उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के मामले पर सुप्रीम सुनवाई, कोर्ट ने उत्तराखंड और केंद्र सरकार से पूछे ये सवाल
उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग के मामले पर बुधवार (15 मई) को सुप्रीम ने सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा चुनाव 2024 में वन विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाए जाने को लेकर उत्तराखंड सरकार से जबाव मांगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार की तैयारियों को लेकर रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव से शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के लिए कहा है।

कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि उसने जरूरत के मुताबिक फंड राज्य को क्यों नहीं दिया। साथ ही राज्य सरकार की तरफ से फंड का सही इस्तेमाल न किए जाने पर भी सवाल उठाए। उत्तराखंड में वनाग्नि सबसे बड़ा संकट बना हुआ है। पिछले साल 1 नवंबर से लगभग 1437 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। याचिकाओं के मुताबिक राज्य में कम से कम 910 घटनाएं हुई हैं।
अदालत ने कहा, "पर्याप्त धनराशि क्यों नहीं दी गई? आपने वन कर्मचारियों को आग के बीच चुनाव ड्यूटी पर क्यों लगाया है? पिछली सुनवाई में, आलोचना झेल रहे राज्य ने कहा था कि मतदान केंद्रों पर तैनात वन अधिकारियों को उनके काम पर वापस बुला लिया गया है।
राज्य के कानूनी प्रतिनिधि ने कहा, "मुख्य सचिव नेनिर्देश दिया है कि अब किसी भी वन अधिकारी को चुनाव ड्यूटी पर न लगाया जाए। हम अब आदेश वापस ले लेंगे।
अदालत ने उत्तराखंड में जंगल की आग पर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी। कोर्ट को बताया गया कि उत्तराखंड के 40 फीसदी जंगल आग की चपेट में है। इसे बुझाया नहीं जा सका है। उत्तराखंड के वकील की ओर से कहा गया कि कोई नई आग नहीं लगी है।
वकील ने आगे तर्क दिया कि राज्य सरकार को जंगल की आग से निपटने के लिए केंद्र से धन नहीं मिला है। इसमें आगे कहा गया कि हम आग बुझाने की स्थिति में हैं। 9,000 से अधिक लोग काम कर रहे हैं और 420 मामले दर्ज किए गए हैं।












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