Shankaracharya controversy ब्राह्मण समाज के लोगों का अनोखा प्रदर्शन, पूर्व सीएम हरीश रावत ने कह दी बड़ी बात
Shankaracharya controversy शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के प्रयागराज में गंगा स्नान न करने को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। तीर्थ पुरोहितों और संत समाज के समर्थन के बाद अब इस मामले में अब जमकर सियासत भी शुरू हो गई है। उत्तराखंड के पूर्व सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने भी इस मामले में भाजपा सरकार को जमकर घेरा।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि शंकराचार्य सनातन परंपरा है। अब पता चला उसमें भी यह अधिकार सरकार ने अपने ऊपर ले लिया है कि कौन से शंकराचार्य जी वैध हैं, कौन से अवैध हैं? सारा ज्योतिष पीठ क्षेत्र जिन्हें शंकराचार्य मानकर उनके चरणधुल्य लेता है।

अब पता चल रहा है बकौल सत्ता सूत्रों के कि वह शंकराचार्य है ही नहीं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य एक संस्था है, सनातन की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है उसके अवमूल्यन का अधिकार किसी सत्ता को नहीं दिया जा सकता है। इसके विरोध में हरीश रावत ने आवास पर 1 घंटे का मौन उपवास किया।
उधर हरिद्वार में इस मामले को लेकर ब्राह्मण समाज के लोगों ने चंद्राचार्य चौक पर प्रयागराज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्व मेयर अनीता शर्मा के पति अशोक शर्मा ने अपना मुंडन कराकर विरोध दर्ज करवाया। उनके साथ रणवीर शर्मा और मुकेश शर्मा ने भी अपना मुंडन कराकर प्रयागराज प्रशासन से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पास जाकर माफी मांगने की मांग की।
प्रदर्शन को ब्राह्मण समाज के साथ कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन दिया। बता देंकि बीती 18 जनवरी को प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को पुलिस ने संगम तट पर जाने से रोक दिया था, जिसको लेकर विरोध हो रहा है। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी हुई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर शिष्यों के साथ मौनी अमावस्या के दिन बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया गया है। तब से इस मामले में विरोध प्रदर्शन और सियासत जारी है।












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