2025 तक पहुंचेगी उत्तराखंड के पहाड़ों पर रेल, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से बदल जाएगी तस्वीर
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना 31 दिसंबर 2024 तक पूरा होगा
देहरादून, 17 सितंबर। उत्तराखंड के पहाड़ों पर 2025 तक रेल पहुंच जाएगी। रेल विकास निगम की और से आरटीआई के तहत जानकारी दी गई है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य 31 दिसंबर 2024 तक पूरा हो जाएगा।

परियोजना पूरी होने की तिथि 31 दिसंबर 2024
काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने रेल मंत्रालय से उत्तराखंड की नई रेल लाइनों के संबंध में सूचनाएं मांगी थीं। इसके जवाब में रेल विकास निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक के लोग सूचना अधिकारी ने 16 अगस्त को सूचना उपलब्ध कराई है। सूचना में बताया गया कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज पर 126 किमी लंबी रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग लाइन नौ पैैकेजों में विभाजित है। यह परियोजना पूरी होने की तिथि 31 दिसंबर 2024 है।

लंबाई 125.172 किमी में से 5.770 किमी का कार्य पूर्ण
सूूचना में बताया गया कि इस रेललाइन की कुल लंबाई 125.172 किमी में से 5.770 किमी का कार्य पूर्ण हो चुका हैै। मुख्य सुरंगों की 104 किमी लंबाई में से 24 किमी का कार्य किया जा चुका हैै जबकि स्केप सुरंगों की कुल लंबाई 97.7 किमी में से 26 किमी का कार्य कराया जा चुका है। एक महत्वपूर्ण पुल, एक सड़क पुल, सड़क के ऊपर दो पुलों,आरओबी, में से एक अंडरब्रिज एक, चार एलएचएस में से एक, छोटे 34 पुलों में से 15 का निर्माण हो चुका है। इस रूट पर प्रस्तावित 12 स्टेशनों में से एक नए स्टेशन का काम पूरा हो चुका हैै।

126 किमी लंबी रेल परियोजना में 105 किलोमीटर लाइन सुरंगों के अंदर से
ऋषिकेेश कर्णप्रयाग ब्राडगेज रेल परियोजना करीब 16.216 करोड़ की लागत से बन रही है। 126 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना में 105 किलोमीटर लाइन सुरंगों के अंदर से गुजरेगी। जबकि 21 किलोमीटर ट्रैक खुले आसमान के नीचे बनेगा। इस परियोजना निर्माण में 17 सुरंगों का निर्माण हो रहा है। 126 किलोमीटर की इस रेल परियोजना के 9 फेज में 80 प्रवेश द्वार होंगे।

ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा का समय सिर्फ 2 घंटे
इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे हो जाएगा। इससे कर्णप्रयाग से बद्रीनाथ का 4.30 घंटे का सफर भी मात्र दोे घंटे में तय हो जाएगा। ऋषिकेश से बद्रीनाथ सिर्फ चार घंटे लगेंगे। इस यात्रा में पहले 11 घंटे लगते थे। उत्तराखंड में देश की सबसे लंबी 15 किलोमीटर की रेल सुरंग ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच बन रही हैं।

रेल लाइन का सपना देखना , अमलीजामा पहनाने को लेकर कई दावे
पहाड़ों में रेल लाइन का सपना देखना और इसे अमलीजामा पहनाने को लेकर कई दावे हैं। जानकारों की मानें तो वर्ष 1914 के प्रथम विश्व युद्ध के नायक विक्टोरिया क्रॉस दरबान सिंह नेगी को प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अंग्रेजी साम्राज्य के तत्कालीन सम्राट जॉर्ज पंचम ने युद्ध में गढ़वाल राइफल के नायक दरबान सिंह नेगी की वीरता को देखते हुए उन्हें सर्वोच्च सैनिक सम्मान विक्टोरिया क्रॉस प्रदान किया। इस दौरान ब्रिटेन के महाराजा ने नेगी से उनकी इच्छाएं पूछी। कहा जाता है कि नेगी ने महाराजा से अपनी एक इच्छा कर्णप्रयाग तक रेल लाइन बिछाने के रूप में व्यक्त की।

पहाड़ की दुश्वारियां कम हो जाएगी, चारधाम यात्रा भी सरल और सुगम
साथ ही दावा है कि इतिहास में वर्ष 1924 में अंग्रेजों द्वारा ऋषिकेश.कर्णप्रयाग रेलवे लाइन का पहली बार सर्वे का विवरण है। इससे पूर्व अंग्रेज मसूरी तक रेल लाइन का सर्वे भी कर चुके थे। लेकिन यह काम आगे न बढ़ पाया। समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण की मांग उठती रही। लेकिन इस पर कुछ काम नहीं हुआ। सियासी दलों ने भी कई बार इस पर राजनीति की। लेकिन धरातल पर काम अब नजर आ रहा है। इस प्रोजेक्ट से पहाड़ की दुश्वारियां काफी कम हो जाएगी। साथ ही चारधाम यात्रा भी सरल और सुगम हो जाएगी। रेलवे के क्षेत्र में मोदी सरकार की उत्तराखंड के लिए एक अन्य सौगात चार धामों को रेल परिवहन से जोड़ने की है। लगभग 327 किमी लंबी इस परियोजना से उत्तराखंड स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ को रेल मार्ग से जोड़ा जाएगा। लगभग 40 हजार करोड़ से अधिक की इस परियोजना का लोकेशन सर्वे जारी है। चारधाम रेल परियोजना में 21 रेलवे स्टेशन व 61 टनल प्रस्तावित हैं।












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