31 जुलाई मौत का मंजर! 10 साल बाद एक ही दिन देवभूमि में आई तबाही, स्थानीय लोगों ने सुनाई 'महात्मा' की कहानी

Tehri Cloudburst news: 10 साल पहले टिहरी में भयंकर हादसा हुआ था, जिसमें न जाने कितने ही लोग अपनी जान गंवा बैठे थे। बारिश का समय था। आमतौर पर बारिश पहाड़ों में प्रलय लेकर आती है। मगर टिहरी का वो प्रलय लोग 10 सालों बाद भुला नहीं सके थे कि उसी दिन उसी तारीख को फिर प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया, जिसमें 3 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे।

20 मिनट की बारिश ने मचाई तबाही
जी हां! दिन था 31 जुलाई 2024 का, जब टिहरी में 31 जुलाई की रात भयंकर मलबा आया। जिस जगह ये मलबा आया, वहां पर एक भवन हुआ करता था। टिहरी के घनसाली में सिर्फ 20 मिनट की बारिश ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ गई।

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हादसा सुर्खियों में है और इसकी वजह न सिर्फ 3 लोगों की मौत बल्कि इस प्रलय का समय और दिन भी है। साल 2014 में दस साल पहले इसी जगह पर 31 जुलाई का ही दिन था, जब प्रलय आई थी। अब 10 सालों के बाद हालिया घटना ने लोगों को साल 2014 की याद दिला दी।

बारामासा से बात करते हुए स्थानीय लोगों ने घटना को लेकर काफी कुछ बताया। जखनाली गांव के स्थानीय सुपाल सिंह परमार ने बताया कि रात के 08:30 से लेकर 9 बजे के बीच की बात है। सिर्फ 20 मिनट की बारिश हुई। मुझे किसी ने टॉर्च लगाकर बताया कि आपदा आ गई है।

आपदा रूस गधेरा में आई थी। ये वही गधेरा है जहां साल 2014 में भी आपदा आई थी। आपदा का दिन भी एक ही है। 31 जुलाई। बस टाइमिंग जरा अलग है। तब रात के 1 बजे का वक्त था और तब पांच लोग मारे गए थे। और इस बार 08:30 से 9 बजे के बीच ये आपदा आई।

क्या 'महात्मा' की वजह से गई जान?
मैंने अपनी जिंदगी में सिर्फ 2 बार इस गधेरे को देखा है, एक साल 2014 में और एक इस साल। ये सारा का सारा मलबा जो भी आया है कल रात का ही है। एक शख्स ने यहां होटल बना रखा था। अच्छा खासा होटल था रजिस्टर्ड जमीन पर। उनके साथ यहां एक महात्मा जी बैठे हुए थे।

किसी को भागने का मौका नहीं मिला
महात्मा जी के लिए खाना-पीना बनाने के लिए ही कल वे देर हो गए। आमतौर पर वे यहां से जल्दी निकल जाते हैं मगर कल महात्मा जी की आवभगत के चक्कर में देरी हो गई। इतने में तेज बारिश होने लगी। उन लोगों को पता ही नहीं चला कि पानी इतना ज्यादा है। देखते देखते ऐसी प्रलय आई कि किसी को भी भागने का मौका नहीं मिला।

न उन लोगों को और ना ही महात्मा जी को। अब हादसे में मारे जाने वाले तीन लोगों की बॉडी रिकवर हो गई है मगर महात्मा जी का दूर दूर तक कोई अता पता ही नहीं है। माता-पिता की बॉडी उसी वक्त मिली मगर लड़का जिंदा था। ऋषिकेश ले जाने के क्रम में उसने दम तोड़ दिया। मगर अभी तक भी उन महात्मा का कोई अता-पता नहीं है।

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