तुंगनाथ धाम: सभामंडप में दो घंटे पूजा करने की मांग पर अड़ा तीर्थयात्री, पुजारी ने किया इनकार तो कर दी मारपीट
तुंगनाथ धाम में तीर्थ यात्रियों का पुजारियों से विवाद और मारपीट का मामला सामने आया है। मंदिर के पुजारी ने उखीमठ में अज्ञात यात्रियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि तीर्थ यात्रियों ने सभा मंडप में 2 घंटे तक पूजा करने की जिद पूरी न होने पर पुजारी पर हमला किया और अभद्रता भी की। पुलिस ने इस मामले में अब जांच शुरू कर दी है।

घटना मंगलवार की बताई जा रही है। पंचपुरोहित अध्यक्ष रीवाधर मैठाणी ने बताया कि मंगलवार दोपहर मंदिर के भीतर एक यात्री सभामंडप में जा पहुंचा। वह दो घंटे तक पूजा करने की जिद पर अड़ गया। समझाने पर नहीं माना और बाहर जाकर अपने साथियों को ले आया। इसके बाद अन्य तीर्थ यात्रियों के कलश में रखे जल को पुजारियों पर डाल दिया और गर्भ गृह में तैनात पुजारी हर्षबर्धन मैठाणी पर लौटे से हमला कर दिया।
पुलिस ने पुजारी की शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया में ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही मंदिरों की सुरक्षा और नियमों को सख्त करने की मांग कर रहे हैं। ये मंदिर बद्री केदार मंदिर समिति के संरक्षण में संचालित होता है। ऐसे में स्थानीय लोग समिति से इस पर सख्त एक्शन लेने की बात कर रहे हैं। साथ ही मंदिरों में यूट्यूबर और रील्स बनाने के उद्देश्य से आ रहे लोगों पर सख्त एक्शन लेने की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया एक्टिविस्ट पहाड़ी दीदी (रेखा देवशाली) ने लिखा है कि इनमें से अधिकांश लोग रील्स वाले और यूट्यूबर हैं जिनको यात्रा से कोई लेना देना नही है , सरकार को मंदिरों में मोबाइल औऱ कैमरे बन्द करवा देने चाहिए।
लेखक पत्रकार और समाजसेवी ललित फुलेरा लिखते हैं कि दु:खद स्थिति है। ऐसे पर्यटकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पता नहीं पहाड़ की तरफ रुख करने वाले पर्यटकों में कानून और प्रशासन का खौफ क्यों नहीं होता है? कभी नैनीताल तो कभी अन्य पर्यटकों स्थलों पर बाहर से आने वाले टूरिस्टों की बदतमीजी और गुंडागर्दी की खबरें तो अक्सर सुनने में आती ही हैं। अब धार्मिक स्थलों पर भी पुजारियों से मारपीट होने लगी है। ऐसे पर्यटकों की राज्य में एंट्री बैन कर देनी चाहिए।
तुंगनाथ पर्वत पर स्थित इस मंदिर की ऊंचाई 3640 मीटर है। तुंगनाथ मंदिर पंचकेदार (तुंगनाथ, केदारनाथ,मध्य महेश्वर, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर) में सबसे ऊंचाई पर स्थित है। मान्यता है कि इसी स्थान पर शिवजी भुजा रूप में विद्यमान हैं। इसलिए प्राचीनकाल के इस मंदिर में भगवान शिव के भुजाओं की पूजा होती है।












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