Uttarakhand Avalanche: 15 दिन में एवरेस्ट और मकालू जीतने वाली बहादुर बेटी नहीं रही, बेटियों के लिए थी प्रेरणा

उत्तरकाशी में हुए हिमस्खलन में सविता कंसवाल की मौत

देहरादून, 5 अक्टूबर। उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन में निम की ट्रेनर 26 वर्षीय सविता कंसवाल की भी मौत हो गई है। सविता ने इसी साल केवल 15 दिनों में माउंट एवरेस्ट और माउंट मकालू पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बनने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। सविता की मृत्य की खबर सुनते ही पूरे उत्तरकाशी क्षेत्र में शोक की लहर है। हर कोई पहाड़ की बेटी को याद कर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सविता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन हादसे में मौत

द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन हादसे में मौत

उत्तरकाशी के लोंथरु गांव की निवासी पर्वतारोही सविता कंसवाल की मंगलवार को हुए द्रौपदी का डांडा में हुए हिमस्खलन हादसे में मौत हो गई है। सविता ने इसी साल मई माह में 15 दिन के अंदर एवरेस्ट और माउंट मकालू पर्वत सफल आरोहण कर नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया था। निम के प्रधानाचार्य अमित बिष्ट ने हादसे में एवरेस्ट विजेता सविता कंसवाल की मौत की पुष्टि की है।

उत्तरकाशी जिले के लोंथरू गांव की रहने वाली थी

उत्तरकाशी जिले के लोंथरू गांव की रहने वाली थी

सविता उत्तरकाशी जिले के लोंथरू गांव की रहने वाली थी। जो कि एक गरीब घर की बेटी थी। सविता अपने घर और परिजनों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई थी। लेकिन इस तरह बहुत छोटी उम्र में इस तरह दुनिया से चले जाने पर उनके गांव और पूरे क्षेत्र के लोग गमगीन हैं।

पहाड़ की बेटियों के लिए वे एक प्रेरणा बन चुकी थी

पहाड़ की बेटियों के लिए वे एक प्रेरणा बन चुकी थी

सविता ने बहुत कम समय में ही पर्वतारोही के क्षेत्र में अपना, प्रदेश और पूरे भारत का नाम रोशन किया था। सविता के इस कार्य के लिए उन्हें हाल ही में सम्मानित भी किया गया था। साथ ही पहाड़ की बेटियों के लिए वे एक प्रेरणा बन चुकी थी। सोशल मीडिया में उनकी मौत के बाद कई वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। जिसमें वो बेटियों का उत्साहवर्धन और अपना संदेश देते हुए नजर आ रही हैं।

सविता नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की एक कुशल प्रशिक्षक थी

सविता नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की एक कुशल प्रशिक्षक थी

सविता ने नेहरु पर्वतारोहण संस्थान से एडवांस और सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स के साथ पर्वतारोहण प्रशिक्षक का कोर्स किया था। सविता नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की एक कुशल प्रशिक्षक थी। इसी साल 12 मई को सविता ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट ,8848 मीटर पर तिरंगा फहराया था। इसके 15 दिन बाद सविता ने माउंट मकालू ,8463 मीटर पर भी सफल आरोहण किया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी सविता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी सविता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लिखा है कि
द्रौपदी का डांडा 2 पर्वत चोटी में हुए हिमस्खलन की चपेट में आने से हिमालय पुत्री सविता कंसवाल एवं नौमी रावत के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। सविता ने मई में ही माउंट एवरेस्ट फतह किया था। बाबा केदार पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों को यह असीम कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

निम का 58 पर्वतारोहियों का दल हिमस्खलन की चपेट में आ गया

निम का 58 पर्वतारोहियों का दल हिमस्खलन की चपेट में आ गया

उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा में प्रशिक्षण के लिए निकला नेहरू पर्वतारोहण संस्थान यानी निम का 58 पर्वतारोहियों का दल मंगलवार सुबह हिमस्खलन की चपेट में आ गया। वायुसेना ने रेस्क्यू अभियान चलाकर अभी तक 32 लोगों को बचाया है। वहीं, 16 लोग लापता हैं। जबकि अभी तक 10 लोगों के शव बरामद हुए हैं।

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