक, कहना पड़ा- 'मैं कहीं रहूं मेरी आत्मा हमेशा आप के साथ है'

खटीमा से चुनाव लड़ने की बात पर भावुक हुए धामी

देहरादून, 5 जनवरी। उत्तराखंड में जैसे-जैसे विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे प्रत्याशियों को लेकर भी कयासबाजी शुरू हो चुकी है। भाजपा हो या कांग्रेस दोनों दलों के बड़े चेहरों के चुनाव लड़ने को लेकर सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कांग्रेस में जहां पूर्व सीएम हरीश रावत के चुनाव न लड़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस बार विधानसभा सीट बदलने की चर्चा तेज हो गई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विजय संकल्प यात्रा के समापन पर खटीमा में संबोधित करते हुए सार्वजनिक मंच से भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि उनके खटीमा से चुनाव लड़ने को लेकर लोग सवाल कर रहे हैं। इस दौरान वे काफी भावुक भी नजर आए।

दो बार के खटीमा से विधायक हैं धामी

दो बार के खटीमा से विधायक हैं धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव लड़ने को लेकर आ रही खबरों के बीच मुख्यमंत्री ने खटीमा में मंगलवार को सार्वजनिक मंच से अपने शब्दों से बड़ा संकेत दिया है। इस दौरान मुख्यमंत्री भावुक भी नजर आए। मंच पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी की ओर देखते हुए उन्होंने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं कि इस बार खटीमा से चुनाव लड़ेंगे। धामी ने ​नितिग गड़करी की ओर देखकर कहा कि 2012 में आपने ही खटीमा से टिकट दिया था। आगे सीएम ने कहा कि

मैं कहीं रहूं मेरी आत्मा हमेशा आप के साथ है। आपके सबके दिल में, आप सब मेरे दिल में रहोगे। में सशरीर आप लोगों के बीच में न रहूं मेरी आत्मा और मेरा मन दिल दिमाग खटीमा में ही रहेगा। आप से नाता आजीवन रहेगा।

मुख्यमंत्री रहते अब तक चुनाव हारे दिग्गज

मुख्यमंत्री रहते अब तक चुनाव हारे दिग्गज

उत्तराखंड के इतिहास में कई तरह के मिथक जुड़े हैं। 2002 से अब तक 4 बार विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं। 2002 में कांग्रेस के एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2007 में भाजपा के बीसी खंडूडी, 2012 में कांग्रेस के विजय बहुगुणा और 2017 में भाजपा के त्रिवेंद्र सिंह रावत सीएम बने। 2012 में बीसी खंडूडी के नेतृत्व में भाजपा ने चुनाव लड़ा तो वे बतौर मुख्यमंत्री भी कोटद्वार से चुनाव हार गए। इसके बाद 2017 में हरीश रावत मुख्यमंत्री रहते हुए दो-दो विधानसभा किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव हार गए। अब 2022 में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा चुनाव लड़ रही है। पहला तो मुख्यमंत्रियों का चुनाव हारना और दूसरा किसी भी पार्टी की सरकार की वापसी न होना। इस तरह के मिथक पुष्कर सिंह धामी के विपक्ष में जा रहे हैं। ऐसे में धामी की नजर सबसे सु​रक्षित सीट पर बनी हुई है।

डीडीहाट हो सकता है दूसरा विकल्प

डीडीहाट हो सकता है दूसरा विकल्प

धामी की वर्तमान सीट खटीमा है। जहां से विपक्ष ही नहीं भाजपा का नाराज खेमा भी धामी के खिलाफ चक्रव्यूह रचने में जुटे हैं। ​कांग्रेस की और से ​खटीमा में कार्यकारी अध्यक्ष भुवन कापड़ी पिछले चुनाव की तुलना में काफी मजबूत नजर आ रहे हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी (आप) की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष रहे एस एस कलेर भी मुख्यमंत्री के खिलाफ खटीमा से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। अब भाजपा के नाराज खेमे की। हर बार की तरह इस बार भी भाजपा का एक ऐसा खेमा है। जो कि मुख्यमंत्री जहां से चुनाव लड़ेंगे वहीं से धामी के खिलाफ चक्रव्यूह रचने की तैयारी में हैं। जिससे चुनाव बाद अगर सरकार आती है तो मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा हो सके। ऐसे में पुष्कर सिंह धामी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अब बात धामी के लिए दूसरी विधानसभा सीट की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जन्म पिथौरागढ़ के कनालीछीना में हुआ। ऐसे में मुख्यमंत्री का डीडीहाट विधानसभा से भी संबंध है। सीएम धामी के लिए डीडीहाट क्षेत्र को भी सुरक्षित माना जा रहा है। लेकिन इस सीट पर भाजपा के ​पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, वर्तमान में धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री विशन सिंह चुफाल विधायक हैं। जिनका टिकट काटना आसान नहीं होगा। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या पार्टी धामी को खटीमा से ही मैदान में उतारेगी या फिर दूसरी सुरक्षित सीट पर भेजकर नया दांव खेलती है।

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