Uttarakhand गोविंदघाट को हेमकुंड साहिब से जोड़ेगा हेमकुंड रोपवे, 45 मिनट में तय होगा सफर, ये बनेगा रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हेमकुंड रोपवे का शिलान्यास किया
Uttarakhand Hemkund ropeway सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को अब आने वाले समय में आसानी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को माणा गांव से हेमकुंड रोपवे का शिलान्यास किया। हेमकुंड रोपवे गोविंदघाट को हेमकुंड साहिब से जोड़ेगा। यह लगभग 12.4 किलोमीटर लंबा होगा और यात्रा समय को एक दिन से कम करके केवल 45 मिनट तक सीमित कर देगा।

दुनिया का सबसे ऊंचा और लंबा रोपवे
दावा है कि हेमकुंड साहिब रोपवे दुनिया का सबसे ऊंचा और लंबा रोपवे होगा। हेमकुंड साहिब के विकट रास्तों पर अब पैदल चलने की परेशानी नहीं होगी।यह रोपवे घांघरिया को भी जोड़ेगा, जो फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश द्वार है। इन दोनों रोपवे को लगभग 2430 करोड़ रुपये की संचयी लागत से विकसित किया जाएगा। यह परिवहन का एक पर्यावरण अनुकूल साधन होगा, जो आवागमन को सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करेगा। इस अहम बुनियादी ढांचे का विकास धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी और साथ ही साथ रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे।
हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए करीब 19 किमी पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती
हेमकुंड साहिब 15200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां के कपाट साल में मात्र पांच माह श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे बनने से सिर्फ 45 मिनट में सफर पूरा हो जाएगा। जिसके लिए श्रद्धालुओं को 1100 रूपए खर्चा करना पड़ेगा। वर्तमान में हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए करीब 19 किमी पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। जिसके लिए यात्रियों को पहले दिन घांघरिया रुकना पड़ता है और फिर अगले दिन हेमकुुंड साहिब की यात्रा कर रात्रि विश्राम के लिए घांघरिया आना पड़ता है। अगले दिन गोविंदघाट लौट पाते हैं।
हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली में
हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली में है। जो कि भारत में स्थित सिखों का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यह हिमालय में 4632 मीटर, 96 फुट की ऊँचाई पर एक बर्फ़ीली झील के किनारे सात पहाड़ों के बीच स्थित है। इन सात पहाड़ों पर निशान साहिब झूलते हैं। यहां पहुंचने के लिए गोविंदघाट से केवल पैदल चढ़ाई के द्वारा ही पहुंचा जा सकता है। यहां गुरुद्वारा हेमकुंट साहिब सुशोभित है। इस स्थान का उल्लेख गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित दसम ग्रंथ में आता है। इस कारण यह उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है जो दसम ग्रंथ में विश्वास रखते हैं। हेमकुंट एक संस्कृत नाम है, हेम का अर्थ बर्फ़ और कुंड मतलब कटोरा होता है।












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