क्या है उत्तराखंड का स्टिंग प्रकरण, जिसने बढ़ा दी पूर्व सीएम हरीश रावत और हरक सिंह रावत की मुश्किलें
वर्ष 2016 में उत्तराखंड की सियासत में भूचाल लाने वाला स्टिंग आपरेशन प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। जिससे पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता हरीश रावत के साथ ही हरक सिंह रावत मुश्किलों में पड़ सकते हैं।
वर्ष 2016 में उत्तराखंड की सियासत में भूचाल लाने वाला स्टिंग आपरेशन प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। जिससे पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता हरीश रावत के साथ ही हरक सिंह रावत मुश्किलों में पड़ सकते हैं। ये प्रकरण सीबीआइ कोर्ट में चल रहा है। सीबीआई ने स्टिंग प्रकरण में पूर्व सीएम हरीश रावत, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, विधायक उमेश कुमार को वॉइस सैंपल देने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक स्टिंग सामने आया था। इसमें मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी सरकार को बचाने के लिए विधायकों का मोल भाव करते दिखाए गए थे। जिसके बाद इस पूरे मामले को लेकर हाईवोल्टेज ड्रामा भी हुआ। 2016 स्टिंग प्रकरण मामले में सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को नोटिस भेजने के निर्देश दिए हैं।
जबकि विधायक उमेश कुमार और मदन बिष्ट को संवैधानिक प्रकियाओं का पालन करते हुए नोटिस जारी करने को कहा है। वॉयस सेंपल कब और कहां लिए जाएंगे, इसके लिए अलग से नोटिस भेजा जाएगा। दूसरी ओर इस मामले में 27 जुलाई को उच्च न्यायालय का फैसला आना है। जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। वॉइस सैंपल को लेकर बीते दिनों सीबीआई ने चारों नेताओं को नोटिस जारी किया था। 15 जुलाई को उनके अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया था कि यह मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। इसलिए उच्च न्यायालय के निर्णय आने के बाद ही इस पर सुनवाई की जानी चाहिए।
वर्ष 2016 में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार में कुछ विधायकों ने बगावत कर दी थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक स्टिंग सामने आया था। इसमें मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी सरकार को बचाने के लिए विधायकों का मोल भाव करते दिखाए गए थे। एक अन्य स्टिंग में कांग्रेस के तत्कालीन विधायक मदन सिंह बिष्ट के होने का दावा किया गया।
इस स्टिंग में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के भी शामिल होने की बात कही गई। दावा किया गया कि इन दोनों के स्टिंगकर्ता उमेश कुमार हैं। उमेश कुमार अब खानपुर से विधायक हैं। इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गई। स्टिंग में जो आवाजें हैं उनके मिलान के लिए वायस सैंपल लेने की अनुमति सीबीआइ ने अदालत से मांगी थी।












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