Uttrakhand : बागियों से हरीश रावत को क्या है डर, क्यों घर वापसी से पहले रखी ये अहम शर्त, जानिए
कांग्रेस में घर वापसी से पहले माफी मांगने की रखी शर्त
देहरादून, 13 अक्टूबर। उत्तराखंड में पाला बदलने का खेल चुनाव आते ही चरम पर पहुंच गया है। भाजपा ने तीन विधायकों को अपने पाले में लाकर खेल की शुरूआत की तो कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव आर्य विधायक को एक साथ अपने पाले में लाकर भाजपा को तगड़ा झटका दे दिया। अब एक बार फिर बागियों की घर वापसी को लेकर चर्चांए तेज हो गई है। fहालांकि यशपाल की घर वापसी के बाद कांग्रेस के सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं। कांग्रेस चुनाव अभियान प्रमुख हरीश रावत ने अब बागियों की घर वापसी के लिए शर्त रख दी है। जिससे कांग्रेस में आने की सोच रहे विधायकों को मुश्किल हो सकती है। जो कि चुनाव से पहले कांग्रेस का हाथ थामने की सोच रहे हैं।

कांग्रेस के बदले सुर
भाजपा में चुनाव से पहले असहज महसूस कर रहे विधायकों और नेताओं की घर वापसी को लेकर कांग्रेस के तेवर अब बदले हुए नजर आ रहे हैं। बागियों को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत भी अब सशर्त घर वापसी की बात कर रहे हैं। हरीश रावत ने ऐसे विधायकों को महापापी कहा है, जिन्होंने उनकी सरकार गिराने के लिए बगावत की थी। हरीश ने कहा कि यह लोग जब तक सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, उनके रहते कांग्रेस में इनकी एंट्री नहीं हो सकती। हरीश रावत ने ऐसे नेताओं के टिकट को लेकर भी बिना शर्त के आने की बात की है। साफ है कि हरीश रावत बागियों की एंट्री को लेकर अड़ंगा कर सकते हैं।
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कहीं अपने भविष्य को लेकर तो नहीं चिंता
राजनीति के जानकार मानते हैं कि हरीश रावत बागियों के घर वापसी को लेकर अपने राजनैतिक भविष्य को लेकर भी डरे हुए हैं। बागियों के आने के बाद कांग्रेस की सरकार आने की स्थिति में हरीश रावत का सीएम बनने के सपने पर अडंगा लग सकता है। इस समय कांग्रेस में हरीश रावत और प्रीतम सिंह दो ही कद्दावर नेता है। जो कि सरकार आने की स्थिति में सीएम के प्रबल दावेदार होंगे। बागियों के आने के बाद प्रीतम का कद भी बढ़ सकता है। और बागी भी हरीश रावत पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में हरीश रावत बागियों पर पहले ही मनौवेज्ञानिक दबाव बना रहे हैं।

क्या है बागियों का प्रकरण
2017 के विधानसभा चुनाव के पहले 18 मार्च 2016 को उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत हो गई थी। जब कांग्रेस पार्टी के नौ विधायकों ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्चाइन की। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा हरक सिंह रावत सुबोध उनियाल ,रेखा आर्य, शैला रानी रावत , उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, शैलेंद्र मोहन सिंघल शामिल थे। शैलेंद्र मोहन सिंघल और शैला रानी को छोड़कर बाकी सभी चुनाव जीत गए। इन बागियों के अलावा सतपाल महाराज, यशपाल आर्य ने भी कांग्रेस छोड़ चुनाव से पहले भाजपा का दामन थामा था। बागियों में उमेश शर्मा काऊ और हरक सिंह को लेकर ही कांग्रेस खेमे में ज्यादा चर्चा है। कांग्रेसी सूत्र दावा कर रहे हैं कि हरीश रावत को इन दो विधायकों को लेकर ही ज्यादा परेशानी है।












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