Tunnel Rescue: अमेरिकी मशीन के फंसने के बाद काम आई Rat Hole Mining तकनीक, NGT ने किया था बैन
Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तरकाशी के सिल्क्यारा-बारकोट सुरंग में 17 दिनों से फंसे मजूदरों की सुरक्षित घर वापसी हो गई है। 41 मजदूर टनल निर्माण के दौरान हुए हादसे में फंस गए थे, जिनको लंबे संघर्ष के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया। सभी लोग स्वस्थ्य है।
दरअसल, 12 दिसंबर को हुए हादसे के बाद मजदूरों को बचाने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया। सबसे पहले उनसे बात करने की कोशिश करते हुए उन तक पहुंच बनाई और फिर अमेरिकी ऑर्गन मशीन के जरिए खुदाई करके मजदूरों को रेस्क्यू करने का प्लान किया गया, जिसमें कई बार मुसीबत आईं।

टनल निर्माण के दौरान जहां मजदूर फंसे थे, उसकी दूरी 60 मीटर थी। ऐसे में ऑर्गन मशीन से खुदाई की जा रही थी। सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन ऐनवक्त पर 48 मीटर के पास मशीन फंसे गई, जिसे काटकर निकाला गया।
रैट होल माइनिंग सहारा
विदेशी मशीन के फंसने के बाद रेस्क्यू टीम ने रैट होल माइनिंग (Rat Hole Mining) का सहारा लिया। इसमें रैट माइनर टीमों ने अपना काम वहां से मैन्युअल ड्रिलिंग के तौर पर शुरू किया, जहां से ऑर्गन मशीन ने छोड़ा था। रैट माइनर्स ने अपनी इस तकनीक से मजदूरों तक पहुंच बनाई।
रैट माइनर्स ने संभाला मोर्चा
मशीन के खराब होने के बाद पहले उसके हिस्से काटकर जगह खाली गई। इसके बाद रैट माइनर्स ने मैन्युअल खुदाई शुरू की। इस काम में रैट माइनर्स की दो टीमों को काम पर लगाया गया था।
क्या है रैट-होल माइनर तकनीक?
सुरंग में मजदूरों को बचाने के लिए हॉरिजेंटल खुदाई मैन्युअल तकनीक से की जा रही है। इस विधि में सुरंग बनाने में स्पेशल स्किल रखने वाले लोगों को चुना गया है। इसे रैट-होल माइनर तकनीक कहा जाता है। रैट-होल माइनिंग कोयला निकालने में की जाती है। रैट माइनर्स हॉरिजेंटल सुरंगों में सैकड़ों फीट नीचे उतरकर खुदाई करते हैं। हालांकि यह बहुत जानलेना भी हो सकता है।
NGT ने किया था बैन
आपको बता दें कि मेघालय में कोयला निकालने के लिए खासतौर से इस विधि का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मजदूरों की सुरक्षा के मद्देनजर इसे बैन कर दिया था। हालांकि अब यह तकनीक 41 लोगों की जिंदगी बचाने में सबसे ज्यादा सफल रही है।












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