Uttarakhand Glacier Burst : वायुसेना के Mi-17, चिनूक और एडवांस हेलीकॉप्टर ने संभाला मोर्चा
Uttarakhand Glacier Burst : उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही के बीच भारतीय वायुसेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया है। हेलीकॉप्टरों को प्रभावित क्षेत्र में रेकी के लिए लगाया गया है, जो जरूरत के मुताबिक मुसीबत में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट कर रहे हैं। वायुसेना के मुताबिक 6 MI-17, 1 एएलएच और 1 चिनूक लगातार उड़ान भर रहे हैं। इनके जरिए देहरादून से जोशीमठ तक मदद मुहैया कराई जा रही है।
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भारतीय वायु सेना ने DRDO के 6 वैज्ञानिकों को उनके विशेष उपकरणों के साथ प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए एक एएलएच (एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर) को काम सौंपा है। आगे क्या करना है उसको लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत की जा रही है।भारतीय वायुसेना के बयान के मुताबिक जोशीमठ के लिए देहरादून से बचाव और राहत दल के साथ Mi-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों को भेजा गया है।
वायुसेना ने बताया कि जोशीमठ के लिए देहरादून से बचाव और राहत दल के साथ Mi-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों को भेजा गया है। वायुसेना टास्क फोर्स के कमांडर चल रहे HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) प्रयासों के लिए राज्य के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं। वहीं देहरादून के एयरपोर्ट डायरेक्टर ने बताया है कि भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन के तहत 2 हरक्यूलिस, 2 एन -32 और 4 हेलिकॉप्टर शामिल थे। NDRF की टीम और उनके उपकरणों की आवाजाही भी हुई है। सुबह से 3 Mi-17, 1 चिनूक और 1 एएलएच हेलीकॉप्टर ने उड़ानें भरी हैं।
अब तक 26 शव हुए बरामद, 1,500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया है कि अबतक 26 शव बरामद किए गए हैं. 171 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें से लगभग 35 लोग सुरंग में हैं, जहां बचाव अभियान अभी भी जारी है। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जोशीमठ इलाके का दौरा किया है। उन्होंने बताया कि बचाव दल तपोवन सुरंग के 130 मीटर अंदर तक जा चुका है। अब और 50 मीटर अंदर तक पहुंचने में 2-3 घंटे लग सकते हैं। NTPCको 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।












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