उत्तराखंड विधानसभा में 250 भर्तियां निरस्त, सीएम धामी बोले: भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में सदन और सरकार एकजुट

उत्तराखंड विधानसभा में 2016 -2021 तक हुई 250 भर्तियां निरस्त

देहरादून, 23 सितंबर। उत्तराखंड विधानसभा में 2016 से 2021 तक हुई 250 भर्तियों की निरस्त कर दिया गया है। जो कि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण का सख्त कदम बताया जा रहा है। इस फैसले के बाद एक बार फिर धामी सरकार की भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार का संदेश साफ नजर आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में हुई भर्तियों के मामले में विधानसभा अध्यक्ष के तदर्थ भर्तियों को निरस्त करने के निर्णय का स्वागत किया है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष को बधाई दी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में सदन और सरकार एकजुट

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में सदन और सरकार एकजुट

।मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में सदन और सरकार एकजुट है। विधानसभा भर्ती मामले में मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से भर्तियों की जांच करने का आग्रह किया था। विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार की मंशा के अनुसार इस पर उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर समयबद्ध तरीके से जांच के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट में समिति ने संस्तुति के अनुसार 2016 में 150 वर्ष 2020 में 6 व वर्ष 2021 में 72 तदर्थ भर्तियों को निरस्त किया गया है।

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    उत्तराखंड विधानसभा में 2016 से 2021 के बीच हुई 250 भर्तियां निरस्त
    मुख्यमंत्री ने कहा , किसी भी प्रकार से भ्रष्टाचार सहन नहीं किया जाएगा

    मुख्यमंत्री ने कहा , किसी भी प्रकार से भ्रष्टाचार सहन नहीं किया जाएगा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सुशासन की दिशा में कृत संकल्पित होकर काम कर रही है। किसी भी प्रकार से कोई भ्रष्टाचार सहन नहीं किया जाएगा। यूकेएसएसएससी व अन्य भर्तियों में अनियमितता पाए जाने पर उन्हें पारदर्शिता से आयोजित करने के लिए उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग को हस्तांतरित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। युवा पूरे उत्साह और परिश्रम से परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाएं। वर्तमान में 7000 परीक्षाओं की भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। व 12 हजार पदों पर भर्ती की कार्ययोजना पर भी काम कर रहे हैं।

    समिति ने 20 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप दी

    समिति ने 20 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप दी

    उत्तराखंड में धामी सरकार ने एक बार फिर युवाओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। जैसे ही विधानसभा में बैकडोर भर्ती का मामला सोशल मीडिया में सामने आया। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने स्पीकर को पत्र लिखकर इसकी जांच करने का अनुरोध किया। स्पीकर ने भी तुरंत एक्शन लेते हुए जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई। समिति ने 20 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप दी। जिसके बाद स्पीकर ने सभी तदर्थ नियुक्तियों को निरस्त कर दिया। इसका प्रस्ताव अब शासन को भेजा जा रहा है। विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

    जांच समिति ने माना, जो भी तदर्थ नियुक्तियां हुईं थी, वह नियम के खिलाफ

    जांच समिति ने माना, जो भी तदर्थ नियुक्तियां हुईं थी, वह नियम के खिलाफ

    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जांच समिति ने माना है कि जो भी तदर्थ नियुक्तियां हुईं थी, वह नियम के खिलाफ थीं। उनके लिए ना तो विज्ञापन निकाला गया, ना रोजगार कार्यालय से कोई आवेदन मंगाए गए। जांच समिति ने माना है कि इन भर्तियों से संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 का उल्लंघन हुआ है। मूल रिपोर्ट 29 पेज की है जबकि सभी अटैचमेंट के साथ यह रिपोर्ट 2014 पेज की है।

    विधान सभा अध्यक्ष ने सचिव मुकेश सिंघल को सस्पेंड कर दिया

    विधान सभा अध्यक्ष ने सचिव मुकेश सिंघल को सस्पेंड कर दिया

    विधानसभा में 2016 से 2022 तक कि तदर्थ नियुक्ति निरस्त की गई हैं। पिछले साल हुई 32 पदों की भर्तियों को निरस्त कर दिया गया है। आरएमएस टेक्नो सोलुशन कंपनी को दिए गए 56 लाख के भुगतान पर सचिव की भूमिका संदिग्ध है। 2021 के ही उपनल से भर्ती 22 नियुक्ति रद्द कर दी गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने जो नियुक्तियां निरस्त की हैं, उनमें 228 तदर्थ हैं और 22 उपनल के माध्यम से। कुल मिलाकर 250 हैं। विधान सभा अध्यक्ष ने सचिव मुकेश सिंघल को सस्पेंड कर दिया है।

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