उत्तराखंड भाजपा ने दिया मिशन हैट्रिक और 60 पार का नारा, महेंद्र भट्ट को सौंपी जिम्मेदारी, अब कांग्रेस की बारी
Uttarakhand politics: उत्तराखंड में भाजपा ने मिशन 2027 के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा महेंद्र भट्ट को बैठाया गया है। साफ है कि 2027 का चुनाव महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। ऐसे में महेंद्र भट्ट ने अब 2027 के लिए हैट्रिक और 60 पार का नारा दिया है।
जिसके लिए भाजपा अभी से रणनीति बनाने में जुट गई है। सीएम धामी ने भी साफ कर दिया है कि हाईकमान की ओर से उनके काम को हरी झंडी दे दी गई है। महेंद्र भट्ट को रिपीट करना धामी के कामों पर भी मुहर मानी जा रही है। महेंद्र भट्ट के प्रदेश अध्यक्ष बनने से सीएम धामी को लेकर उड़ाई जा रही अफवाहों पर विराम लग गया है।

अब विपक्ष यानि कांग्रेस की बारी है। कांग्रेस 2027 का चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ेगी। इसका सबको इंतजार है। करन माहरा प्रदेश अध्यक्ष बने रहते हैं या फिर उनकी जगह किसी दूसरे चेहरे को लाया जाता है। ये देखना भी दिलचस्प होगा। कांग्रेस के अंदर भी नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से सुगबुगाहट तेज है। जो अब कुर्सी पर बैठेगा, उसी के नेतृत्व में 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा।
पूर्व सीएम हरीश रावत पहले ही चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। लेकिन नई टीम पर हरदा की सहमति भी जरुरी है। ऐसे में कांग्रेस जिस चेहरे को भी आगे लाएगी, वह हरदा की पंसद भी होना तय है। कांग्रेस में जिन चेहरों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है।
गणेश गोदियाल लोकसभा चुनाव से लेकर हर मोर्चे पर भाजपा के खिलाफ प्रखर तरीके से मोर्चा खोले हुए है। इस समय जो कांग्रेस की स्थिति है, ऐसे में गणेश गोदियाल ही कांग्रेस के लिए सबसे भरोसेमंद चेहरा माने जा रहे हैं। हालांकि खेमे और गुटो में बंटी कांग्रेस के लिए एक चेहरे पर सहमति बना पाना आसान नहीं है।
विधायक प्रीतम सिंह कांग्रेस के लिए एक बड़ा विकल्प हैं। प्रीतम सिह प्रदेश अध्यक्ष से लेकर नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। लंबे समय से विधायक चुना जाने का अनुभव और संगठन चलाने का भी उनके पास अनुभव है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य कांग्रेस के लिए बड़ा दलित चेहरा हैंं। ऐसे में नए प्रयोग के तौर पर उनको ये जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
कुछ लोग हरक सिंह पर भी दांव खेलने की बात कर रहे हैं। लेकिन हरदा से हरक का पुराना विवाद उनको इस जिम्मेदारी से दूर रख सकता है। इसके अलावा विधानसभा में उपनेता और युवा विधायक भुवन कापड़ी, विधायक मनोज तिवारी भी कांग्रेस के लिए विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस चेहरे पर दांव खेलता है और 2027 के चुनावों की कमान सौंपता है।












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