जंगलों को आग से बचाने को धामी सरकार की ये बड़ी पहल, ऐसे होगा पिरुल का इस्तेमाल

उत्तराखंड में पिरूल से ब्रिकेट बनाने को बनेगा प्लान

देहरादून, 17 सितंबर। उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर जंगलों को आग से बचाने के लिए पिरुल के निस्तारण और अन्य उपयोगों को लेकर पहल की है। इसके लिए सरकार पिरुल के विभिन्न क्षेत्रों में कमर्शियल प्रयोग की संभावनाओं को तलाशने में जुटी हुई है। जिसमें पिरुल के ब्रिकेट कोयले के सब्सिट्यूट के रूप में इस्तेमाल करने पर फोकस किया जा रहा है। मुख्य सचिव डॉ एस एस संधु ने पिरूल से बड़े स्तर पर ब्रिकेट बनाने के लिए वन विभाग को योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने पिरुल के प्रयोगों की अन्य संभावनाओं को तलाशे जाने के लिए एक्सपर्ट्स या किसी इंस्टीट्यूशन को लगाए जाने के भी निर्देश दिए

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प्रदेश में जंगलों की आग का मुख्य कारण पिरूल

मुख्य सचिव डॉ एस एस संधु ने जंगलों को आग से बचाने के लिए पिरुल के निस्तारण और अन्य उपयोगों के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में जंगलों की आग का मुख्य कारण पिरूल है, जिसके कारण हर साल अनमोल वन संपत्ति का नुकसान हो रहा है। मुख्य सचिव ने कहा कि पिरुल के निस्तारण के बाद जंगलों की आग की संभावनाओं को कम किया जाने में मदद मिलेगी साथ ही इससे क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को पिरुल के विभिन्न क्षेत्रों में कमर्शियल प्रयोग की संभावनाओं को तलाशे जाने के निर्देश दिए।

एक्सपर्ट्स या किसी इंस्टीट्यूशन को लगाए जाने के भी निर्देश

मुख्य सचिव ने पिरुल के प्रयोगों की अन्य संभावनाओं को तलाशे जाने के लिए एक्सपर्ट्स या किसी इंस्टीट्यूशन को लगाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिरुल के ब्रिकेट कोयले के सब्सिट्यूट के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसके लिए उन्होंने पिरूल से बड़े स्तर पर ब्रिकेट बनाने के लिए वन विभाग को योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके प्लांट्स राज्य में हाईवे के आस.पास बनाए जाएं ताकि सप्लाई में आसानी हो। साथ ही ब्रिकेट्स की मार्केटिंग के लिए थर्मल पॉवर प्लांट्स से संपर्क स्थापित किया जाए। मुख्य सचिव ने छोटे ब्रिकेट प्लांट के लिए स्वयं सहायता समूहों को जोड़ते हुए छोटी योजनाएं संचालित किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना के संचालन के लिए साप्ताहिक मॉनिटरिंग की जाए।

पिरूल से बिजली उत्पादन, स्वरोजगार और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का सपना परवान नहीं चढ़ पाया
बता दें कि इससे पहले पिरूल से बिजली उत्पादन, गांवों तक स्वरोजगार और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का सपना परवान नहीं चढ़ पाया है। राज्य सरकार उत्तराखंड रिनिवेबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ,उरेडा, के माध्यम से 21 प्रोजेक्ट आवंटित हुए थे। जिनमें से छह प्रोजेक्ट लगे और उनमें से अब कई बंद हो चुके हैं। बाकी भी बंदी की कगार पर हैं। करीब ढाई साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जंगलों में चीड़ के पिरूल से लगने वाली आग के समाधान के तौर पर पिरूल से बिजली उत्पादन की नीति बनवाई। यह नीति जारी हुई। इस आधार पर उरेडा ने लोगों से प्रस्ताव मांगे। पहले चरण में 21 प्रोजेक्ट आवंटित किए गए। इनमें से अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल, उत्तरकाशी और पौड़ी में कुल छह प्रोजेक्ट स्थापित हुए। बाकी आवेदक अभी तक प्रोजेक्ट ही नहीं लगा पाए।

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