उत्तराखंड के हर जिले में बनेगा एक-एक संस्कृत ग्राम, संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए ये है सरकार की रणनीति
उत्तराखंड के हर जिले में होंगे एक-एक संस्कृत ग्राम
देहरादून, 6 अगस्त। उत्तराखंड सरकार प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक-एक गांव को संस्कृत ग्राम बनाने जा रही है। इसके लिए 5 लाख लोगों को संस्कृत भाषा की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। 8 अगस्त से राजभवन में संस्कृत सप्ताह आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने सोशल मीडिया के जरिए सभी लोगों को इस अभियान में शामिल होने का आह्रवान किया है।

संस्कृत भाषा के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा
उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक-एक संस्कृत. ग्राम विकसित करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत हर जिले में एक ऐसा गांव होगा जहां के लोग संस्कृत भाषा में ही संवाद करने के साथ ही अपने वैद और पुराणों के बारे में अवेयर होंगे। इसके जरिए सरकार संस्कृत भाषा को एक बार पुनः युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाने में जुट गई है। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत ने कहा कि इन गांवों में लोगों को संस्कृत भाषा का प्रयोग करने को प्रेरित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे पहले सरकार 8 अगस्त से संस्कृत सप्ताह मनाने जा रही है। जिसमें सेमिनार से लेकर कई कार्यक्रम संस्कृत में ही आयोजित होंगे।बता दें कि संस्कृत प्रदेश की दूसरी आधिकारिक भाषा है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक में एक गांव है जहां सिर्फ संस्कृत बोली जाती है।
प्राचीन भारतीय संस्कृति केंद्र भी होगा
सरकार अब लोगों को वेद और पुराण भी पढ़ाने के साथ ही संस्कृत बोलना सीखाएंगे। मंत्री ने बताया कि संस्कृत ग्राम कहे जाने वाले ऐसे हरेक गांव में प्राचीन भारतीय संस्कृति केंद्र भी होगा। उन्होंने कहा ये गांव देश और विदेश से आने वाले लोगों के लिए भारत की प्राचीन संस्कृति की झलक भी पेश करेगा। राज्य सरकार संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों को जागरूक कर रही है। वर्तमान में राज्य में 100 से अधिक संस्कृत माध्यम के स्कूल हैं। कर्नाटक के शिमोगा जिले का मट्टूर गांव एक संस्कृत ग्राम है जहां के निवासी प्राचीन भाषा में बात करते हैं। लगभग 5 हजार लोगों की आबादी वाले गांव में एक पाठशाला पारंपरिक स्कूल है। इसी गांव के आधार पर राज्य सरकार प्रदेश में मॉडल विकसित करेगी।












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