स्थापना दिवस पर उत्तराखंड के क्षेत्रीय दल UKD के पार्टी कार्यालय में हुआ जमकर बवाल, जानिए इसके पीछे की वजह
उत्तराखंड के क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांतिदल के स्थापना दिवस पर देहरादून स्थित पार्टी कार्यालय में जमकर बवाल हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।
उत्तराखंड के क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांतिदल के स्थापना दिवस पर देहरादून स्थित पार्टी कार्यालय में जमकर बवाल हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। इस दौरान यूकेडी दो गुटों में बंटी नजर आई। यूकेडी के शीर्ष नेताओं का आरोप है कि पार्टी से निष्कासित किए गए शिव प्रसाद सेमवाल गुट ने ऑफिस पर कब्जा कर लिया। इससे दूसरे गुट के लोग नाराज होकर हंगामा करने लगे। जिसके बाद देहरादून स्थित यूकेडी कार्यालय में जमकर बवाल, हंगामा हुआ और कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की।

इसके बाद पुलिस ने आकर कार्यकर्ताओं को समझाया। पार्टी कार्यालय में ये बवाल दो दिन चलता रहा। अब पार्टी शीर्ष नेतृत्व के सामने फिर से गुटबाजी में बंटी पार्टी को एक जुट करने की चुनौती है। यूकेडी के मुख्य प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट ने कहा कि जो लोग पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं, वो इस तरह पार्टी कार्यालय में आकर हंगामा कर रहे हैं। ये बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में कुछ बाहरी लोग शामिल हैं जो कि पार्टी पर अपना कब्जा जमाना चाहते हैं। लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जाएगा।
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उत्तराखंड राज्य के संघर्ष के लिए जन्मा क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल पूरी तरह से हाशिए पर पहुंच चुका है।राज्य गठन से लेकर अब तक यूकेडी राज्य में अपना जनाधार खोता चला गया, यही वजह रही कि 2017 के विधानसभा चुनाव में यूकेडी का एक भी विधायक चुनकर विधानसभा तक नहीं पहुंचा पाया। 2002 के विधानसभा चुनाव में यूकेडी के चार विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे और उस वक्त यूकेडी को 5.49 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन, 2007 के चुनाव में ये खिसकर 3 विधायकों पर आ गया और वोट प्रतिशत घटकर 3.7 फीसदी के लगभग पहुंच गया।
2012 के विधानसभा चुनाव में यूकेडी का जनाधार गिरकर 1.93 फीसदी पर आ गया और एक ही विधायक यूकेडी का जीत पाया। 2017 में यूकेडी का जनाधार पूरी तरह से खत्म हो गया। चुनाव में यूकेडी का एक भी विधायक नहीं जीत पाया और वोट प्रतिशत घटकर 0.7 फीसदी पर पहुंच गया। हालांकि यूकेडी ने कई बार सत्ता में शामिल होकर भाजपा, कांग्रेस को भी सहयोग किया।
2007 में यूकेडी ने भाजपा को समर्थन दिया और यूकेडी कोटे से दिवाकर भट्ट कैबिनेट मंत्री बने। 2012 के चुनावों में भी यूकेडी के एकमात्र विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने कांग्रेस को समर्थन दिया और यूकेडी के कोटे से सरकार में मंत्री रहे। बाद में इन नेताओं को पार्टी से बाहर किया गया। प्रीतम सिंह अब भाजपा से विधायक हैं जबकि दिवाकर भट्ट वापस यूकेडी में आ गए हैं। ऐसे में बीते 22 सालों से क्षेत्रीय दल अपनी सियासी जमीन तलाश रही है।












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